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बांग्लादेश के मुक्ति योद्धा पहुंचे आगरा: कहा- भारत के सहयोग के बिना आजादी नहीं मिलती, शुक्रगुजार हैं हम

Fri, 17 Dec 2021 03:35 PM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 17 Dec 2021 03:35 PM IST
सार

नई दिल्ली से स्वर्ण जयंती वर्ष स्पेशल ट्रेन बांग्लादेश के मुक्ति योद्धाओं को लेकर आगरा पहुंची। मुक्ति वाहिनी के 35 पूर्व सैनिक सपत्नीक ताजनगरी आए हैं। पहले दिन उन्होंने आगरा किले का भ्रमण किया। 

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Special Train Run On Golden Victory Year Indian Soldiers Involved In 1971 War Will Came Agra From
बांग्लादेश के मुक्ति योद्धा पहुंचे आगरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत-पाक के बीच 1971 के युद्ध के स्वर्ण जयंती वर्ष के मौके पर शुक्रवार को स्वर्णिम विजय वर्ष स्पेशल ट्रेन से बांग्लादेश की मुक्ति वाहिनी सेना के 35 मुक्ति योद्धा सपत्नीक आगरा कैंट स्टेशन पहुंचे। भारतीय सेना और रेलवे अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। मुक्ति योद्धाओं ने बताया कि भारत के सहयोग के बिना हम आजादी हासिल नहीं कर पाते। वह भारत के शुक्रगुजार रहेंगे। 

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16 दिसंबर, 1971 को भारतीय सेना ने पाकिस्तान को युद्ध में धूल चटाकर बांग्लादेश को आजादी दिलवाई थी। तभी से 16 दिसंबर को विजय दिवस मनाया जाता है। इस उपलक्ष्य में भारत सरकार के आमंत्रण पर बांग्लादेश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाली मुक्ति वाहिनी के 35 मुक्ति योद्धा अपनी पत्नियों के साथ आगरा भ्रमण करने के लिए आए हैं। 
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आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर दोपहर 2:28 बजे दिल्ली से इनको लेकर स्वर्ण जयंती वर्ष स्पेशल ट्रेन पहुंची। यहां भारतीय सेना की ओर से उनका स्वागत किया गया। आगरा रेल मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक मुदित चंद्रा भी अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। 

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परिवार के साथ बांग्लादेश के मुक्ति योद्धा - फोटो : अमर उजाला

भारत से हमारे आत्मीय संबंध : हसन
मुक्ति योद्धाओं के साथ आए बांग्लादेश के मेजर जनरल कमरुल हसन ने कहा कि भारत के साथ हमारे आत्मीय संबंध है। दोनों देशों के नागरिकों और सेना के बीच भी दोस्ताना संबंध हैं, जोकि बरसों से कायम हैं। यह हमारे लिए गौरव के क्षण हैं कि हम मुक्ति योद्धाओं के साथ आगरा भ्रमण करने के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने हाल में हादसे में शहीद हुए भारतीय सेना के सीडीएस जनरल बिपिन रावत को बांग्लादेश का मित्र बताया। उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया। 

'हमें उस युद्ध पर गर्व है' 
मुक्ति योद्धा गौतम नारायण राय चौधरी ने बताया कि उस युद्ध को याद करके ही सिहर उठते हैं। वह संघर्ष का दौर था, भारत की सेना के बगैर पाकिस्तान की गुलामी से निजात मिलना ही कठिन था। मुक्ति वाहिनी को भारतीय सेनाओं ने काफी मदद की। हमने भी उस युद्ध में अपनी जान की बाजी लगाकर लड़ाई लड़ी। आज हमें इस पर गर्व है। 

'तो बांग्लादेश नहीं होता'
मुक्ति योद्धा गहूर चंद्र ने कहा कि उस युद्ध में शहीद होने वाले हर सैनिक के बलिदान को याद रखा जाना चाहिए। भारत हमारा सबसे करीबी पड़ोसी है और हमारे रिश्ते अच्छे रहे हैं। 1971 का युद्ध नहीं होता तो शायद बांग्लादेश भी नहीं होता। हमें अच्छा लग रहा है कि हम भारत में आए हैं। यहां के लोगों से मिलने और संस्कृति को समझने में आसानी होगी। 

ट्रेन की हर बोगी को सजाया गया 
दिल्ली से आई स्पेशल ट्रेन की हर बोगी को विजय दिवस की याद को संजोने के लिए सजाया गया था। स्टेशन पर यात्रियों में ट्रेन के साथ सेल्फी लेने की होड़ मच गई। शाम को यह ट्रेन दिल्ली के लिए लौट गई। डीसीएम एसके श्रीवास्तव ने बताया कि रेलवे की ओर से मुक्ति योद्धाओं का स्वागत किया गया। 

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