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जल्द 225 शिक्षकों की सेवाएं होंगी समाप्त!, फर्जी डिग्री धारकों पर कार्रवाई करेगा विश्वविद्यालय
Wed, 01 Jul 2020 11:40 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 01 Jul 2020 11:40 AM IST
सार
प्रार्थनापत्र देने वाले 814 शिक्षकों पर अभी तक निर्णय नहीं लिया जा सका
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विशेष जांच दल (एसआईटी) की ओर से जारी डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीएड सत्र 2004-05 के फर्जी व टेंपर्ड प्रमाणपत्रों की सूची से जिले में बेसिक शिक्षा विभाग ने 249 शिक्षकों को तलाशा है। इनमें से महज 24 शिक्षकों की सेवा समाप्त की गई है। बाकी शिक्षकों पर कार्रवाई के लिए शिक्षकों के विश्वविद्यालय के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
एसआईटी की ओर से फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों की तीन श्रेणी बनाई गई है। इसमें 3637 शिक्षक फर्जी, 1084 टेंपर्ड अंकपत्र और 45 डुप्लीकेट रोलनंबर वाले थे। विश्वविद्यालय की ओर से दिसंबर 2019 में फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों की सूची जारी कर उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। अपना पक्ष रखने वाले 814 अभ्यर्थियों को छोड़कर बाकी 2823 को फर्जी घोषित कर दिया गया।
आगरा में शिक्षा विभाग ने की बड़ी कार्रवाई, 24 फर्जी शिक्षकों पर मुकदमा, पूरी सूची यहां देखें
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हाईकोर्ट ने भी इन्हें फर्जी मान लिया। इसके बाद सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद के आदेश पर फर्जी घोषित किए गए 2823 अभ्यर्थियों की सूची से जिले में चिह्नित परिषदीय शिक्षकों की सूची का मिलान किया गया। 24 शिक्षकों के नाम पाए जाने पर उन्हें 15 मई 2020 को बर्खास्त कर दिया गया।
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एसआईटी की ओर से फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों की तीन श्रेणी बनाई गई है। इसमें 3637 शिक्षक फर्जी, 1084 टेंपर्ड अंकपत्र और 45 डुप्लीकेट रोलनंबर वाले थे। विश्वविद्यालय की ओर से दिसंबर 2019 में फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों की सूची जारी कर उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। अपना पक्ष रखने वाले 814 अभ्यर्थियों को छोड़कर बाकी 2823 को फर्जी घोषित कर दिया गया।
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हाईकोर्ट ने भी इन्हें फर्जी मान लिया। इसके बाद सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद के आदेश पर फर्जी घोषित किए गए 2823 अभ्यर्थियों की सूची से जिले में चिह्नित परिषदीय शिक्षकों की सूची का मिलान किया गया। 24 शिक्षकों के नाम पाए जाने पर उन्हें 15 मई 2020 को बर्खास्त कर दिया गया।
एसआईटी की सूची से चिह्नित 225 शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई होनी है। इसमें 54 शिक्षक ऐसे हैं, जिनका नाम 1084 टेंपर्ड अंकपत्रों की सूची से तलाशा गया है। इनके बारे में शासन स्तर से निर्देश दिया गया है कि बर्खास्तगी की कार्रवाई विश्वविद्यालय की ओर से कोई निर्णय लिए जाने के बाद ही की जाए।
बाकी 171 शिक्षकों के नाम विश्वविद्यालय में पक्ष रखने वाले 814 अभ्यर्थियों की सूची में होने की उम्मीद है। बीएसए राजीव कुमार यादव का कहना है कि बर्खास्तगी की विश्वविद्यालय की ओर से निर्णय लिए जाने का इंतजार किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय की जांच समिति में बार-बार बदलाव
विश्वविद्यालय प्रशासन को अपना पक्ष रखने वाले अभ्यर्थियों पर 10 जुलाई तक निर्णय लेना है। इसके लिए समिति बनाई गई है। सदस्य विभिन्न कारणों से जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पा रहे। इससे समिति में बार-बार बदलाव किया जा रहा है।
पहले डीन कॉमर्स और डीन एजूकेशन को बदला गया था। इनकी जगह पर डीन मैनेजमेंट और डीन लॉ को रखा गया था। डीन लॉ ने भी पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से खुद को समिति के कार्य से मुक्त करने का अनुरोध किया। इस पर कुलपति ने डीन लॉ की जगह डीन लाइफ साइंस को रखा गया है।
बाकी 171 शिक्षकों के नाम विश्वविद्यालय में पक्ष रखने वाले 814 अभ्यर्थियों की सूची में होने की उम्मीद है। बीएसए राजीव कुमार यादव का कहना है कि बर्खास्तगी की विश्वविद्यालय की ओर से निर्णय लिए जाने का इंतजार किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय की जांच समिति में बार-बार बदलाव
विश्वविद्यालय प्रशासन को अपना पक्ष रखने वाले अभ्यर्थियों पर 10 जुलाई तक निर्णय लेना है। इसके लिए समिति बनाई गई है। सदस्य विभिन्न कारणों से जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पा रहे। इससे समिति में बार-बार बदलाव किया जा रहा है।
पहले डीन कॉमर्स और डीन एजूकेशन को बदला गया था। इनकी जगह पर डीन मैनेजमेंट और डीन लॉ को रखा गया था। डीन लॉ ने भी पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से खुद को समिति के कार्य से मुक्त करने का अनुरोध किया। इस पर कुलपति ने डीन लॉ की जगह डीन लाइफ साइंस को रखा गया है।