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शुभ विवाह के बहुत कम मुहूर्त, साल के बचे 85 दिनों में महज पांच तिथियों पर गूंजेगी शादी की शहनाई
Wed, 07 Oct 2020 12:17 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 07 Oct 2020 12:17 AM IST
सार
आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश ज्योतिष व विद्वत परिषद ने बताया कि पंचांगों की मानें तो इस वर्ष नवम्बर में
मात्र दो शुभ मुहूर्त 25 व 30 नवम्बर के है। वहीं साल के अंतिम माह दिसम्बर में तीन, सात दिसंबर, 9 और 11 दिसम्बर हैं। इस प्रकार
वर्ष 2020 के शेष 85 दिनों में मात्र पांच ही दिन शहनाइयां बज सकेगी। विवाह योग्य युवक-युवतियों को आगामी अप्रैल 2021 तक
इंतजार करना होगा।
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शादी के शुभ मुहूर्त, पंडित आचार्य रामचंद्र शर्मा वैदिक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते वर्ष 2020 शादी करने वाले युवक-युवतियों के लिए चुनौतियां लेकर आया है। इस वर्ष शुभ मुहूर्तों का अभाव है। अभी चालू वर्ष में 85 दिन शेष हैं और विवाह के मात्र पांच शुभ मुहूर्त ही हैं।
आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश ज्योतिष व विद्वत परिषद ने बताया कि पंचांगों की मानें तो इस वर्ष नवंबर में मात्र दो शुभ मुहूर्त 25 व 30 नवम्बर के है।
वहीं साल के अंतिम माह दिसम्बर में तीन, सात दिसंबर, नौ और 11 दिसम्बर हैं। इस प्रकार वर्ष 2020 के शेष 85 दिनों में मात्र पांच ही दिन शहनाइयां बज सकेगी। विवाह योग्य युवक-युवतियों को आगामी अप्रैल 2021 तक इंतजार करना होगा।
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आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश ज्योतिष व विद्वत परिषद ने बताया कि पंचांगों की मानें तो इस वर्ष नवंबर में मात्र दो शुभ मुहूर्त 25 व 30 नवम्बर के है।
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वहीं साल के अंतिम माह दिसम्बर में तीन, सात दिसंबर, नौ और 11 दिसम्बर हैं। इस प्रकार वर्ष 2020 के शेष 85 दिनों में मात्र पांच ही दिन शहनाइयां बज सकेगी। विवाह योग्य युवक-युवतियों को आगामी अप्रैल 2021 तक इंतजार करना होगा।
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शुद्ध विवाह के निर्धारण में अनेक ज्योतिषीय मुहूर्त निर्धारण मानकों पर विचार किया जाता है। गुरु शुक्रास्त व विविध समयशुद्धि विवेचना को ध्यान में रख पंचांगकार मुहूर्त की रचना करते हैं। शेष बचे दिनों में मात्र पांच दिन ही शुभमुहूर्त होने मुख्य कारण 25 नवम्बर तक देव शयनकाल, आश्विन अधिकमास, धनु संक्रांति आदि है।
इस समय शुद्धि के साथ ही शुभ मुहूर्त की गणना वर वधू के चन्द्र, सूर्य व गुरु बल के साथ शुद्ध विवाह की तिथि बनती है। शुद्ध विवाह की तिथि निर्धारण सामान्य कार्य नहीं है। योग्य ज्योतिषी के मार्गदर्शन में ही यह किया जाना चाहिए।
साल के शेष बचे 85 दिनों में एक अबूझ मुहूर्त भी है, देवोत्थान एकादशी का। इस अबूझ संज्ञक मुहूर्त में सभी विवाह योग्य युवक-युवती विवाह कर सकते हैं। आचार्य शर्मा ने बताया कि वैसे पूरे 2020 में शुद्ध विवाह के बहुत कम ही मुहूर्त होने से विवाह योग्य युवक-युवतियों के साथ इससे जुड़े पंडित, हलवाई, बैंड बाजे (शहनाई वादक) होटल, धर्मशाला, टेंट, व्यवसायी भी आर्थिक संकट में हैं।
इस समय शुद्धि के साथ ही शुभ मुहूर्त की गणना वर वधू के चन्द्र, सूर्य व गुरु बल के साथ शुद्ध विवाह की तिथि बनती है। शुद्ध विवाह की तिथि निर्धारण सामान्य कार्य नहीं है। योग्य ज्योतिषी के मार्गदर्शन में ही यह किया जाना चाहिए।
साल के शेष बचे 85 दिनों में एक अबूझ मुहूर्त भी है, देवोत्थान एकादशी का। इस अबूझ संज्ञक मुहूर्त में सभी विवाह योग्य युवक-युवती विवाह कर सकते हैं। आचार्य शर्मा ने बताया कि वैसे पूरे 2020 में शुद्ध विवाह के बहुत कम ही मुहूर्त होने से विवाह योग्य युवक-युवतियों के साथ इससे जुड़े पंडित, हलवाई, बैंड बाजे (शहनाई वादक) होटल, धर्मशाला, टेंट, व्यवसायी भी आर्थिक संकट में हैं।
आचार्य पंडित शर्मा वैदिक ने बताया कि आगामी वर्ष 2021 भी विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए चुनौतियां लेकर आ रहा है। 20 अप्रैल तक पंचागकारों ने विवाह की तिथि निर्धारित नहीं की है। इसका प्रमुख कारण, धनु, मीन की संक्रांति, गुरु शुक्र का तारा अस्त होने व होलाष्टक बताए जाते है।
आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि विवाह योग्य युवक युवतियों ने निराशा से बचने के लिए अबूझ मुहूर्त में विवाह करने का भी मन बनाया है। अबूझ मुहूर्त जैसे देव उठनी ग्यारस, वसन्त पंचमी आदि हैं।
आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि विवाह योग्य युवक युवतियों ने निराशा से बचने के लिए अबूझ मुहूर्त में विवाह करने का भी मन बनाया है। अबूझ मुहूर्त जैसे देव उठनी ग्यारस, वसन्त पंचमी आदि हैं।