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नोट बंदी के दौर में उधारी में हुई रैली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Nov 2016 11:44 PM IST
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पीएम का आधा कार्यक्रम सरकारी, आधे का करना होगा भाजपा को भुगतान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नोट बंदी के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यक्रम का उधारी हुआ है। भाजपा नेताओं के लिए राहत की बात यह है कि उन्हें केवल परिवर्तन रैली पर हुए खर्च का भुगतान करना है। ग्रामीण आवास योजना और रेलवे की योजनाओं के लोकार्पण का खर्च सरकारी खाते में जाएगा, लेकिन नोट बंदी के दौर में भाजपा नेताओं ने पूरी रैली उधार खाते में की है।
कोठी मीना बाजार में प्रधानमंत्री ने ग्रामीण आवास योजना और रेलवे की योजनाओं का शुभारंभ किया था। इसके लिए जर्मन हैंगर लगाया गया था। उसका खर्च सरकारी खाते होगा। परिवर्तन रैली का खर्च के मामले में भी भाजपा को बड़ी राहत मिल गई है। एक तरह से यह रैली मुफ्त में हो गई है। रैली के गणित पर नजर डालें तो भीड़ लाने का खर्च, उन्हें भोजन की व्यवस्था का खर्च टिकट के दावेदारों ने उठाया है। प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने रैली से कुछ दिन पहले सभी 20 विधानसभाओं में टिकट मांग रहे नेताओं केे साथ बैठक की थी। इस बैठक में उन नेताओं ने भीड़ लाने की जिम्मेदारी अपने कंधों में ली थी।
व्यवस्था प्रमुख नवीन जैन का कहना है कि इस तरह से भीड़ का खर्च पार्टी को नहीं करना पड़ा है। मैदान पर मंच बनाने और बांस बल्ली का खर्च पार्टी खाते जाएगा, लेकिन वहां भी राहत बात यह है कि यह कार्य पार्टी के नेता प्रमोद उपाध्याय ने किया है उनसे भी काफी रियायत मिल जाएगी। कुछ और खर्च हुए हैं उनका अभी तक कार्यकर्ताओं बिल दिया है, नोट बंदी के कारण अधिकांश कार्य उधारी में हो रहे हैं। बिल आने के बाद पता लगा कि कितना खर्चा हुआ, लेकिन यह तय है कि अन्य पार्टियां जहां करोड़ों फूंक देती हैं उसकी तुलना में यह रैली मुफ्त में ही पड़ी है।
कोठी मीना बाजार में प्रधानमंत्री ने ग्रामीण आवास योजना और रेलवे की योजनाओं का शुभारंभ किया था। इसके लिए जर्मन हैंगर लगाया गया था। उसका खर्च सरकारी खाते होगा। परिवर्तन रैली का खर्च के मामले में भी भाजपा को बड़ी राहत मिल गई है। एक तरह से यह रैली मुफ्त में हो गई है। रैली के गणित पर नजर डालें तो भीड़ लाने का खर्च, उन्हें भोजन की व्यवस्था का खर्च टिकट के दावेदारों ने उठाया है। प्रदेश प्रभारी ओम माथुर ने रैली से कुछ दिन पहले सभी 20 विधानसभाओं में टिकट मांग रहे नेताओं केे साथ बैठक की थी। इस बैठक में उन नेताओं ने भीड़ लाने की जिम्मेदारी अपने कंधों में ली थी।
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व्यवस्था प्रमुख नवीन जैन का कहना है कि इस तरह से भीड़ का खर्च पार्टी को नहीं करना पड़ा है। मैदान पर मंच बनाने और बांस बल्ली का खर्च पार्टी खाते जाएगा, लेकिन वहां भी राहत बात यह है कि यह कार्य पार्टी के नेता प्रमोद उपाध्याय ने किया है उनसे भी काफी रियायत मिल जाएगी। कुछ और खर्च हुए हैं उनका अभी तक कार्यकर्ताओं बिल दिया है, नोट बंदी के कारण अधिकांश कार्य उधारी में हो रहे हैं। बिल आने के बाद पता लगा कि कितना खर्चा हुआ, लेकिन यह तय है कि अन्य पार्टियां जहां करोड़ों फूंक देती हैं उसकी तुलना में यह रैली मुफ्त में ही पड़ी है।
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