{"_id":"6661daf1aabc4c038604a7f4","slug":"students-prepared-smart-meter-it-will-tell-whether-water-is-potable-or-not-three-sensors-will-work-2024-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP: छात्रों ने तैयार किया ऐसा स्मार्ट मीटर, बताएगा पानी पीने योग्य है या नहीं... तीन सेंसर करेंगे काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: छात्रों ने तैयार किया ऐसा स्मार्ट मीटर, बताएगा पानी पीने योग्य है या नहीं... तीन सेंसर करेंगे काम
Fri, 07 Jun 2024 12:01 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 07 Jun 2024 12:01 AM IST
सार
आरबीएस इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस बिचपुरी के छात्रों ने स्मार्ट वाटर मीटर का प्रोटोटाइप तैयार किया है, जो बताएगा कि पानी पीने योग्य है या नहीं। पानी की शुद्धता जानने के लिए इसमें तीन सेंसर लगाए गए हैं। आइये जानते हैं ये कैसे काम करेगा...
विज्ञापन
आरबीएस इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस में डिवाइस दिखाते छात्र
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा के आरबीएस इंजीनियरिंग टेक्निकल कैंपस बिचपुरी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्रों ने आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) आधारित स्मार्ट वाटर मीटर और क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम का प्रोटोटाइप (परीक्षण संस्करण) तैयार किया है। इस मीटर से पता चल सकेगा कि पानी पीने योग्य है या नहीं।
यह प्रोजेक्ट छात्रों ने विभागाध्यक्ष डॉ. जयकुमार के मार्गदर्शन में बनाया है। इंजीनियर उपेंद्र पाल सिंह, अनुज शर्मा, देश दीपक लवानियां ने भी सहयोग किया है। प्रोटोटाइप तैयार करने वाले विकास कुमार शर्मा, अंकित त्यागी, आयुष कुलश्रेष्ठ और मोहित शर्मा ने बताया कि पानी के मापदंडों का पता लगाने के लिए तीन सेंसर पानी के प्रवाह, टीडीएस और मैलापन को मापते हैं।
यह तीनों सेंसर आर्डिनो-यूनो ( माइक्रो कंट्रोलर) से जुड़े हुए हैं। टीडीएस सेंसर, पानी में कुल घुलित ठोस स्तर का पता लगाता है। टीडीएस से मापा गया मान यदि 50 पीपीएम से कम है या 500 पीपीएम से अधिक है तो यह पीने के लिए सुरक्षित नहीं है। प्रोजेक्ट का उद्देश्य पानी के रिसाव को तेजी से खोजना और वास्तविक समय में डाटा प्रदान करना है, जो जल संरक्षण में मदद करता है। संस्थान के निदेशक प्रो. बीएस कुशवाह ने बताया कि छात्र-छात्राओं ने पर्यावरण को बचाने के लिए कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह प्रोजेक्ट छात्रों ने विभागाध्यक्ष डॉ. जयकुमार के मार्गदर्शन में बनाया है। इंजीनियर उपेंद्र पाल सिंह, अनुज शर्मा, देश दीपक लवानियां ने भी सहयोग किया है। प्रोटोटाइप तैयार करने वाले विकास कुमार शर्मा, अंकित त्यागी, आयुष कुलश्रेष्ठ और मोहित शर्मा ने बताया कि पानी के मापदंडों का पता लगाने के लिए तीन सेंसर पानी के प्रवाह, टीडीएस और मैलापन को मापते हैं।
विज्ञापन
यह तीनों सेंसर आर्डिनो-यूनो ( माइक्रो कंट्रोलर) से जुड़े हुए हैं। टीडीएस सेंसर, पानी में कुल घुलित ठोस स्तर का पता लगाता है। टीडीएस से मापा गया मान यदि 50 पीपीएम से कम है या 500 पीपीएम से अधिक है तो यह पीने के लिए सुरक्षित नहीं है। प्रोजेक्ट का उद्देश्य पानी के रिसाव को तेजी से खोजना और वास्तविक समय में डाटा प्रदान करना है, जो जल संरक्षण में मदद करता है। संस्थान के निदेशक प्रो. बीएस कुशवाह ने बताया कि छात्र-छात्राओं ने पर्यावरण को बचाने के लिए कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है।
विज्ञापन