फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   sentence to life convict of triple murder

हत्या के जिस मामले में छूटा था, दो साल बाद उसी केस में मिली उम्रकैद की सजा

Fri, 19 Jul 2019 10:48 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 19 Jul 2019 10:48 AM IST
विज्ञापन
sentence to life convict of triple murder
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
मेरठ कोतवाली के मोहल्ला बनी सराय में सात जून 2003 को हुए तिहरे हत्याकांड में शामिल रहे नदीम उर्फ कालिया को आगरा कोर्ट ने बालिग माना है। उसे उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। दो साल पहले इसी केस में उसने घटना के वक्त खुद को नाबालिग बताया था। 
विज्ञापन


सीएमओ की रिपोर्ट में उसकी उस समय की उम्र 15 साल बताई गई। इसी आधार पर उसे बरी कर दिया गया था। इसके खिलाफ अपील में सुनवाई के दौरान पाया गया कि उसके नाम 2003 में ही शस्त्र लाइसेंस बन गया था। इसी आधार पर उसे अब बालिग माना गया।
विज्ञापन


तिहरे हत्याकांड में शामिल रहे पांच लोगों नदीम उर्फ कालिया, मोउनुद्दीन, मुन्ना, ताहिर और खालिद को मेरठ कोर्ट ने चार अगस्त 2007 को फांसी की सजा सुनाई थी। सभी बनी सराय के हैं। इन्होंने डॉ. नसीरुद्दीन, उनके बेटे प्रिंस उर्फ गुलाम अलाउद्दीन और मोहम्मद हसीन उर्फ गुड्डू की गोली मारकर हत्या की थी। चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। रिपोर्ट डॉ. नसीरुद्दीन के भाई मोहम्मद इकबाल ने दर्ज कराई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

आगरा केंद्रीय जेल में बंद है अभियुक्त

बाद में पांच सितंबर 2008 को हाईकोर्ट ने इनकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया। इसके बाद दो हत्यारे मुन्ना और कालिया को आगरा की सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया। यहां कालिया ने 22 मार्च 2017 को खुद को नाबालिग (बाल अपचारी) बताते हुए वकील के माध्यम से किशोर न्याय बोर्ड में प्रार्थना पत्र दिया।

बोर्ड के आदेश पर सीएमओ ने 19 अप्रैल 2017 को रिपोर्ट दी। इसमें बताया कि घटना के समय कालिया की उम्र 15 साल एक माह 18 दिन थी। इस आधार पर किशोर न्याय बोर्ड ने कालिया को तीन मई 2017 को बरी कर दिया। 

इकबाल के पिता हाजी बसुरुद्दीन ने आगरा जिला जज कोर्ट में की गई अपील में दावा किया कि कालिया घटना के समय बालिग था। दावे के साथ साक्ष्य दिए कि उसके नाम 2003 में ही रायफल का लाइसेंस था। यह हत्या में इस्तेमाल की गई थी। 

इसे पुलिस ने बरामद भी किया था। साथ ही मेरठ कोर्ट में कालिया ने अपने बयान में घटना के वक्त खुद को बालिग (18 वर्ष का) का बताया था। उस समय हुए मेडिकल परीक्षण में भी उम्र के हिसाब से वह बालिग था। 

जिला जज एके श्रीवास्तव ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कालिया की आजीवन कारावास की सजा को बहाल रखते हुए उसे तुरंत जेल भेजने के आदेश दिए। बसुरुद्दीन की ओर से पैरवी एडवोकेट दुर्गविजय सिंह भैया और जयवीर सिंह ने की।

मुन्ना की चाल नहीं चल पाई थी 

कालिया के बरी हो जाने के बाद हत्यारे मुन्ना ने भी खुद को बाल अपचारी बताया था। सीएमओ की रिपोर्ट में उसे भी घटना के समय नाबालिग घोषित कर दिया था। लेकिन वादी पक्ष ने हाईकोर्ट में मेडिकल रिपोर्ट को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट पर स्टे कर दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed