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Agra News: सीकरी में ‘रंग-ए-सूफियाना’ की धूम, सलीम चिश्ती के दर पर शाही कव्वालों ने बांधा समां, रूहानी गीतों पर झूमे जायरीन
Thu, 26 Mar 2026 02:58 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Thu, 26 Mar 2026 02:58 AM IST
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रंग ए सूफियाना कार्यक्रम सूफी कलाम पेश करते कब्बाल एवं सदारत करते सज्जादा नसीन फोटो संवाद
- फोटो : samvad
फतेहपुर सीकरी। विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती के 456वें उर्स के पावन अवसर पर हजरत सलीम चिश्ती फाउंडेशन के तत्वाधान में दो दिवसीय रंग-ए-सूफियाना कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। बुधवार को दरगाह परिसर में सज्जादानशीन अरशद फरीदी के सानिध्य में आयोजित महफिल-ए-समां में सूफियाना कव्वालियों ने श्रोताओं को रूहानी सफर पर जाने के लिए मजबूर कर दिया।
शाही कव्वालों ने जब अपनी सुरीली आवाज में साजों की धुन पर सूफी कलाम पेश किए, तो पूरा परिसर भक्ति और प्रेम के रंग में सराबोर हो गया। कव्वाल अल्लाह नूर मिढाकुर ने ‘अब किसके दर पर जाएं हम सलीम चिश्ती’ और ‘आओ सखी अब मंगल गाएं, अपने मुर्शिद का जन्मदिन मनाएं’ जैसे कलामों से समां बांध दिया। वहीं, शाही कव्वाल सलीम हसन ने जब अमीर खुसरो का कालजयी कलाम ‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके’ और ‘अपनी छवि बनाई के जो मैं पी के पास गई’ सुनाया, तो श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर वाह-वाह कर उठे। विरह और प्रेम की अभिव्यक्ति करते हुए जब ‘तड़प-तड़प कर कटी रतिया’ का गायन हुआ, तो जायरीनों की आंखें नम हो गईं। कार्यक्रम के समापन पर सज्जादानशीन अरशद फरीदी एवं विशिष्ट अतिथियों ने हजरत सलीम चिश्ती की दरगाह पर अकीदत की चादर पेश की। इस दौरान मुल्क और दुनिया भर में अमन, चैन और भाईचारा कायम रहने की सामूहिक दुआ मांगी गई।
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शाही कव्वालों ने जब अपनी सुरीली आवाज में साजों की धुन पर सूफी कलाम पेश किए, तो पूरा परिसर भक्ति और प्रेम के रंग में सराबोर हो गया। कव्वाल अल्लाह नूर मिढाकुर ने ‘अब किसके दर पर जाएं हम सलीम चिश्ती’ और ‘आओ सखी अब मंगल गाएं, अपने मुर्शिद का जन्मदिन मनाएं’ जैसे कलामों से समां बांध दिया। वहीं, शाही कव्वाल सलीम हसन ने जब अमीर खुसरो का कालजयी कलाम ‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइके’ और ‘अपनी छवि बनाई के जो मैं पी के पास गई’ सुनाया, तो श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर वाह-वाह कर उठे। विरह और प्रेम की अभिव्यक्ति करते हुए जब ‘तड़प-तड़प कर कटी रतिया’ का गायन हुआ, तो जायरीनों की आंखें नम हो गईं। कार्यक्रम के समापन पर सज्जादानशीन अरशद फरीदी एवं विशिष्ट अतिथियों ने हजरत सलीम चिश्ती की दरगाह पर अकीदत की चादर पेश की। इस दौरान मुल्क और दुनिया भर में अमन, चैन और भाईचारा कायम रहने की सामूहिक दुआ मांगी गई।
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