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यूपी का रण 2022: मैनपुरी रही खास...निर्दलीय प्रत्याशी कभी नहीं आया रास, पढ़िए ये खास खबर

Wed, 26 Jan 2022 01:55 PM IST
Abhishek Saxena ज्योत्यवेंद्र दुबे, संवाद न्यूज, मैनपुरी
ज्योत्यवेंद्र दुबे, संवाद न्यूज, मैनपुरी Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 26 Jan 2022 01:55 PM IST
सार

ब्रज के अन्य जिलों में विधानसभा चुनाव जीतते रहे हैं निर्दलीय प्रत्याशी लेकिन मैनपुरी में कोई निर्दलीय प्रत्याशी नहीं जीत सका है। 

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Up Election 2022: Independent candidate could not won in Mainpuri
नेताजी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

ब्रज के चार जिलों में मैनपुरी चुनाव की दृष्टि से हमेशा खास ही रही। यहीं से चुनकर मुलायम सिंह यादव रक्षा मंत्री बने तो सपा सरकार में मैनपुरी को वीवीआईपी का दर्जा भी हासिल रहा। मयन ऋषि की तपोभूमि कही जाने वाली मैनपुरी ने न जाने कितने प्रत्याशियों को सियासत में पहचान दिलाई। लेकिन मैनपुरी की एक खासियत रही कि कभी भी निर्दलीय प्रत्याशी मैनपुरी को रास नहीं आया। ब्रज के अन्य जिलों की जनता बीच-बीच में निर्दलीय प्रत्याशियों पर भरोसा जताती रही है। 

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मैनपुरी ने कभी निर्दलीय प्रत्याशी स्वीकार नहीं किया
मैनपुरी के अलावा बृज क्षेत्र में आगरा, फिरोजाबाद और मथुरा जिले भी शामिल हैं। विधानसभा चुनाव की दृष्टि से यहां विधानसभा सीटें भी अधिक हैं। मैनपुरी में जहां मैनपुरी सदर, भोगांव, किशनी और करहल चार विधानसभा सीटें हैं तो वहीं फिरोजाबाद और मथुरा में पांच-पांच और आगरा में नौ सीटें हैं। इन सीटों पर बीते विधानसभा चुनावों में दलों के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी दांव खेला। मैनपुरी को छोड़कर अन्य जिलों की सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत भी मिली। लेकिन मैनपुरी ने कभी निर्दलीय प्रत्याशी स्वीकार नहीं किया। 
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चुनावी बिसात बिछ गई
चारों विधानसभा सीटों पर शुरुआत से लेकर अब तक कभी भी निर्दलीय प्रत्याशी को जीत नहीं मिल सकी। आजादी के बाद से अब तक कभी ऐसा नहीं हुआ। ये अपने आप में मैनपुरी को खास बनाता है। इससे साफ है कि मैनपुरी की जनता ने दल का हाथ थामने वाले प्रत्याशियों को ही जीत दिलाई। इस बार भी चुनावी बिसात बिछ गई है, कई निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में आने की तैयारी में है, लेकिन इस बार निर्दलीय प्रत्याशियों का भविष्य क्या होगा ये बाद में ही तय होगा। 
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ब्रज में कब-कब जीते निर्दलीय प्रत्याशी
ब्रज के तीन जिलों में कई बार निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। फिरोजाबाद सदर सीट पर 1957, 1967 और 1969 में निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की। वहीं फिरोजाबाद की ही शिकोहाबाद सीट पर 1957, 1962, 1985, 1989, 1991 और 2007 में निर्दलीय प्रत्याशी को जीत मिली। इतना ही नहीं जसराना सीट पर भी 1952 और 2007 में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया। 


वहीं मथुरा सीट पर 1967 में एडी चजरन और गोवर्धन सीट से इसी वर्ष खेम सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की। आगरा भी निर्दलीय प्रत्याशियों के प्रभाव से अछूता नहीं रहा। आगरा की फतेहपुर सीकरी सीट से 1996 में निर्दलीय प्रत्याशी विधायक बने तो वहीं बाहर सीट से भी 1957 में निर्दलीय प्रत्याशी ने ही परचम लहराया। 

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