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कटान का कहर : गंगा में समा रहे खेत, किसान बेहाल
Tue, 23 Sep 2025 12:22 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Tue, 23 Sep 2025 12:22 AM IST
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फोटो17सुन्नगढ़ी क्षेत्र में गंगा के किनारे हो रहे कटान को देखते ग्रामीण। संवाद
कासगंज। उतर रहे गंगा के जलस्तर के साथ ही गंगा की धारा ने कटान तेज कर दिया है। अब तक कई किसानों की जमीन गंगा कटान की चपेट में आ चुकी हैं।
एक भवन भी गंगा में समा चुका है जबकि दूसरा भवन भी कटान के मुहाने पर है। ऐसी स्थिति में तीन गांव के किसान बेहद चिंतित हैं। किसानों ने पटियाली पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति की देते हुए अन्य स्थान पर भूमि आंवटित करने की मांग भी उठाई है।
किसानों का कहना है कि कटान नहीं रुका तो सैकड़ों बीघा कृषि भूमि बर्बाद हो जाएगी। किलौनी पर हो रहे कटान में रोहताश के भवन का एक हिस्सा कट गया है जबकि एक अन्य भवन कटान के मुहाने पर है। गंगा की धारा कुछ मीटर दूरी पर ही है ऐसे में यह भवन भी कटान की चपेट में आ सकता है। सुन्नगढ़ी के किसान राजवीर ने बताया कि पहले तो खेतों में बाढ़ से बर्बादी हुई और बची कसर कटान ने पूरी कर दी है। बाढ़ में काफी क्षति हुई। कई मकान गिर गए। अब लगातार कटान होने से खेती की भूमि लगातार गंगा में समा रही है। यह कटान पिछले कई दिनों से चल रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए अभी तक कोई प्रयास नहीं हुए हैं। वहीं ग्रामीण आनंद, अब्दुल मन्नान, सूरज पाल, नरेंद्र कुमार, रोहताश, पीतंबर, जगदीश सहित अन्य ग्रामीणों ने 20 सितंबर को तहसील दिवस में कटान की स्थिति की अधिकारियों को जानकारी दी। अधिकारियों ने पीड़ित किसानाें को भरोसा दिया। किसानों ने खाली पड़ी भूमि के आवंटन की मांग की।
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एक भवन भी गंगा में समा चुका है जबकि दूसरा भवन भी कटान के मुहाने पर है। ऐसी स्थिति में तीन गांव के किसान बेहद चिंतित हैं। किसानों ने पटियाली पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति की देते हुए अन्य स्थान पर भूमि आंवटित करने की मांग भी उठाई है।
किसानों का कहना है कि कटान नहीं रुका तो सैकड़ों बीघा कृषि भूमि बर्बाद हो जाएगी। किलौनी पर हो रहे कटान में रोहताश के भवन का एक हिस्सा कट गया है जबकि एक अन्य भवन कटान के मुहाने पर है। गंगा की धारा कुछ मीटर दूरी पर ही है ऐसे में यह भवन भी कटान की चपेट में आ सकता है। सुन्नगढ़ी के किसान राजवीर ने बताया कि पहले तो खेतों में बाढ़ से बर्बादी हुई और बची कसर कटान ने पूरी कर दी है। बाढ़ में काफी क्षति हुई। कई मकान गिर गए। अब लगातार कटान होने से खेती की भूमि लगातार गंगा में समा रही है। यह कटान पिछले कई दिनों से चल रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए अभी तक कोई प्रयास नहीं हुए हैं। वहीं ग्रामीण आनंद, अब्दुल मन्नान, सूरज पाल, नरेंद्र कुमार, रोहताश, पीतंबर, जगदीश सहित अन्य ग्रामीणों ने 20 सितंबर को तहसील दिवस में कटान की स्थिति की अधिकारियों को जानकारी दी। अधिकारियों ने पीड़ित किसानाें को भरोसा दिया। किसानों ने खाली पड़ी भूमि के आवंटन की मांग की।
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