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मंदिर देखा न पाठशाला, खोल दी मधुशाला
अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 01 Jun 2016 02:26 AM IST
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पानी सप्लाई में कटौती
- फोटो : Getty
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स्कूल, धार्मिक स्थलों और अस्पतालों के आसपास खुले हैं शराब के ठेके
देशी शराब ठेके 300
अंग्रेजी शराब की दुकान 218
बीयर की दुकान 195
भांग के ठेके 41
आबकारी विभाग को केवल सरकारी खजाना भरने की फिक्र है। फिर चाहे किसी धार्मिक भावनाएं आहत हों या फिर स्कूल जाने वाले बच्चों के कोमल मन पर गलत असर पड़े। विभाग को न तो मंदिर, मस्जिद की परवाह है और न ही स्कूल-अस्पतालों की। जहां चाहा वहां मधुशाला खोल डाली हैं। शहर के कई हिस्सों में इन दुकानों का विरोध हो रहा है, लेकिन अधिकारी चुप्पी साधकर बैठे हैं।
मार्च में आबकारी विभाग ने शराब की दुकानों के लाइसेंसों का नवीनीकरण किया और कुछ नई दुकानें उठाई गईं। ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से जहां चाहा वहां दुकानें खोलीं। घनी बस्तियों में महिलाओं और स्कूल, कालेज जाने वाली छात्राओं पर फब्तियां कसना और झगड़े झंझट आम बात है।
यही नहीं सिकंदरा में संरक्षित स्मारक का भी ख्याल नहीं रखा गया है। स्मारक के सामने बार, माडल शाप, देशी, बीयर और अंग्रेजी शराब की दुकानें हैं। नियम है कि किसी मलिन बस्ती में शराब की दुकान नहीं खुलेगी, लेकिन अधिकांश देशी शराब के ठेके मलिन बस्तियों में ही खुले हैं।
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दवा और दारू की दुकान साथ-साथ
यमुनापार के ट्रांसयमुना कालोनी में गंगाराम नर्सिंगहोम के बराबर में शराब की दुकान खुली है। यहीं पर उपकार नर्सिंगहोम के बराबर से शराब की दुकान संचालित है। मानस नगर में देशी शराब के ठेके के ठीक सामने हास्पिटल है। देहली गेट पर क्वीन विक्टोरिया गर्ल्स इंटर कालेज की दीवार से सटा कर दुकान खोली हुई हैं।
मंदिर के पास भी शराब बिक्री
पंचकुइयां पर दो मंदिर हैं और वहां तीन शराब की दुकानें हैं। इन दुकानों से मंदिरों की दूरी महज कुछ कदम है। सदरभट्टी में कन्या इंटर कालेज के सामने शराब की दुकान खुली हुई है। कोठी मीनाबाजार के पास लोहामंडी रोड पर देशी शराब की दुकान धार्मिक स्थल और डाइट प्रशिक्षण संस्थान के पास खुली है।
ये है नियम
आबकारी नियमों के मुताबिक, शराब, बीयर, भांग की दुकान और बार किसी धार्मिक स्थल, हास्पिटल, विद्यालय से कम से कम 50 मीटर की दूरी पर खोला जाएगा। पहले यह प्रतिबंध करीब 100 मीटर था। मलिन बस्ती के अंदर शराब की दुकान नहीं खोली जाएगी, लेकिन शहर में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। विभाग नियमों को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़कर पेश करता है। माडल शाप, बार या देशी शराब के ठेकों को छोड़कर किसी भी दुकान में बैठकर शराब पीने पर पाबंदी है, लेकिन लोग खुलेआम शराब और बीयर पीते हैं। दुकानों के सामने ओपन एयर बार खुल जाते हैं।
विरोध को किया दरकिनार
शहर में शराब की दुकानों का विरोध हुआ। सदरभट्टी में कन्या इंटर कालेज के सामने कई दिन धरना चला। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मन लाल जैन शराब बिक्री के विरोध में आंदोलनरत हैं। लेकिन विभाग पर इनका कोई असर नहीं है।
‘हमारा आंदोलन तो प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी की मांग के लिए चल रहा है। लेकिन शहर में मनमाने ढंग से दुकानें खोली जा रही हैं, उसे लेकर मुहिम छेड़ रखी है। आबकारी विभाग और प्रशासन को कुछ दुकानों को शिफ्ट करने के लिए कहा है लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। अब आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।’
चिम्मन लाल जैन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
शराब की दुकानों के संचालन में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाता है। धार्मिक स्थल या स्कूल से पथिक दूरी 50 मीटर पर ही दुकान खोली जा सकती है। भले ही वह आमने-सामने क्यों न हों। ऐसे ही धार्मिक स्थल किसी रजिस्टर्ड ट्रस्ट द्वारा संचालित हो और वे हास्पिटल जिनमें कम से कम 50 पलंग हो के पास भी दुकानें नहीं खोली गई हैं। व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रतिबंधि लागू नहीं होता है।
- मुकेश कुमार, आबकारी निरीक्षक
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देशी शराब ठेके 300
अंग्रेजी शराब की दुकान 218
बीयर की दुकान 195
भांग के ठेके 41
आबकारी विभाग को केवल सरकारी खजाना भरने की फिक्र है। फिर चाहे किसी धार्मिक भावनाएं आहत हों या फिर स्कूल जाने वाले बच्चों के कोमल मन पर गलत असर पड़े। विभाग को न तो मंदिर, मस्जिद की परवाह है और न ही स्कूल-अस्पतालों की। जहां चाहा वहां मधुशाला खोल डाली हैं। शहर के कई हिस्सों में इन दुकानों का विरोध हो रहा है, लेकिन अधिकारी चुप्पी साधकर बैठे हैं।
मार्च में आबकारी विभाग ने शराब की दुकानों के लाइसेंसों का नवीनीकरण किया और कुछ नई दुकानें उठाई गईं। ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से जहां चाहा वहां दुकानें खोलीं। घनी बस्तियों में महिलाओं और स्कूल, कालेज जाने वाली छात्राओं पर फब्तियां कसना और झगड़े झंझट आम बात है।
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यही नहीं सिकंदरा में संरक्षित स्मारक का भी ख्याल नहीं रखा गया है। स्मारक के सामने बार, माडल शाप, देशी, बीयर और अंग्रेजी शराब की दुकानें हैं। नियम है कि किसी मलिन बस्ती में शराब की दुकान नहीं खुलेगी, लेकिन अधिकांश देशी शराब के ठेके मलिन बस्तियों में ही खुले हैं।
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दवा और दारू की दुकान साथ-साथ
यमुनापार के ट्रांसयमुना कालोनी में गंगाराम नर्सिंगहोम के बराबर में शराब की दुकान खुली है। यहीं पर उपकार नर्सिंगहोम के बराबर से शराब की दुकान संचालित है। मानस नगर में देशी शराब के ठेके के ठीक सामने हास्पिटल है। देहली गेट पर क्वीन विक्टोरिया गर्ल्स इंटर कालेज की दीवार से सटा कर दुकान खोली हुई हैं।
मंदिर के पास भी शराब बिक्री
पंचकुइयां पर दो मंदिर हैं और वहां तीन शराब की दुकानें हैं। इन दुकानों से मंदिरों की दूरी महज कुछ कदम है। सदरभट्टी में कन्या इंटर कालेज के सामने शराब की दुकान खुली हुई है। कोठी मीनाबाजार के पास लोहामंडी रोड पर देशी शराब की दुकान धार्मिक स्थल और डाइट प्रशिक्षण संस्थान के पास खुली है।
ये है नियम
आबकारी नियमों के मुताबिक, शराब, बीयर, भांग की दुकान और बार किसी धार्मिक स्थल, हास्पिटल, विद्यालय से कम से कम 50 मीटर की दूरी पर खोला जाएगा। पहले यह प्रतिबंध करीब 100 मीटर था। मलिन बस्ती के अंदर शराब की दुकान नहीं खोली जाएगी, लेकिन शहर में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। विभाग नियमों को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़कर पेश करता है। माडल शाप, बार या देशी शराब के ठेकों को छोड़कर किसी भी दुकान में बैठकर शराब पीने पर पाबंदी है, लेकिन लोग खुलेआम शराब और बीयर पीते हैं। दुकानों के सामने ओपन एयर बार खुल जाते हैं।
विरोध को किया दरकिनार
शहर में शराब की दुकानों का विरोध हुआ। सदरभट्टी में कन्या इंटर कालेज के सामने कई दिन धरना चला। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिम्मन लाल जैन शराब बिक्री के विरोध में आंदोलनरत हैं। लेकिन विभाग पर इनका कोई असर नहीं है।
‘हमारा आंदोलन तो प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी की मांग के लिए चल रहा है। लेकिन शहर में मनमाने ढंग से दुकानें खोली जा रही हैं, उसे लेकर मुहिम छेड़ रखी है। आबकारी विभाग और प्रशासन को कुछ दुकानों को शिफ्ट करने के लिए कहा है लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। अब आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा।’
चिम्मन लाल जैन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
शराब की दुकानों के संचालन में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाता है। धार्मिक स्थल या स्कूल से पथिक दूरी 50 मीटर पर ही दुकान खोली जा सकती है। भले ही वह आमने-सामने क्यों न हों। ऐसे ही धार्मिक स्थल किसी रजिस्टर्ड ट्रस्ट द्वारा संचालित हो और वे हास्पिटल जिनमें कम से कम 50 पलंग हो के पास भी दुकानें नहीं खोली गई हैं। व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रतिबंधि लागू नहीं होता है।
- मुकेश कुमार, आबकारी निरीक्षक