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यूपी विधानसभा चुनाव: दल का नहीं मिला साथ तो अपने दम पर बने विधायक, पढ़िए निर्दलीय विधायकों का दिलचस्प इतिहास

Wed, 19 Jan 2022 11:09 AM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 19 Jan 2022 11:09 AM IST
सार

आगरा में अब तक आठ निर्दलीय विधायकों ने जीत हासिल की है। वर्ष 1996 के बाद से कोई निर्दलीय विधायक नहीं चुना गया है।

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Up Elections: Independent MLA Won Elections
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आगरा विधानसभा चुनाव में प्रमुख दलों से टिकट की मांग करने वालों की लंबी कतार रही है। लेकिन अब तक अपने दमखम पर आगरा में आठ नेता विधायक बने हैं। जिले में आखिरी बार 1996 में फतेहपुर सीकरी विधानसभा से चौधरी बाबूलाल निर्दलीय विधायक चुने गए थे। उनके बाद से 25 साल से जिले की किसी भी विधानसभा सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी विधायक नहीं बना है। 
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चार विधायक चुने निर्दलीय
आजादी के बाद 1957 में हुए दूसरे चुनाव में सबसे ज्यादा चार विधायक निर्दलीय चुने गए थे। तब खेरागढ़, एत्मादपुर, फिरोजाबाद और बाह विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के प्रत्याशियों को हराकर निर्दलीय उम्मीदवार जीते थे। इनमें सबसे ज्यादा वोटों से बाह से राजा रिपुदमन सिंह ने जीत दर्ज की। उस समय उन्हें 34,721 वोट हासिल हुए थे, जो कुल मतदान के 64.47 फीसदी थे।
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मिले थे इतने मत 
किसी भी निर्दलीय विधायक को उनके बाद इतने वोट प्रतिशत हासिल नहीं हो पाये। उसके बाद 1962 में आगरा सिटी से बालोजी अग्रवाल, 1967 और 1969 में फिरोजाबाद सीट से राजाराम चुने गए। 1969 के बाद लगातार 27 साल तक कांग्रेस, जनसंघ, जनता पार्टी समेत दलों के विधायकों को ही चुना गया लेकिन 1996 में फतेहपुर सीकरी से चौ. बाबूलाल ने निर्दलीय विधायक के तौर पर जीत दर्ज की। पनवारी कांड के बाद चौधरी बाबूलाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 51.43 फीसदी वोट पाकर कांग्रेस के बच्चू सिंह और भाजपा के बदन सिंह को हराया। 
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अब तक जीते निर्दलीय विधायक
साल        विधानसभा    विधायक    वोट मिले
1957    खेरागढ़    श्रीकृष्ण दत्त पालीवाल    19,411
1957    एत्मादपुर    राम सिंह        27,366    
1957    फिरोजाबाद    जगन नाथ लाहिरी    16,498
1957    बाह    राजा महेंद्र रिपुदमन सिंह        34,721
1962    आगरा सिटी-1        बालोजी अग्रवाल    20,032
1967    फिरोजाबाद        राजाराम    25,490
1969    फिरोजाबाद        राजाराम    31,541
1996    फतेहपुर सीकरी    चौधरी बाबूलाल    56,612

निर्दलीय लड़कर दूसरे नंबर पर रहे
साल    विधानसभा    प्रत्याशी    वोट
2002    दयालबाग    चौधरी उदयभान सिंह    23,650
2002    फतेहपुर सीकरी    राम निवास शर्मा    17,623
2007    फतेहाबाद    अशोक दीक्षित    32,333
2012    फतेहपुर सीकरी    राजकुमार चाहर    61,568
 

सीकरी से राजकुमार चाहर ने दी थी टक्कर
दस साल पहले फतेहपुर सीकरी विधानसभा में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर सबसे कांटे की लड़ाई हुई, जिसमें निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार चाहर को खूब वोट मिले लेकिन वह जीत नहीं सके । वह दूसरे नंबर पर रहे। वह बसपा प्रत्याशी ठाकुर सूरजपाल सिंह से 5623 वोटों से हार गए, लेकिन उनकी वजह से राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशी चौधरी बाबूलाल 34,330 वोट पाकर तीसरे नंबर पर पहुंच गए और भाजपा के जितेंद्र फौजदार महज 6927 वोट पाकर पांचवें स्थान पर खिसक गए। राजकुमार चाहर तब भाजपा के टिकट के दावेदार थे। टिकट न मिलने पर निर्दलीय मैदान में उतरे थे। 

अशोक दीक्षित ने बना दी त्रिकोणीय लड़ाई
2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा नेता अशोक दीक्षित को बसपा ने टिकट नहीं दिया तो वह निर्दलीय ही चुनाव में उतर गए। उन्हें तब 32,333 वोट मिले थे और तब भाजपा के राजेंद्र सिंह चुनाव जीत गए। उन्होंने छोटेलाल वर्मा को चुनाव हराया था और अशोक दीक्षित तीसरे नंबर पर रहे। इस चुनाव में फतेहाबाद में ब्राह्मण, ठाकुर और निषाद वोटरों ने जबरदस्त ताकत दिखाई। 

जो सेवा करेगा, जीतेगा
जनता जनार्दन के बीच रहकर जो सेवा करेगा, वही जीतेगा। जब ऐसे व्यक्ति को टिकट नहीं मिलता तो लोगों को यह अपने साथ अन्याय लगता है और यही मेरे साथ हुआ। मैंने लोगों की लड़ाई लड़ी, जिस पर लोगों ने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना। उस चुनाव ने मुझे बड़ी ताकत दी। - बाबूलाल, आखिरी निर्दलीय विधायक

मुझे मिले वोटों से जागा विश्वास
2012 में निर्दलीय विधायक के तौर पर चुनाव में जो वोट पाए, उसके बाद से मुझमें विश्वास जागा और लोगों के उसी प्यार का इनाम मुझे मिला, जब सांसद और फिर भाजपा किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। जनता के बीच जो हमेशा रहेगा और मेहनत, लगाव बनाकर रखेगा, वह जनता के दिल-दिमाग पर बना रहता है। - राजकुमार चाहर, नंबर 2 रहे आखिरी निर्दलीय प्रत्याशी
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