टूंडला उपचुनाव में जीतने के लिए भाजपा ने लगा दी थी पूरी ताकत, सीट तो बचा ली, लेकिन...
- मुख्यमंत्री, दो उप मुख्यमंत्री, कई मंत्री और आगरा-फिरोजाबाद का भाजपा संगठन लगा रहा
- भाजपा ने चुनाव में लगा दी थी पूरी ताकत, बिना स्टार प्रचारकों के सपा ने किया कड़ा मुकाबला
- बसपा की सोशल इंजीनियरिंग हुई फेल, सतीश मिश्रा ने भी लोगों को पार्टी पक्ष में करने की कोशिश की
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टूंडला विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी सीट बचाने में सफल हो गई लेकिन जीत का अंतर कम हो गया। चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने कड़ी मेहनत की थी। मुख्यमंत्री की सभा हुई। दोनों उपमुख्यमंत्री भी दो-दो बार आए। संगठन के पदाधिकारी कैंप किए रहे। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग का कार्ड चला लेकिन फेल हो गया। बसपा यहां तीसरे स्थान पर पहुंच गई। समाजवादी पार्टी की पूरे चुनाव में न कोई बड़ी जनसभा हुई और न ही कोई स्टार प्रचारक चुनाव में आया। सपा कड़ा मुकाबला करते हुए दूसरे स्थान पर रही।
टूंडला विधानसभा उपचुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की तस्वीर शुरू से बनी हुई थी। भाजपा के लिए इस सीट को बचाए रखना प्रतिष्ठा का सवाल बन गया था। चुनावी की अधिसूचना जारी होने से पहले भाजपा ने चुनावी प्लेटफार्म तैयार करना शुरू कर दिया। अधिसूचना से पहले उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य यहां आए। चुनाव से पहले धड़ाधड़ घोषणाएं की गईं, शिलान्यास और लोकार्पण किए गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा हुई। इसके बाद उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सभा हुई। प्रभारी मंत्री मोती सिंह टूंडला क्षेत्र में कैंप किए गए। संगठन से जुडे़ बृजप्रांत के पदाधिकारी कैंप किए गए। जिले के सभी भाजपा जनप्रतिनिधि टूंडला में जुटे रहे। कड़ी मेहनत का लाभ भाजपा को मिला और पार्टी सीट बचा ले गई। जीत का अंतर पिछले चुनाव से कम रहा। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के एसपी सिंह बघेल एक लाख 18 हजार 584 वोट हासिल करके करीब 56 हजार वोटों से जीते थे। उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी 72950 वोट पाकर 17683 वोटों से जीते हैं।
बसपा का नहीं चला ब्राह्मण कार्ड
उपचुनाव में बसपा को मात्र 41010 वोट मिले। टूंडला बसपा का गढ़ माना जाता है। 2007 और 2012 के चुनाव में लगातार दो बार यहां से बसपा जीती थी। राकेश बाबू यहां से विधायक बने थे। 2017 में राकेश बाबू चुनाव हार गए थे। पिछले दिनों बसपा ने राकेश बाबू को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया था। उप चुनाव में राकेश बाबू बसपा के साथ नहीं थे।