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Amar Ujala Exclusive: आगरा में 165 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी, बिना रजिस्ट्री संपत्तियों पर दिए गए कब्जे

Mon, 27 Jun 2022 04:15 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 27 Jun 2022 04:15 PM IST
सार

एडीए, आवास विकास, नगर निगम, औद्योगिक निगम व निजी बिल्डर्स ने अपनी रकम वसूल कर बिना रजिस्ट्री संपत्तियों पर कब्जा दे दिया। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। 

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Stamp theft worth Rs 165 crore in 10573 houses and shops in Agra, FIR will be registered
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

आगरा में प्राइवेट बिल्डर्स ही नहीं, सरकारी संस्थाएं भी स्टांप के नाम पर सरकार को चूना लगा रही हैं। आगरा विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, राज्य औद्योगिक निगम, नगर निगम व अन्य विभागों की विभिन्न योजनाओं के तहत बने 10,573 फ्लैट, मकान, दुकान व अन्य संपत्तियों में 165.38 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी मिली है। अपनी रकम लेकर बिना रजिस्ट्री संपत्तियों पर कब्जे बांट दिए गए। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की 31 मई 2022 को आई रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है।

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स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की इस रिपोर्ट के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा है। बिना रजिस्ट्री संपत्तियां बेचने व कब्जा देने के मामले में संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए गए हैं। उनकी संपत्तियों का स्टांप मूल्य तय करते हुए रजिस्ट्री कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसा नहीं करने पर आवंटियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होगी। विभाग अध्यक्षों से भी जवाब-तलब किया जाएगा। 
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एडीएम वित्त एवं राजस्व यशवर्धन श्रीवास्तव ने बताया कि सरकारी व निजी संस्थाओं द्वारा बनाई संपत्तियां चिह्नित कर ली गई हैं। कब्जेदारों को सब रजिस्ट्रार नोटिस जारी कर रहे हैं। बिना रजिस्ट्री कब्जा देने से विभाग को 165 करोड़ रुपये का स्टांप नहीं मिला है। जिसकी वसूली एक जुलाई से अभियान चलाकर की जाएगी। इस संबंध में सभी तहसीलों के उप निबंधकों को निर्देश दिए गए हैं।

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किसने, कितनी चोरी की

  • प्राइवेट बिल्डर्स व कॉलोनाइजर्स ने मल्टीस्टोरी बिल्डिंग, अपार्टमेंट व व्यावसायिक प्रोजेक्ट में 4435 फ्लैट, दुकानें बिना रजिस्ट्री कराए बेच दीं। इनमें 133.60 करोड़ रुपये का स्टांप चोरी की गई। बीते अप्रैल व मई माह में कुल 452 फ्लैटों की रजिस्ट्री से 11.05 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। अभी 3983 संपत्तियों की रजिस्ट्री का 122.55 करोड़ रुपये का स्टांप बकाया है।
  • आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की विभिन्न सरकारी व प्राइवेट आवास योजनाओं में 3739 संपत्तियां चिह्नित की गई हैं। इनसे करीब 34.77 करोड़ रुपये का स्टांप लेना था। अप्रैल व मई में कुल 51 संपत्तियों की रजिस्ट्री से 35.07 लाख रुपये का स्टांप मिला। अब 3688 संपत्तियों से 34.42 करोड़ रुपये की स्टांप वसूली होगी।
  • उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की विभिन्न योजनाओं में 2331 संपत्तियां रजिस्ट्री के लिए चिह्नित की गई हैं। जिनमें 1.79 करोड़ रुपये का स्टांप मिलना है। अप्रैल व मई में कुल 29 संपत्तियों के पंजीकरण से 10.72 लाख रुपये का राजस्व मिला है। 2302 संपत्तियों की रजिस्ट्री से 1.68 करोड़ रुपये की स्टांप वसूली की जानी है।
  • उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) की 25 संपत्तियां बिना रजिस्ट्री आवंटित की गई हैं। जिनमें 1.23 करोड़ रुपये का स्टांप चोरी की गई। अप्रैल व मई माह में कोई रजिस्ट्री नहीं हुई है। इनसे 1.23 करोड़ रुपये की वसूली होनी है।
  • कृषि उत्पादन मंडी समिति द्वारा 401 दुकानें व दो चबूतरे बनाए गए हैं। जिन्हें बिना पंजीकरण आवंटित कर दिया गया। इन दुकानों में 4.0 करोड़ की स्टांप चोरी की गई। दुकानों की रजिस्ट्री से स्टांप मूल्य की वसूली होगी।
  • नगर निगम की शहर में विभिन्न स्थानों पर 174 दुकानें हैं। किरायानामा, फर्द बोली, प्रीमियम व मासिक किराया दर का सर्वे किया जा रहा है। इनसे करीब 1.50 करोड़ रुपये की स्टांप मिलना है। आवंटित संपत्तियों का पंजीकरण के  लिए अभियान चलेगा।

रजिस्ट्री नहीं कराने पर होगी एफआईआर

एडीएम वित्त एवं राजस्व यशवर्धन श्रीवास्तव ने कहा कि जिन सरकारी व प्राइवेट योजनाओं में बिना रजिस्ट्री कब्जे आवंटित किए गए हैं उनसे स्टांप मूल्य वसूला जाएगा। सभी उप निबंधकों को निर्देश दिए हैं। विक्रेता व क्रेता को नोटिस भेजे जा रहे हैं। संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, इसे न कराना स्टांप चोरी की श्रेणी में आता है। स्टांप मूल्य नहीं देने पर आवंटियों व विभागों पर एफआईआर कराई जाएगी। 

आंकड़े 

  • प्राइवेट बिल्डर्स : 3983 संपत्तियों के 122.55 करोड़ रुपये
  • एडीए : 3688 संपत्तियों के 34.42 करोड़ रुपये
  • आवास विकास परिषद : 2302 संपत्तियों के 1.68 करोड़ रुपये
  • यूपीएसआईडीसी : 25 संपत्तियों के 1.23 करोड़ रुपये
  • मंडी समिति : 401 दुकानों के 4 करोड़ रुपये
  • नगर निगम की 174 दुकानों के 1.50 करोड़ रुपये
  • कुल 10573 संपत्तियों के 165.38  करोड़ रुपये
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