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Agra News: स्वतंत्रता संग्राम के उपेक्षित नायकों’ के लिए बने स्मारक, चंबल फाउंडेशन की मांग, स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो क्रांतिकारियों का इतिहास, मल्लाहों और लोहारों के योगदान को मिले सम्मान

Sun, 03 May 2026 11:14 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2026 11:14 PM IST
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The Chambal Foundation demands memorials for the neglected heroes of the freedom struggle, including the history of revolutionaries in school curriculums, and recognizing the contributions of boatmen and blacksmiths.
बने चंबल शौर्य स्मारक, स्वतंत्रता संग्राम के उपे​क्षित नायकों का इतिहास हो उजागर
बाह। चंबल क्वारी नदी का दोआब क्रांतिकारियों की राजधानी रहा है। चंबल मिशन अभियान में रविवार को चंबल फाउंडेशन के कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम के उपेक्षित नायकों के इतिहास को उजागर किए जाने की मांग उठी। वक्ताओं ने क्रांतिकारियों की प्रतिमाएं, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, लाइट एंड साउंड शो, स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने, ‘चंबल गाथा’ डॉक्यूमेंट्री बनाने और डाक टिकट जारी करने जैसी मांगे उठाईं।
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चंबल परिवार के प्रमुख शाह आलम राना ने कहा कि चंबल घाटी के लोग इतने साहसी थे कि जो चल सकता था, वह अंग्रेजों से लड़ने के लिए तैयार रहता था। क्रांतिकारियों के लिए हथियार बनाने वाले लोहारों को अंग्रेजों ने दंडित किया, लेकिन उनका जिक्र कहीं नहीं मिलता। मल्लाहों ने न केवल क्रांतिकारियों को नदी मार्ग से सुरक्षित आवागमन कराया, बल्कि अंग्रेजी सैनिकों के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभाते हुए कई सैनिकों को चंबल नदी में डुबो दिया। इसके बावजूद उनके योगदान को इतिहास में भुला दिया गया। मल्लाह, बघेल आदि समाजों के क्रांतिकारी उपेक्षित रहे हैं। इतिहासकार देवेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि चंबल अंचल के क्रांतिकारी यह मानते थे कि भीषण गर्मी में अंग्रेजी सेना स्थानीय परिस्थितियों में टिक नहीं पाएगी। इसी रणनीति के तहत उन्होंने संघर्ष को आगे बढ़ाया। इस दौरान क्रांतिकारियों के वंशज भानु सिंह परिहार, बलराम सिंह जाटव, सूरज रेखा त्रिपाठी एडवोकेट, मान सिंह सरपंच, गजेंद्र सिंह, वैभव रंजन द्विवेदी, कौशल सिंह, विनोद मास्टर, आदिल खान, विवेक सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए। संवाद
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