{"_id":"67d33ec54b2b1debf401667e","slug":"school-clerk-fruad-of-16-lakh-rupee-police-start-investigation-2025-03-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra: स्कूल में बच्चों के हक पर क्लर्क का डाका...हड़प गया 16 लाख रुपये, पुलिस ने दर्ज किया केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra: स्कूल में बच्चों के हक पर क्लर्क का डाका...हड़प गया 16 लाख रुपये, पुलिस ने दर्ज किया केस
Fri, 14 Mar 2025 11:15 AM IST
अरुन पाराशर
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Fri, 14 Mar 2025 11:15 AM IST
सार
इंटर कॉलेज में 19 दुकान और एक हाॅल का निर्माण कराकर उन्हें किराए पर दिया गया। इससे मिलने वाला किराया खाते में जमा कराया जाना था। इस रुपये से स्कूल में बच्चों की सुविधा के लिए कार्य कराए जाने थे, लेकिन लिपिक इस रुपये को हड़प गया।
विज्ञापन
agra police
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा के विमला देवी इंटर कॉलेज में कार्यरत लिपिक ने वित्तविहीन कक्षाओं की वित्तीय सहायता के लिए बनाई गई दुकानों के किराए से अर्जित लाखों रुपये की बंदरबांट कर ली। प्रबंधक दीपक सिकरवार ने थाना एत्मादपुर में लिपिक के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
प्रबंधक ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2019 में कॉलेज में बच्चों की सुविधा के लिए आरओ, सौर ऊर्जा और अन्य कई विकास कार्य कराए जाने थे। वित्तविहीन कक्षाओं की वित्तीय सहायता को कॉलेज में 19 दुकान और एक हाॅल का निर्माण कराकर उन्हें किराए पर दिया गया। जिससे कॉलेज को वित्तीय सहायता मिल सके और विकास कार्य आसानी से कराए जा सकें।
आरोपी लिपिक ने दुकानों से मिलने वाला किराया कभी कॉलेज के खाते में जमा नहीं किया। खुद को मालिक दर्शाकर और फर्जी रसीद बनाकर वसूली की। जुलाई 2021 में प्रबंधक बनने के बाद कॉलेज के खाते का विवरण देखा तो पाया कि खाते में पैसा नहीं है।
विज्ञापन
2500 रुपये प्रति दुकान का किराया जो 16 लाख रुपये बैठता है। वह खाते में जमा ही नहीं हुआ। लिपिक जितेंद्र ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। बाद में गड़बड़ी का पता चला। डीसीपी सिटी से इसकी शिकायत की गई थी।
विज्ञापन
प्रबंधक ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2019 में कॉलेज में बच्चों की सुविधा के लिए आरओ, सौर ऊर्जा और अन्य कई विकास कार्य कराए जाने थे। वित्तविहीन कक्षाओं की वित्तीय सहायता को कॉलेज में 19 दुकान और एक हाॅल का निर्माण कराकर उन्हें किराए पर दिया गया। जिससे कॉलेज को वित्तीय सहायता मिल सके और विकास कार्य आसानी से कराए जा सकें।
विज्ञापन
आरोपी लिपिक ने दुकानों से मिलने वाला किराया कभी कॉलेज के खाते में जमा नहीं किया। खुद को मालिक दर्शाकर और फर्जी रसीद बनाकर वसूली की। जुलाई 2021 में प्रबंधक बनने के बाद कॉलेज के खाते का विवरण देखा तो पाया कि खाते में पैसा नहीं है।
विज्ञापन
2500 रुपये प्रति दुकान का किराया जो 16 लाख रुपये बैठता है। वह खाते में जमा ही नहीं हुआ। लिपिक जितेंद्र ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। बाद में गड़बड़ी का पता चला। डीसीपी सिटी से इसकी शिकायत की गई थी।