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यूपी: जब्त दवाओं की बेकदरी पर जागा विभाग, खुले में सड़ती दवाएं अब कमरों में रखी गईं; दिया गया ये तर्क
Thu, 10 Sep 2026 10:04 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 10 Sep 2026 10:04 AM IST
सार
जब्त दवाओं को खुले में रखे जाने का मामला सामने आने के बाद औषधि विभाग ने आधी दवाओं को कमरों में रखवा दिया, जबकि बाकी दवाएं अभी खुले में पड़ी हैं। बारिश से कई दवाएं और उनके रैपर खराब हो चुके हैं, जिससे कोर्ट में ये अहम साक्ष्य कमजोर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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जब्त दवाओं को कचरे की तरह खुले में फेंका
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
औषधि विभाग दवाओं के रखरखाव को लापरवाही बरत रहे हैं। खुले में पड़ी दवाओं में से आधी को कमरे में कबाड़ की तरह भर दिया है। अभी आधी दवाएं खुले में ही पड़ी हैं। इनको बृहस्पतिवार को रखा जाएगा।
औषधि विभाग ने बीते दिनों कार्रवाई में जब्त दवाओं को जिला मलेरिया अधिकारी विभाग के पास खुले में फेंक दिया है। बारिश और बेकदरी से दवाएं सड़-गल गई हैं। औषधि निरीक्षक नीलेश शर्मा दोपहर बाद मौके पर पहुंचे और इनमें से आधी दवाओं को कमरा खुलवाकर भरवा दिया है। इन तीन कमरों में भी दवाएं ऐसे ही भरी हुई हैं। इससे ये क्षतिग्रस्त हो रही हैं, अधिकांश के रैपर भी नष्ट हो गए हैं। इससे कोर्ट में आरोपियों पर दोष साबित करना आसान नहीं होगा। सहायक आयुक्त औषधि अरविंद गुप्ता ने बताया कि विभाग के पास स्थान सीमित है, ऐसे में इनको कमरों में रखवा दिया है। आधी दवाओं को बृहस्पतिवार को कमरों में रखवाया जाएगा।
आरोप साबित के लिए सबूत सुरक्षित रखना जरूरी
पूर्व डीजीसी क्राइम बसंत गुप्ता का कहना है कि कोर्ट में मामला विचाराधीन होने तक दवाएं अहम साक्ष्य के तौर होती हैं। इनको बेहद सुरक्षित ढंग से रखा जाना जरूरी है। मामले में कोर्ट से फैसला होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त दवाओं का नष्ट किया जाता है।
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दवाओं के रखरखाव को ऑडिट करने की मांग
जिला आगरा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशु शर्मा का कहना है कि दवाओं के रखरखाव में विभाग लापरवाही बरत रहा है। कोर्ट में मामला लंबे समय तक चलते हैं, ऐसे में सबूत नष्ट होने से आरोप साबित करना आसान नहीं होगा। ये जानबूझकर सबूत नष्ट करने की साजिश है। शासन को पत्र लिखकर जब्त सभी दवाओं के रखरखाव की ऑडिट करने की मांग करें।
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औषधि विभाग ने बीते दिनों कार्रवाई में जब्त दवाओं को जिला मलेरिया अधिकारी विभाग के पास खुले में फेंक दिया है। बारिश और बेकदरी से दवाएं सड़-गल गई हैं। औषधि निरीक्षक नीलेश शर्मा दोपहर बाद मौके पर पहुंचे और इनमें से आधी दवाओं को कमरा खुलवाकर भरवा दिया है। इन तीन कमरों में भी दवाएं ऐसे ही भरी हुई हैं। इससे ये क्षतिग्रस्त हो रही हैं, अधिकांश के रैपर भी नष्ट हो गए हैं। इससे कोर्ट में आरोपियों पर दोष साबित करना आसान नहीं होगा। सहायक आयुक्त औषधि अरविंद गुप्ता ने बताया कि विभाग के पास स्थान सीमित है, ऐसे में इनको कमरों में रखवा दिया है। आधी दवाओं को बृहस्पतिवार को कमरों में रखवाया जाएगा।
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आरोप साबित के लिए सबूत सुरक्षित रखना जरूरी
पूर्व डीजीसी क्राइम बसंत गुप्ता का कहना है कि कोर्ट में मामला विचाराधीन होने तक दवाएं अहम साक्ष्य के तौर होती हैं। इनको बेहद सुरक्षित ढंग से रखा जाना जरूरी है। मामले में कोर्ट से फैसला होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त दवाओं का नष्ट किया जाता है।
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दवाओं के रखरखाव को ऑडिट करने की मांग
जिला आगरा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशु शर्मा का कहना है कि दवाओं के रखरखाव में विभाग लापरवाही बरत रहा है। कोर्ट में मामला लंबे समय तक चलते हैं, ऐसे में सबूत नष्ट होने से आरोप साबित करना आसान नहीं होगा। ये जानबूझकर सबूत नष्ट करने की साजिश है। शासन को पत्र लिखकर जब्त सभी दवाओं के रखरखाव की ऑडिट करने की मांग करें।