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Agra News: बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है ग्रामीण न्यायालय की चिन्हित भूमि

Thu, 25 Sep 2025 03:57 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Thu, 25 Sep 2025 03:57 AM IST
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The flood-affected area is the identified land of the rural court
फोटो 32 पटियाली में ग्रामीण न्यायालय के लेकर बैठक करते  अ​धिवक्ता। स्रोत: संवाद
पटियाली। मुंसिफ और ग्रामीण न्यायालय के लिए तहसील प्रशासन ने गांव लभेड़ में 11 एकड़ जमीन चिन्हित की है। इसे सिविल बार एसोसिएशन ने जिला जज को ज्ञापन सौंपकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बताया है। गांव लभेड़ में न्यायालय के लिए चिन्हित की गई जमीन पर आपत्ति जताई हैं। पटियाली तहसील के अधिवक्ता लंबे समय से मुंसिफ और ग्रामीण कोर्ट की स्थापना की मांग कर रहे थे। वादकारियों का भी कहना था कि तहसील में कोर्ट बनने से उनको सिविल जज जूनियर डिविजन के मुकदमों के लिए जनपद नहीं जाना पड़ेगा। वर्ष 2015 में अधिवक्ताओं की मांग पर ग्रामीण न्यायालय को अस्थायी रूप से स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बना दिया गया। अब तहसील प्रशासन ने मुंसिफ कोर्ट और ग्रामीण न्यायालय के लिए गांव लभेड़ मोजे स्थित गाटा संख्या 428 में 11 एकड़ जमीन को चिन्हित किया गया। इसका प्रस्ताव बनाकर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है। सिविल बार एसोसिएशन ने इसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र बताया है। सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट अरविंद चतुर्वेदी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने जिला जज रामेश्वर सिंह से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि गांव लभेड़ पटियाली तहसील से करीब 15 किलोमीटर दूर कटरी क्षेत्र में स्थित है। वहां तक पहुंचने के लिए कोई भी उचित यातायात व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह क्षेत्र न तो वादकारियों, न ही न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए सुरक्षित है। बुधवार को वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व बार अध्यक्ष शिवेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं की बैठक तहसील परिसर में आयोजित की गई। इसमें चिन्हित भूमि पर मंथन किया गया। अधिवक्ताओं ने बताया कि गांव लभेड़ का यह क्षेत्र लगातार बाढ़ प्रभावित रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता शिवेंद्र मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2010, 2012, 2017, 2018, 2022, 2023 और 2024 सहित 2025 तक इस क्षेत्र में बाढ़ की घटनाएं लगातार होती रही हैं। इसके प्रमाण जिला जज को सौंपे गए हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि ऐसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में न्यायालय का निर्माण जनहित और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिए अव्यवहारिक होगा। बैठक में एडवोकेट वरुण दलेला, अंशुमान सक्सेना, अभय प्रताप, आदिल अली, सचिन शर्मा, नाजिम अंसारी, जय प्रकाश आदि मौजूद रहे। अधिवक्ताओं ने प्रशासन से अपील की है कि न्यायालय स्थापना के लिए कोई सुलभ, सुरक्षित और बाढ़ मुक्त क्षेत्र का चयन किया जाए। इससे पटियाली क्षेत्र के वादकारियों को स्थायी लाभ मिल सके।
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