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आतंकियों से लोहा लेते बाह के गोपाल शहीद
आतंकियों से लोहा लेते बाह के गोपाल शहीद
Updated Tue, 14 Feb 2017 12:34 AM IST
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आतंकियों से लोहा लेते बाह के गोपाल शहीद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों से लड़ते हुए बाह के ताल का पुरा (तालपुरा ) गांव के 33 वर्षीय लांस नायक गोपाल सिंह भदौरिया शहीद हो गये। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए गांव के लोग अहमदाबाद रवाना हो गए। मुंबई पर 26/11 को हुए हमले के दौरान गोपाल सिंह को बतौर एनएसजी कमांडो अदम्य साहस के लिए विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।
बाह के ताल का पुरा निवासी मुनीम सिंह भदौरिया अहमदाबाद के हीराबाड़ी इलाके में सिक्योरिटी एजेंसी चलाते है। पत्नी जयश्री, दो पुत्र संजय सिंह व विक्रम सिंह साथ ही रहते हैं। गोपाल सिंह भदौरिया उनके बड़े बेटे थे। वह 2002 में राष्ट्रीय रायफल्स में भर्ती हुए। बचपन ताल का पुरा में बीता। चंबल के खादरों में दौड़कर सेना में भर्ती होने की तैयारी की थी। देश की हिफाजत का जुनून ही गोपाल सिंह को सेना में खींच ले गया। 26/11 के ऑपरेशन में जवाबी कार्रवाई करने वाले एनएसजी के विशेष दस्ते में गोपाल सिंह भदौरिया भी थे। ताज होटल पर आतंकियों की गोली लगने से घायल सूबेदार मेजर को बरसती गोलियों के बीच सुरक्षित एंबुलेंस तक पहुंचाया था। इसके लिए सेना ने विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया था। वर्तमान में उनकी जम्मू कश्मीर में तैनाती थी। कुलगाम में आतंकियों से लड़ते हुए गोपाल सिंह भदौरिया और रघुवीर सिंह चार आतंकी ढेर कर शहीद हो गये। रविवार की रात्रि ताल का पुरा में यह खबर पहुंची तो अंतिम दर्शन के लिए गांव और परिवार के लोग अहमदाबाद पहुंचने लगे। सोमवार को गांव में किसी के घर में चूल्हे नहीं जले। प्राइमरी स्कूल में बच्चे पढ़ने नहीं गये। एनजीओ एंग्री यूथ ने शहादत को सलाम किया। वसीम पठान, सुशील भदौरिया, मुदस्सिर हुसैन, अभिषेक राठौर, पुलकित भदौरिया आदि ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
शहीद के सम्मान में उमड़ पड़े अहमदाबाद के लोग
बाह। शहीद गोपाल सिंह भदौरिया के सम्मान में सोमवार शाम अहमदाबाद के लोग उनके पिता के आवास पर जमा हो गए। शव एयरपोर्ट पर पहुंचा तो लोगों का हुजूम उनके घर जाने वाले रास्ते पर उमड़ पड़ा। इससे पहले ही शहीद के पोस्टर और तिरंगे रोड पर जगह जगह लगा रखे थे। सेना की गाड़ी शव लेकर घर की ओर बढ़ी तो भीड़ ने फूलों की बारिश करते हुए शहीद गोपाल सिंह भदौरिया अमर रहें... के नारे लगाए।
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शहीद के चाचा उमेश सिंह ने बताया कि जम्मू से शहीद का शव अहमदाबाद एयरपोर्ट लाया गया। वहां से सेना की गाड़ी शव को लेकर घर पहुंची। शव आने की सूचना पर नगर के लोगों ने एयरपोर्ट से शहीद के घर तक मार्ग पर जगह-जगह शहीद के पोस्टर और तिरंगा झंडे लगा रखे थे। जब सेना की गाड़ी शव लेकर एयरपोर्ट से निकली तो रास्ते भर में देशभक्ति से सराबोर लोगों ने सेना के काफिले पर फूलों बारिश की और शहीद गोपाल सिंह भदौरिया अमर रहें... के नारे लगाए। घर में माता-पिता ने बेटे का शव देखा तो बेसुध हो गए। होश आया तो कहा कि बेटा देश के काम आया इससे वे खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। बाद में शव का अंतिम संस्कार शाम लगभग साढे़ छह बजे हुआ। सेना की ओर से पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई।
पिता को याद आ रहे हैं बेटे के अंतिम शब्द
बाह। अहमदाबाद के हीराबाड़ी इलाके की महाशक्ति सोसाइटी निवासी मुनीम सिंह भदौरिया देश के लिए अपनी जान देने वाले बेटे के अंतिम शब्द याद कर भावुक हो रहे हैं। गोपाल सिंह 30 जनवरी को ड्यूटी पर लौटते समय रेलवे स्टेशन पर पिता से बोले थे - पापा अपना और मम्मी का ख्याल रखना। उन्होंने बताया कि शहादत की खबर मिली तब उसकी मां जयश्री कानपुर में अपने भतीजे के शादी में गयी थीं। ताल का पुरा गांव में रह रहे शहीद के एक चाचा संजय सिंह भी सेना में है। चाचा हाकिम रिटायर्ड सूबेदार हैं। चाचा राजीव सिंह ने बताया कि घर के सभी लोग अहमदाबाद के लिए रवाना हो गए हैं। चाचा उमेश सिंह भदौरिया, राजीव सिंह भदौरिया ने बताया कि अगली पीढ़ी को भी सेना में भर्ती कराएंगे। देश के लिए अपना बलिदान देकर गोपाल सिंह भदौरिया ने परिवार का मान बढ़ाया है। लांस नायक गोपाल सिंह भदौरिया युवाओं को सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने के लिए प्रेरित करते रहते थे। उनके दोस्त पवन सिंह, अजीत सिंह, शिवराम सिंह, सोनू, सचिन आदि ने बताया कि गोपाल धार्मिक प्रवृत्ति के थे। जब भी छुट्टी आते बटेश्वर या फिर मथुरा में रम जाते थे।
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बाह के ताल का पुरा निवासी मुनीम सिंह भदौरिया अहमदाबाद के हीराबाड़ी इलाके में सिक्योरिटी एजेंसी चलाते है। पत्नी जयश्री, दो पुत्र संजय सिंह व विक्रम सिंह साथ ही रहते हैं। गोपाल सिंह भदौरिया उनके बड़े बेटे थे। वह 2002 में राष्ट्रीय रायफल्स में भर्ती हुए। बचपन ताल का पुरा में बीता। चंबल के खादरों में दौड़कर सेना में भर्ती होने की तैयारी की थी। देश की हिफाजत का जुनून ही गोपाल सिंह को सेना में खींच ले गया। 26/11 के ऑपरेशन में जवाबी कार्रवाई करने वाले एनएसजी के विशेष दस्ते में गोपाल सिंह भदौरिया भी थे। ताज होटल पर आतंकियों की गोली लगने से घायल सूबेदार मेजर को बरसती गोलियों के बीच सुरक्षित एंबुलेंस तक पहुंचाया था। इसके लिए सेना ने विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया था। वर्तमान में उनकी जम्मू कश्मीर में तैनाती थी। कुलगाम में आतंकियों से लड़ते हुए गोपाल सिंह भदौरिया और रघुवीर सिंह चार आतंकी ढेर कर शहीद हो गये। रविवार की रात्रि ताल का पुरा में यह खबर पहुंची तो अंतिम दर्शन के लिए गांव और परिवार के लोग अहमदाबाद पहुंचने लगे। सोमवार को गांव में किसी के घर में चूल्हे नहीं जले। प्राइमरी स्कूल में बच्चे पढ़ने नहीं गये। एनजीओ एंग्री यूथ ने शहादत को सलाम किया। वसीम पठान, सुशील भदौरिया, मुदस्सिर हुसैन, अभिषेक राठौर, पुलकित भदौरिया आदि ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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शहीद के सम्मान में उमड़ पड़े अहमदाबाद के लोग
बाह। शहीद गोपाल सिंह भदौरिया के सम्मान में सोमवार शाम अहमदाबाद के लोग उनके पिता के आवास पर जमा हो गए। शव एयरपोर्ट पर पहुंचा तो लोगों का हुजूम उनके घर जाने वाले रास्ते पर उमड़ पड़ा। इससे पहले ही शहीद के पोस्टर और तिरंगे रोड पर जगह जगह लगा रखे थे। सेना की गाड़ी शव लेकर घर की ओर बढ़ी तो भीड़ ने फूलों की बारिश करते हुए शहीद गोपाल सिंह भदौरिया अमर रहें... के नारे लगाए।
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शहीद के चाचा उमेश सिंह ने बताया कि जम्मू से शहीद का शव अहमदाबाद एयरपोर्ट लाया गया। वहां से सेना की गाड़ी शव को लेकर घर पहुंची। शव आने की सूचना पर नगर के लोगों ने एयरपोर्ट से शहीद के घर तक मार्ग पर जगह-जगह शहीद के पोस्टर और तिरंगा झंडे लगा रखे थे। जब सेना की गाड़ी शव लेकर एयरपोर्ट से निकली तो रास्ते भर में देशभक्ति से सराबोर लोगों ने सेना के काफिले पर फूलों बारिश की और शहीद गोपाल सिंह भदौरिया अमर रहें... के नारे लगाए। घर में माता-पिता ने बेटे का शव देखा तो बेसुध हो गए। होश आया तो कहा कि बेटा देश के काम आया इससे वे खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। बाद में शव का अंतिम संस्कार शाम लगभग साढे़ छह बजे हुआ। सेना की ओर से पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी गई।
पिता को याद आ रहे हैं बेटे के अंतिम शब्द
बाह। अहमदाबाद के हीराबाड़ी इलाके की महाशक्ति सोसाइटी निवासी मुनीम सिंह भदौरिया देश के लिए अपनी जान देने वाले बेटे के अंतिम शब्द याद कर भावुक हो रहे हैं। गोपाल सिंह 30 जनवरी को ड्यूटी पर लौटते समय रेलवे स्टेशन पर पिता से बोले थे - पापा अपना और मम्मी का ख्याल रखना। उन्होंने बताया कि शहादत की खबर मिली तब उसकी मां जयश्री कानपुर में अपने भतीजे के शादी में गयी थीं। ताल का पुरा गांव में रह रहे शहीद के एक चाचा संजय सिंह भी सेना में है। चाचा हाकिम रिटायर्ड सूबेदार हैं। चाचा राजीव सिंह ने बताया कि घर के सभी लोग अहमदाबाद के लिए रवाना हो गए हैं। चाचा उमेश सिंह भदौरिया, राजीव सिंह भदौरिया ने बताया कि अगली पीढ़ी को भी सेना में भर्ती कराएंगे। देश के लिए अपना बलिदान देकर गोपाल सिंह भदौरिया ने परिवार का मान बढ़ाया है। लांस नायक गोपाल सिंह भदौरिया युवाओं को सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने के लिए प्रेरित करते रहते थे। उनके दोस्त पवन सिंह, अजीत सिंह, शिवराम सिंह, सोनू, सचिन आदि ने बताया कि गोपाल धार्मिक प्रवृत्ति के थे। जब भी छुट्टी आते बटेश्वर या फिर मथुरा में रम जाते थे।