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विश्वविद्यालय में हजारों मार्कशीट-डिग्री कचरे में तब्दील
ब्यूरो, अमर उजाला, आगरा
Updated Sun, 31 Jan 2016 02:42 AM IST
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मार्कशीट और डिग्री। यानी, युवाओं का करियर तय करने वाले दस्तावेज। इनके बिना छात्रों के सपने और भविष्य दोनों ही मिट्टी हैं। उनके लिए अमूल्य ये दस्तावेज उनके हाथों में होने के बजाए डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के शौचालय में पड़े हैं। ये हाल तब है, जब इन्हीं को पाने लिए सैकड़ों छात्र रोजाना विश्वविद्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
विश्वविद्यालय में इन दिनों परीक्षा विभाग, डिग्री सेक्शन समेत भवन मरम्मत का कार्य चल रहा है। इसके चलते इन मार्कशीट-डिग्री को सुरक्षित रखने के बजाए कबाड़ में फेंक दिया गया है। परीक्षा विभाग से सटे शौचालय में पड़े हजारों मार्कशीट, परीक्षा फार्म, डिग्री कचरे में तब्दील हो चुके हैं। इनमें बीए, बीएससी, बीकाम और बीएड की मार्कशीट हैं, जोे 2007-08 से लेकर 2013-14 सत्र की हैं। इन पर अधिकारियों के हस्ताक्षर और विश्वविद्यालय का होलोग्राम भी है। कचरे में डिग्री तो कम हैं लेकिन इनके लिए आवेदन किए गए फार्मों की तादाद ज्यादा है। इसमें शुल्क के तौर पर 150 रुपये की बैंक रसीद भी लगी हुई है। अधिकांश आवेदन बीते एक-दो महीने के हैं। विश्वविद्यालय इन्हें निरस्त मार्कशीट और डिग्री बता रहा है। लेकिन निरस्तीकरण और निस्तारण की प्रक्रिया के सवाल पर मामले की जांच कराने की बात कही गई।
परीक्षा विभाग में छत मरम्मत का काम चल रहा है। ऐसे में ‘निरस्त’ मार्कशीट और डिग्री को सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश दिए थे। कबाड़ में फेंके गए हैं तो इसकी जांच और दोषी के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
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-प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल, कुलपति, डा. बीआरए विश्वविद्यालय
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विश्वविद्यालय में इन दिनों परीक्षा विभाग, डिग्री सेक्शन समेत भवन मरम्मत का कार्य चल रहा है। इसके चलते इन मार्कशीट-डिग्री को सुरक्षित रखने के बजाए कबाड़ में फेंक दिया गया है। परीक्षा विभाग से सटे शौचालय में पड़े हजारों मार्कशीट, परीक्षा फार्म, डिग्री कचरे में तब्दील हो चुके हैं। इनमें बीए, बीएससी, बीकाम और बीएड की मार्कशीट हैं, जोे 2007-08 से लेकर 2013-14 सत्र की हैं। इन पर अधिकारियों के हस्ताक्षर और विश्वविद्यालय का होलोग्राम भी है। कचरे में डिग्री तो कम हैं लेकिन इनके लिए आवेदन किए गए फार्मों की तादाद ज्यादा है। इसमें शुल्क के तौर पर 150 रुपये की बैंक रसीद भी लगी हुई है। अधिकांश आवेदन बीते एक-दो महीने के हैं। विश्वविद्यालय इन्हें निरस्त मार्कशीट और डिग्री बता रहा है। लेकिन निरस्तीकरण और निस्तारण की प्रक्रिया के सवाल पर मामले की जांच कराने की बात कही गई।
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परीक्षा विभाग में छत मरम्मत का काम चल रहा है। ऐसे में ‘निरस्त’ मार्कशीट और डिग्री को सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश दिए थे। कबाड़ में फेंके गए हैं तो इसकी जांच और दोषी के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
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-प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल, कुलपति, डा. बीआरए विश्वविद्यालय