हिंदू स्वेच्छा से बने हैं और बने रहेंगे
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जयपुर हाईवे से लगभग डेढ़ किलोमीटर अंदर डावली, रठिया में लगभग बीस हिंदू परिवारों के बीच रहमत उर्फ गठेली का परिवार अकेला मुस्लिम है। रहमत पिछले लगभग आठ साल से ग्राम पंचायत की जमीन पर अपने परिवार के साथ यहां रह रहे हैं। मुस्लिम होते हुए भी उनके बेटों को आसपास के लोग रवि, राजू, मुन्ना और कलुआ के नाम से ही जानते हैं। रहमत को भी अधिकांश लोग गठेली ही बुलाते हैं। इन्हीं नामों से इनके वोटर कार्ड बने।
25 दिसंबर को धर्मांतरण करने वाले इस संयुक्त परिवार के सदस्यों के वोटर कार्ड देखे गए तो वह हिंदू नामों से बने हुए थे। रहमत का गठेली, उनकी पत्नी सायरा का विद्या देवी, बड़े बेटे आरिफ का रवि, उसकी पत्नी नफीसा का मंजू, मंझले मुन्ना का सुघड़, पत्नी शाजिया का राजो नाम से वोटर हैं। ये कार्ड लोकसभा चुनाव से पहले इसी साल मार्च में बने। इससे संशय खड़ा हो गया कि जब इन्होंने यह नाम अब अपनाया तो वोटर कार्ड इसी नाम से पहले ही कैसे बन गए?
शनिवार को इस बारे में आरिफ ने बताया कि उसका यह नाम जन्म के बाद रस्म अदायगी के लिए रखा गया। लेकिन शुरू से लोग उन्हें बुलाने वाले नाम रवि से ही जानते हैं। उन्होंने बताया कि मार्च से पहले भी उनके पास रवि नाम वाला वोटर कार्ड था। चूंकि उसमें उनका निवास मलपुरा का महुअर दर्ज था जहां वे पहले रहते थे। अब पूरा परिवार डावली में आ गया तो वोटर कार्ड में संशोधन कराया गया। बताया कि वे सब जाति से नट हैं। इसलिए उनका कोई स्थायी पता नहीं है। मार्च में कोई सरकारी कर्मचारी आया था और वह परिवार के 18 साल से बड़े सदस्यों का नाम लिखकर ले गया। बाद में वही वोटर कार्ड दे गया।
रवि का कहना है कि हम ग्राम पंचायत की जमीन पर रहते हैं। ऐसे में हमारा मकान नंबर कैसे हो सकता है। वोटर कार्ड पर लिखा मकान नंबर तो सरकारी कर्मचारियों ने ही लिखा है। रवि और उनके तीनों भाई हेयर ड्रेसर हैं। उनके ग्राहक भी उन्हें इन्हीं नामों से जानते हैं। डावली निवासी लगभग 55 वर्षीय शिव सिंह ने बताया कि वह वर्षों से इस परिवार के सदस्यों को गठेली, रवि आदि नामों से ही बुलाते हैं। रठिया के हाकिम सिंह ने भी बताया कि इस परिवार के सदस्य रहमत, आरिफ आदि के बजाय इन्हें रवि, कलुआ, मुन्ना आदि नामों से ही पुकारे जाते हैं। वे इस गांव में लगभग आठ से रह रहे हैं।
लव पंडित के खिलाफ मुकदमे की मांग उठी
आगरा (ब्यूरो)। डावली के रठिया मजरा पहुंचे मुस्लिम संघर्ष समिति के सदस्यों ने धर्म परिवर्तन करने वाले परिवार से बातचीत की। वहां से लौटी संघर्ष समिति ने सदस्यों ने प्रशासन से लव पंडित के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। समिति द्वारा जारी बयान में परिवार के सदस्यों के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने सामूहिक रूप से अपनी गरीबी व मुफ्त में मकान दिलाने की बात कही। समिति के अनुसार, रहमत अली का कहना है कि उसने कोई धर्म परिवर्तन नहीं किया है। इस विषय पर वह सोच-समझकर निर्णय लेंगे।
मजहबी नहीं, धर्मांतरण सियासी एजेंडा: याकूब
धर्मांतरण के नाम पर मुल्क की फजां खराब करने की कोशिश की जा रही है। मगर, इसकी जिम्मेदारी उन सरपरस्त की भी है जो मुल्क की सत्ता में बैठे हैं। सच तो यह है कि धर्मांतरण मजहबी कम, सियासी एजेंडा ज्यादा है। और यह सब 2017 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर किया जा रहा है।
इन दिनों आगरा में मचे धर्मांतरण के शोर पर ये बातें शनिवार को यहां आल इंडिया दीनी मदारिस बोर्ड के प्रेसीडेंट मौलाना याकूब बुलंदशहरी ने कहीं। डावली प्रकरण के सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर कोई आदमी मजहब छोड़कर जा रहा है, तो यह समाज के जिम्मेदार लोगों की लापरवाही का नतीजा है। उन्हें चाहिए कि वे गरीबों की मदद करें, उनकी हर जरूरत और परेशानी में शामिल हों। अगर वे यह किरदार को निभाना शुरू कर देंगे तो कोई इस्लाम छोड़ने की सोचेगा भी नहीं। हां, अगर कोई लालच, खौफ अथवा खुदगर्जी में जाता है, तो उसका कोई इलाज नहीं।
मौलाना ने यह भी कहा कि अगर कोई इस्लाम को सोच-समझकर कुबूल करता है, तो जरूर करे। लेकिन किसी मफाद (स्वार्थ) के लिए इस्लाम कुबूल करता है, तो वह गलत है और इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता। यही नहीं, इस्लाम में जोर-जबरदस्ती की भी कोई जगह नहीं। इससे भी मुस्लिमों को बचना चाहिए और कानून का भी पालन करना चाहिए।