एसएन का एक्सरे: पंखा न बेंच, दो घंटे इंतजार से बच्चों की हालत खराब
एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की ओपीडी में व्यवस्थाएं चौपट हैं। गैलरी में घंटों खड़े होकर इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता है। भीषण गर्मी में भी पंखा नहीं है और नाहीं लोगों के बैठने के लिए बेंच हैं।
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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग की ओपीडी में व्यवस्थाएं चौपट हैं। यहां पर बैठने के लिए बेंच नहीं हैं। पंखे और कूलर तक नहीं लगे हैं। इस गर्मी में गैलरी में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने वाले बच्चों का बुरा हाल है। सोमवार को इंतजार करते दो बच्चों की तबीयत बिगड़ गई।
बाल रोग विभाग की ओपीडी में सोमवार को 116 मरीज आए। यहां एक ही कक्ष में ओपीडी चल रही है, जिससे इलाज में दो से ढाई घंटे का समय लग रहा है। ओपीडी में बच्चों को लेकर बैठने के लिए बेंच नहीं हैं। गैलरी में ही तीमारदारों को बच्चों को लेकर लाइन में लगना पड़ता है। यहां पर मरीजों के लिए पंखे और कूलर भी नहीं लगाए गए हैं। गर्मी से बच्चों की हालत खराब हो रही है। प्रमुख अधीक्षक डॉ. बृजेश शर्मा का कहना है कि बाल रोग की ओपीडी में पंखा और बेंच लगवाने की व्यवस्था की जाएगी। विभागाध्यक्ष से ओपीडी में चिकित्सक बढ़ाने के लिए भी कहेंगे।
केस एक: गर्मी से खराब हुई तबीयत
लोहामंडी की शाकरीन ने बताया कि अपने दो साल के बेटे को लेकर के सुबह साढ़े नौ बजे आई थी। धक्कामुक्की और गर्मी के कारण बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। गार्ड से बच्चे को जल्दी दिखवाने के लिए कहा, उसने सुना नहीं। बच्चे को लेकर गर्मी में दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
केस दो: बच्चे को लेकर दो घंटे खड़े रहे
सेवला के मनीष कुमार ने बताया कि ओपीडी में बेंच नहीं है, पंखा तक नहीं लगा। एक ही कमरे में डॉक्टर बच्चों को देखते हैं। बच्चे को लेकर दो घंटे तक खड़ा रहा। बच्चा परेशान होकर रोने लगा तो इसे लेकर बाहर आ गया, पत्नी को लाइन में लगाना पड़ा।
बैठने के लिए बेंच तक नहीं
वजीर पुरा की शालिनी ने बताया कि 'ढाई घंटे तक लाइन में बच्चे को लेकर खड़ा रहना पड़ा। यहां बेंच भी नहीं है, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है। पंखे भी नहीं लगे हैं। ओपीडी में डॉक्टर बढ़ाए जाएं, जिससे कम समय लगे।' - शालिनी,
गर्मी से बच्चों क बुरा हाल
नुनिहाई से आए सौरभ कुमार ने बताया कि 'गर्मी से बुरा हाल है, ऐसे में बाल रोग की ओपीडी में पंखे, कूलर तक नहीं लगे। इससे घंटों लाइन में लगे रहने से बच्चों का बुरा हाल हो रहा है। पंखा-कूलर तो लगवा ही सकते हैं।' - सौरभ कुमार,
बाजार से खरीदीं दवाएं
वजीर पुरा के रहने वाले सौरभ उपाध्याय ने कहा कि 'डॉक्टर साहब ने बच्चे के पेट में गांठ बताई हैं। इसके लिए दो दवाएं पर्चे पर लिखीं, इसमें से एक भी दवा काउंटर पर नहीं मिली, बाजार से खरीदनी पड़ी।'