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राहत की खबरः ताजनगरी में कोरोना संक्रमण के सिर्फ मरीज ही नहीं, मात देने वाले भी सबसे अधिक
Tue, 12 May 2020 12:10 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 12 May 2020 12:10 AM IST
सार
10 मरीज रोजाना हो रहे ठीक , इनमें 23 दिन की बच्ची से लेकर 65 साल के बुजुर्ग तक
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कोरोना वायरस
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
कोरोना संक्रमण के मामले में प्रदेश में पहले स्थान पर चल रही ताजनगरी में ठीक होकर घर जा रहे मरीजों की संख्या भी सबसे ज्यादा है। अब तक 326 मरीज ठीक हो चुके हैं। इनमें सिर्फ मां के दूध से कोरोना को मात देने वाला 23 दिन का बच्चा है। 60 से 65 साल तक के बुजुर्ग भी ठीक हो चुके हैं।
रोजाना दस मरीज ठीक हो रहे हैं। कुल मरीजों के 43 फीसदी से ज्यादा ठीक हो चुके। हालांकि रिकवरी रेट लखनऊ का (68.5 फीसदी) सबसे ज्यादा है पर वहां ताजनगरी के मुकाबले मरीज एक तिहाई हैं।
ताजनगरी में 10 मई की रात तक 756 मरीज थे। कुल 9310 सैंपल लिए जा चुके थे। इसमें सुकून भरी खबर यही थी कि ठीक होने वालों की संख्या बढ़कर 326 हो गई। 11 अप्रैल को 92 मरीज थे। तब तक 11 ठीक हुए थे। यहां पहला मरीज तीन मार्च को मिला था। 11 अप्रैल से 11 मई तक के 30 दिनों में 315 मरीज ठीक हुए हैं। रिकवरी रेट 43.5 है। इसमें लखनऊ सबसे आगे है। वहां यह 68.50 फीसदी है। वहां 247 मरीजों में 165 ठीक हो चुके हैं। वहां जितने कुल मरीज हैं, आगरा में उससे ज्यादा ठीक हो चुके हैं।
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रोजाना दस मरीज ठीक हो रहे हैं। कुल मरीजों के 43 फीसदी से ज्यादा ठीक हो चुके। हालांकि रिकवरी रेट लखनऊ का (68.5 फीसदी) सबसे ज्यादा है पर वहां ताजनगरी के मुकाबले मरीज एक तिहाई हैं।
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ताजनगरी में 10 मई की रात तक 756 मरीज थे। कुल 9310 सैंपल लिए जा चुके थे। इसमें सुकून भरी खबर यही थी कि ठीक होने वालों की संख्या बढ़कर 326 हो गई। 11 अप्रैल को 92 मरीज थे। तब तक 11 ठीक हुए थे। यहां पहला मरीज तीन मार्च को मिला था। 11 अप्रैल से 11 मई तक के 30 दिनों में 315 मरीज ठीक हुए हैं। रिकवरी रेट 43.5 है। इसमें लखनऊ सबसे आगे है। वहां यह 68.50 फीसदी है। वहां 247 मरीजों में 165 ठीक हो चुके हैं। वहां जितने कुल मरीज हैं, आगरा में उससे ज्यादा ठीक हो चुके हैं।
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दुखद: मृत्यु दर भी सबसे ज्यादा
कोरोना मरीजों की मृत्यु दर के मामले में भी प्रदेश में आगरा सबसे ऊपर है। यहां अब तक 25 मरीजों की जान जा चुकी है। शनिवार शाम तक के आंकड़ों में दूसरे स्थान पर मेरठ था, जहां 13 की जान गई है।
उपचार जल्दी मिलने से ठीक हुए : डीएम
डीएम प्रभु एन सिंह ने बताया कि आगरा में सबसे ज्यादा सैंपल लिए गए हैं। हर संदिग्ध की जांच कराई जा रही है। इससे लक्षण आने से पहले ही मरीज का पता चल जाता है। उसका उपचार जल्दी शुरू हो जाता है।
खानपान का विशेष ध्यान
कोरोना वायरस के मरीज तेजी से ठीक हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह मरीजों को हेल्दी डाइट है। हर मरीज में लक्षण नहीं हैं तो उनको दवा नहीं दी जाती। नियमित हर्बल चाय, फल, दूध समेत पौष्टिक भोजन दिया जाता है। 14 दिन से अधिक तक इसी डाइट चार्ट का पालन किया जाता है, जिससे मरीज में रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से विकसित होती है। - डॉ. प्रशांत प्रकाश, प्रभारी आइसोलेशन वार्ड, एसएन मेडिकल कॉलेज
कोरोना मरीजों की मृत्यु दर के मामले में भी प्रदेश में आगरा सबसे ऊपर है। यहां अब तक 25 मरीजों की जान जा चुकी है। शनिवार शाम तक के आंकड़ों में दूसरे स्थान पर मेरठ था, जहां 13 की जान गई है।
उपचार जल्दी मिलने से ठीक हुए : डीएम
डीएम प्रभु एन सिंह ने बताया कि आगरा में सबसे ज्यादा सैंपल लिए गए हैं। हर संदिग्ध की जांच कराई जा रही है। इससे लक्षण आने से पहले ही मरीज का पता चल जाता है। उसका उपचार जल्दी शुरू हो जाता है।
खानपान का विशेष ध्यान
कोरोना वायरस के मरीज तेजी से ठीक हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह मरीजों को हेल्दी डाइट है। हर मरीज में लक्षण नहीं हैं तो उनको दवा नहीं दी जाती। नियमित हर्बल चाय, फल, दूध समेत पौष्टिक भोजन दिया जाता है। 14 दिन से अधिक तक इसी डाइट चार्ट का पालन किया जाता है, जिससे मरीज में रोग प्रतिरोधक क्षमता तेजी से विकसित होती है। - डॉ. प्रशांत प्रकाश, प्रभारी आइसोलेशन वार्ड, एसएन मेडिकल कॉलेज
70 फीसदी मरीजों की हालत बेहतर
कोरोना वायरस के 70 फीसदी से अधिक मरीजों की हालत बेहतर है। यह वायरस कैंसर, टीबी, मधुमेह, सांस रोग समेत अन्य गंभीर मर्ज से जूझ रहे लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है। मरीजों की देखरेख, उनकी दवा से लेकर खानपान तक का सख्ती से पालन किया जाता है। गंभीर मरीजों की नियमित जांच, उनके इलाज की मानीटरिंग भी जल्द ठीक होने की एक वजह है। - डॉ. आशीष गौतम, सह प्रभारी, कोविड अस्पताल, एसएन मेडिकल कॉलेज
कोरोना वायरस के 70 फीसदी से अधिक मरीजों की हालत बेहतर है। यह वायरस कैंसर, टीबी, मधुमेह, सांस रोग समेत अन्य गंभीर मर्ज से जूझ रहे लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है। मरीजों की देखरेख, उनकी दवा से लेकर खानपान तक का सख्ती से पालन किया जाता है। गंभीर मरीजों की नियमित जांच, उनके इलाज की मानीटरिंग भी जल्द ठीक होने की एक वजह है। - डॉ. आशीष गौतम, सह प्रभारी, कोविड अस्पताल, एसएन मेडिकल कॉलेज