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श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने पंडित दीनदयाल को सौंपी थी कश्मीर आंदोलन की कमान
Wed, 07 Aug 2019 12:38 PM IST
मुकेश कुमार
पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 07 Aug 2019 12:38 PM IST
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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
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जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर के लिए होने वाले आंदोलन की कमान पंडित दीनदयाल उपाध्याय को सौंपी थी। इसका एलान 1952 में जनसंघ के कानपुर अधिवेशन में किया गया था। इसमें तय हुआ था कि सरकार पर दबाव बनाने के लिए सत्याग्रह शुरू होगा। सत्याग्रह जबरदस्त तरीके से शुरू भी हुआ।
अब जब अनुच्छेद 370 खत्म हो गया है तो पंडित जी के गांव नगला चंद्रभान के लोगों का कहना है कि दीनदयाल का सपना पूरा हो गया। आज जब कश्मीर अनुच्छेद 370 से आजाद हो गया है तब पंडित दीनदयाल उपाध्याय के गांव नगला चंद्रभान में हर कोई पंडित जी की संघर्ष गाथा को सुना रहा है।
इस गांव के पुराने लोग कहते हैं कि पंडित जी और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में जनसंघ की स्थापना के बाद से ही कश्मीर समस्या का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया था। पहले दीनदयाल उपाध्याय का आफिस लखनऊ में हुआ करता था लेकिन कश्मीर आंदोलन को देखते हुए इसे दिल्ली में बना दिया गया था। कश्मीर को लेकर होने वाले आंदोलनों में पंडित जी की संघर्ष गाथा का उल्लेख पंडित जी के ऊपर लिखी गई किताब में भी है।
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अब जब अनुच्छेद 370 खत्म हो गया है तो पंडित जी के गांव नगला चंद्रभान के लोगों का कहना है कि दीनदयाल का सपना पूरा हो गया। आज जब कश्मीर अनुच्छेद 370 से आजाद हो गया है तब पंडित दीनदयाल उपाध्याय के गांव नगला चंद्रभान में हर कोई पंडित जी की संघर्ष गाथा को सुना रहा है।
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इस गांव के पुराने लोग कहते हैं कि पंडित जी और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में जनसंघ की स्थापना के बाद से ही कश्मीर समस्या का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया था। पहले दीनदयाल उपाध्याय का आफिस लखनऊ में हुआ करता था लेकिन कश्मीर आंदोलन को देखते हुए इसे दिल्ली में बना दिया गया था। कश्मीर को लेकर होने वाले आंदोलनों में पंडित जी की संघर्ष गाथा का उल्लेख पंडित जी के ऊपर लिखी गई किताब में भी है।
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गांव वालों ने साझा कीं उनसे जुड़ी यादें
इस गांव के रमाशंकर पचौरी और जगदीश ने बताया कि पंडित जी हमेशा अनुच्छेद 370 के खिलाफ थे। उनके बुजुर्ग बताया करते थे कि पंडित जी की सभाओं में हमेशा इसका विरोध होता था। ‘एक देश में दो विधान-नहीं चलेंगे।
एक देश में दो प्रधान नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे। एक देश में दो निशान नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे...’। इस तरह के नारे सभाओं में लगते थे। गांव के क्षेत्रपाल शर्मा और भगवान स्वरूप ने बताया कि कश्मीर को जो आज मिला है वह पंडित जी के संघर्ष का नतीजा है।
अमित शाह ने कहा था, पंडित जी का सपना पूरा करेंगे
साल 2017 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशताब्दी समारोह में उनके गांव नगला चंद्रभान आए अमित शाह ने कहा था कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जो सपना है उसे वह लोग पूरा करेंगे। 370 अनुच्छेद को खत्म करने के लिए भाजपा काम कर रही है।
लोगों की मानें तो इस मौके पर अमित शाह ने कश्मीर समस्या को लेकर पंडित जी द्वारा किए गए सत्याग्रह पर भी चर्चा की थी। यह भी बताया था कि किस तरह से डॉ. मुखर्जी के निधन के बाद पंडित जी के हाथ में पूरे आंदोलन की कमान रही थी।
एक देश में दो प्रधान नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे। एक देश में दो निशान नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे...’। इस तरह के नारे सभाओं में लगते थे। गांव के क्षेत्रपाल शर्मा और भगवान स्वरूप ने बताया कि कश्मीर को जो आज मिला है वह पंडित जी के संघर्ष का नतीजा है।
अमित शाह ने कहा था, पंडित जी का सपना पूरा करेंगे
साल 2017 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशताब्दी समारोह में उनके गांव नगला चंद्रभान आए अमित शाह ने कहा था कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जो सपना है उसे वह लोग पूरा करेंगे। 370 अनुच्छेद को खत्म करने के लिए भाजपा काम कर रही है।
लोगों की मानें तो इस मौके पर अमित शाह ने कश्मीर समस्या को लेकर पंडित जी द्वारा किए गए सत्याग्रह पर भी चर्चा की थी। यह भी बताया था कि किस तरह से डॉ. मुखर्जी के निधन के बाद पंडित जी के हाथ में पूरे आंदोलन की कमान रही थी।