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Agra News: हल्दी की रस्म छोड़ सिलिंडर के लिए साहब की चौखट पर पहुंचा दूल्हा
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शादी के लिए सिलिंडर लेने रिश्तेदारों के संग जिला पूर्ति कार्यालय पहुंचा दूल्हा गौरव स्त्रोत इंट
आगरा। सहालग के भारी दबाव के बीच रसोई गैस की किल्लत ने खुशियों पर ग्रहण लगा दिया है। अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त पर घर-घर शहनाइयां बजेंगी, लेकिन दावत तैयार करने के लिए सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। आलम यह है कि जिस दूल्हे के चेहरे पर हल्दी की चमक होनी चाहिए थी, उसे शनिवार को सिलिंडर के लिए जिला पूर्ति कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ी।
केदार नगर निवासी गौरव की 20 अप्रैल को शादी है। घर में मंगल गीत गाए जा रहे हैं और शनिवार को हल्दी की रस्म होनी थी। लेकिन दावत के लिए सिलिंडर नहीं मिलने से खुशियों के बीच तनाव पैदा हो गया। मजबूरन, गौरव खुद रिश्तेदारों के साथ पुलिस लाइन स्थित पूर्ति कार्यालय पहुंचे। वहां अधिकारियों को शादी का कार्ड दिखाया, मेहमानों की सूची दी और दावत का पूरा मेन्यू गिनाया, तब जाकर रविवार तक सिलिंडर मिलने का आश्वासन मिला है।
शहर में अक्षय तृतीया पर 500 से अधिक शादियां हैं, जबकि जिले भर में 1700 से अधिक परिवारों ने सिलिंडर के लिए आवेदन कर रखा है। प्रशासनिक सुस्ती और कम आपूर्ति का नतीजा यह है कि मांग के मुकाबले केवल 25 फीसदी गैस ही मिल पा रही है। फतेहाबाद के सुनील ने दर्द बयां करते हुए कहा चार दिन पहले आवेदन किया था, अब तक खाली हाथ हूं। सोमवार को बहन की बरात आनी है, घर में हलवाई बैठा है लेकिन चूल्हा नहीं जल रहा। अब रविवार को तीन सिलिंडर मिलने का भरोसा दिया गया है।
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कैटरर्स और हलवाइयों के हाथ-पांव फूले
व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति में की गई कटौती ने कैटरर्स और हलवाइयों की मुश्किल बढ़ा दी है। छोटे सिलिंडर और ब्लैक में मिल रही गैस के भरोसे किसी तरह काम चलाया जा रहा है। पूर्ति विभाग के दफ्तर में सुबह से शाम तक शादी वाले परिवारों के लोग पहुंच रहे हैं। जहां सिर्फ आश्वासन की रिफिलिंग हो रही है। वहीं, इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी आनंद कुमार सिंह का दावा है कि आवेदकों को गैस उपलब्ध कराई जा रही है।
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केदार नगर निवासी गौरव की 20 अप्रैल को शादी है। घर में मंगल गीत गाए जा रहे हैं और शनिवार को हल्दी की रस्म होनी थी। लेकिन दावत के लिए सिलिंडर नहीं मिलने से खुशियों के बीच तनाव पैदा हो गया। मजबूरन, गौरव खुद रिश्तेदारों के साथ पुलिस लाइन स्थित पूर्ति कार्यालय पहुंचे। वहां अधिकारियों को शादी का कार्ड दिखाया, मेहमानों की सूची दी और दावत का पूरा मेन्यू गिनाया, तब जाकर रविवार तक सिलिंडर मिलने का आश्वासन मिला है।
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शहर में अक्षय तृतीया पर 500 से अधिक शादियां हैं, जबकि जिले भर में 1700 से अधिक परिवारों ने सिलिंडर के लिए आवेदन कर रखा है। प्रशासनिक सुस्ती और कम आपूर्ति का नतीजा यह है कि मांग के मुकाबले केवल 25 फीसदी गैस ही मिल पा रही है। फतेहाबाद के सुनील ने दर्द बयां करते हुए कहा चार दिन पहले आवेदन किया था, अब तक खाली हाथ हूं। सोमवार को बहन की बरात आनी है, घर में हलवाई बैठा है लेकिन चूल्हा नहीं जल रहा। अब रविवार को तीन सिलिंडर मिलने का भरोसा दिया गया है।
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कैटरर्स और हलवाइयों के हाथ-पांव फूले
व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति में की गई कटौती ने कैटरर्स और हलवाइयों की मुश्किल बढ़ा दी है। छोटे सिलिंडर और ब्लैक में मिल रही गैस के भरोसे किसी तरह काम चलाया जा रहा है। पूर्ति विभाग के दफ्तर में सुबह से शाम तक शादी वाले परिवारों के लोग पहुंच रहे हैं। जहां सिर्फ आश्वासन की रिफिलिंग हो रही है। वहीं, इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी आनंद कुमार सिंह का दावा है कि आवेदकों को गैस उपलब्ध कराई जा रही है।