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हिंदी हैं हम: 'बाजार की भाषा के रूप में विकसित हुई हिंदी, इसमें बढ़ेंगे रोजगार के अवसर'
Tue, 18 Aug 2020 12:48 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 18 Aug 2020 12:48 AM IST
सार
- हिंदी भाषा के विशेषज्ञों ने कहा, बहुराष्ट्रीय कंपनियां हिंदी माध्यम से पढ़े लोगों को भी दे रही हैं नौकरियां
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हिंदी भाषा के विशेषज्ञ डॉ. गुंजन, प्रोफेसर प्रदीप श्रीधर, डॉ. सुनीता शर्मा, डॉ. युवराज सिंह (क्रमश:)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिंदी भाषा के विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदी का आने वाला समय निश्चित की स्वर्णिम है। यह वैश्विक स्तर पर तेजी से पांव पसार रही है। विदेश के विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां हिंदी माध्यम से पढ़े लोगों को भी नौकरी के अवसर दे रही हैं। हिंदी को सीखने, बोलने और पढ़ने के लिए लोगों का रुझान बढ़ रहा है। अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत सोमवार को हिंदी भाषा के विशेषज्ञों से व्हाट्स एप संवाद किया।
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हिंदी विश्व में तेजी से पैर पसार रही
कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप श्रीधर ने कहा कि हिंदी का भविष्य बहुत उज्ज्वल है, यह वैश्विक स्तर पर अपने पैर पसार रही है। बड़ा वैश्विक बाजार होने से भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की रुचि बढ़ रही है। इसी के साथ हिंदी में नौकरियों के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
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150 देशों में पढ़ाई जा रही हिंदी
केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के नवीकरण व भाषा प्रसार विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उमापति दीक्षित ने कहा कि हिंदी विश्व के 150 देशों में पढ़ाई जा रही है। हिंदी के प्रचार-प्रसार में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। तकनीकी ने हिंदी को आगे बढ़ाने में अपना पूर्ण योगदान देना शुरू कर दिया है। विभिन्न भारतीय भाषाओं व साहित्यों के आदान-प्रदान,अनुवाद आदि का प्रबंध होना चाहिए। विश्वास है कि आने वाले समय में हिंदी का ही बोलबाला होगा।
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100 से अधिक देशों में हिंदी पीठ की स्थापना हो चुकी
श्रीमती बीडी जैन गर्ल्स पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. शिक्षा श्रीधर ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक है। बीते समय में हिंदी को वह सम्मान नहीं मिला, जिसकी वह अधिकारिणी थी। वह मात्र प्रतीकात्मक राजभाषा बनकर रह गई। वहीं, हिंदी का आने वाला समय स्वर्णिम होगा, यह तय है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ने दुनिया के सौ से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी पीठ की स्थापना की है।
नई शिक्षा नीति ने खोले हिंदी की प्रगति के द्वार
बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गुंजन का कहना है कि तकनीक के साथ अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत हिंदी भाषा वैश्विक स्तर पर खुद को स्थापित जरूर करेगी। हिंदी का तकनीकी सामर्थ्य बढ़ रहा है। जल्द यह प्रमाणित कर देगी कि कोई भी ज्ञान या कार्य ऐसा नहीं है, जो हिंदी में संभव न हो। नई शिक्षा नीति ने हिंदी के लिए प्रगति के सारे द्वार खोल दिए हैं। विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि वाली भाषा हिंदी का कल स्वर्णिम होगा।
बाजार की भाषा के रूप में विकसित हुई हिंदी
हिंदी पहले संप्रेषण की भाषा, फिर साहित्य व कार्यालयीय भाषा के रूप में अग्रसित हुई। अब तकनीकी भाषा के रूप में विकसित हो गई है। आज इंटरनेट पर लेखन का दौर आने से इसके स्वरूप एवं महत्व में अनेकों परिवर्तन आ गए हैं। विदेशों में हिंदी शिक्षण की बात हो या हिंदी अनुवाद या पत्रकारिता हो, हिंदी को बाजार की भाषा के रूप में विकसित कर दिया है। - डॉ. रणजीत भारती, शिक्षक, भाषा विज्ञान विभाग, केएमआई, विवि
नई शिक्षा नीति ने खोले हिंदी की प्रगति के द्वार
बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय के हिंदी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गुंजन का कहना है कि तकनीक के साथ अपने अस्तित्व के लिए संघर्षरत हिंदी भाषा वैश्विक स्तर पर खुद को स्थापित जरूर करेगी। हिंदी का तकनीकी सामर्थ्य बढ़ रहा है। जल्द यह प्रमाणित कर देगी कि कोई भी ज्ञान या कार्य ऐसा नहीं है, जो हिंदी में संभव न हो। नई शिक्षा नीति ने हिंदी के लिए प्रगति के सारे द्वार खोल दिए हैं। विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि वाली भाषा हिंदी का कल स्वर्णिम होगा।
बाजार की भाषा के रूप में विकसित हुई हिंदी
हिंदी पहले संप्रेषण की भाषा, फिर साहित्य व कार्यालयीय भाषा के रूप में अग्रसित हुई। अब तकनीकी भाषा के रूप में विकसित हो गई है। आज इंटरनेट पर लेखन का दौर आने से इसके स्वरूप एवं महत्व में अनेकों परिवर्तन आ गए हैं। विदेशों में हिंदी शिक्षण की बात हो या हिंदी अनुवाद या पत्रकारिता हो, हिंदी को बाजार की भाषा के रूप में विकसित कर दिया है। - डॉ. रणजीत भारती, शिक्षक, भाषा विज्ञान विभाग, केएमआई, विवि
तकनीकी ने भी हिंदी को आगे बढ़ाया
सेंट जोंस कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता शर्मा ने कहा कि हिंदी बहुत प्राचीन और समृद्ध भाषा थी और रहेगी। रामायण और महाभारत तथा अनेक पौराणिक कथाएं और शौर्य की गाथाएं प्राचीन काल से प्रचलित हैं, जो इस बात की पूरक हैं कि हिंदी का अतीत बेहद गौरवशाली और भव्य रहा है। वर्तमान युग वैज्ञानिक युग हैं जिसमें कंप्यूटर का बोलबाला हैं। आज के युग में वेबसाइट का चलन बढ़ रहा है, तकनीकी ने हिंदी को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
विदेश में तेजी से लोकप्रिय हो रही
आगरा कॉलेज के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि विदेशों में हिंदी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। इससे वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रति रुझान बढ़ा है। देश में आज की युवा पीढ़ी हिंदी को समझ और बोल रही है। समस्या हिंदी लिखने में आ रही है। इंटरनेट पर युवा हिंदी को रोमन लिपि में लिख रहे हैं। लेखन में सुधार के लिए यूपी बोर्ड के साथ अन्य बोर्ड में हिंदी के साथ संस्कृत पढ़ाया जाना चाहिए।
रोजी-रोटी की भाषा बनानी होगी
सेंट जोंस कॉलेज के हिंदी विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. मधुरिमा शर्मा ने कहा कि हिंदी देश के एक बड़े भूभाग में बोली, समझी व पढ़ी जाती है। देश के बाहर भी हिंदी तेजी से बढ़ रही है। शासन और प्रशासन स्तर हिंदी का दायरा बढ़ा है, पर अभी वह सिरमौर नहीं बन पाई है। हिंदी के कल को सुधारना है तो रोजी-रोटी और प्रशासन की भाषा हिंदी को ही बनाना पड़ेगा। हिंदी को सम्मान की भाषा समझना और मानना होगा, तभी इसका कल अच्छा होगा।
विदेश में तेजी से लोकप्रिय हो रही
आगरा कॉलेज के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि विदेशों में हिंदी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। इससे वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रति रुझान बढ़ा है। देश में आज की युवा पीढ़ी हिंदी को समझ और बोल रही है। समस्या हिंदी लिखने में आ रही है। इंटरनेट पर युवा हिंदी को रोमन लिपि में लिख रहे हैं। लेखन में सुधार के लिए यूपी बोर्ड के साथ अन्य बोर्ड में हिंदी के साथ संस्कृत पढ़ाया जाना चाहिए।
रोजी-रोटी की भाषा बनानी होगी
सेंट जोंस कॉलेज के हिंदी विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. मधुरिमा शर्मा ने कहा कि हिंदी देश के एक बड़े भूभाग में बोली, समझी व पढ़ी जाती है। देश के बाहर भी हिंदी तेजी से बढ़ रही है। शासन और प्रशासन स्तर हिंदी का दायरा बढ़ा है, पर अभी वह सिरमौर नहीं बन पाई है। हिंदी के कल को सुधारना है तो रोजी-रोटी और प्रशासन की भाषा हिंदी को ही बनाना पड़ेगा। हिंदी को सम्मान की भाषा समझना और मानना होगा, तभी इसका कल अच्छा होगा।
आने वाला समय हिंदी का होगा
आरबीएस कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. युवराज सिंह ने कहा कि अमर उजाला का हिंदी हैं हम अभियान सराहनीय है। हिंदी भाषा के आज और कल के लिए दृढ़ इच्छा शक्ति, सिद्धांत और व्यवहार में एकरूपता की जरूरत है। राजनीतिक स्वार्थ, क्षेत्रीयता की भावना से ऊपर उठकर जिस दिन हम हिंदी भाषा को राष्ट्र के गौरव और स्वाभिमान से जोड़ देंगे, उस दिन हिंदी भाषा अपने खोए हुए गौरव को प्राप्त कर लेगी। निश्चित ही आने वाला समय हिंदी का होगा।
पीएम ने विश्व मंच पर हिंदी को स्थापित किया
सेंट जोंस कॉलेज के हिंदी भाषा विद् के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीभगवान शर्मा का कहना है कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय हिंदी संपूर्ण भारत की एक मात्र भाषा थी। बाद में मैकाले संस्कृति से प्रभावित देशवासियों ने अपना भविष्य अंग्रेजी में देखा, परिणाम स्वरूप शहर से लेकर गांव तक कान्वेंट स्कूलों का बोलबाला हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व मंच पर हिंदी को स्थापित किया है। बहु राष्ट्रीय कंपनियां विज्ञापन के लिए हिंदी को आधार बना रही हैं। हिंदी भविष्य में विश्व की सर्वश्रेष्ठ विज्ञान सम्मत भाषा होगी।
बाजारवाद से प्रभावित हुई हिंदी
दयालबाग शिक्षण संस्थान में हिंदी की शोध छात्रा सदफ इश्त्याक ने कहा कि वर्तमान में हिंदी अपने अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यर्ता के लिए प्रत्यत्नशील है। हिंदी भाषा भी बाजारवाद से प्रभावित हुई है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को हिंदी से भले ही लगाव न हो, पर बाजार की शक्ति के माध्यम से तमाम कंपनियों का भविष्य हिंदी पर टिका है। वैश्विक दृष्टिकोण से हिंदी का भविष्य स्वर्णित दिख रहा है। आने वाले समय में यह विश्व समुदाय को अपनी महक से सुशोभित करेगी।
पीएम ने विश्व मंच पर हिंदी को स्थापित किया
सेंट जोंस कॉलेज के हिंदी भाषा विद् के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीभगवान शर्मा का कहना है कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय हिंदी संपूर्ण भारत की एक मात्र भाषा थी। बाद में मैकाले संस्कृति से प्रभावित देशवासियों ने अपना भविष्य अंग्रेजी में देखा, परिणाम स्वरूप शहर से लेकर गांव तक कान्वेंट स्कूलों का बोलबाला हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व मंच पर हिंदी को स्थापित किया है। बहु राष्ट्रीय कंपनियां विज्ञापन के लिए हिंदी को आधार बना रही हैं। हिंदी भविष्य में विश्व की सर्वश्रेष्ठ विज्ञान सम्मत भाषा होगी।
बाजारवाद से प्रभावित हुई हिंदी
दयालबाग शिक्षण संस्थान में हिंदी की शोध छात्रा सदफ इश्त्याक ने कहा कि वर्तमान में हिंदी अपने अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यर्ता के लिए प्रत्यत्नशील है। हिंदी भाषा भी बाजारवाद से प्रभावित हुई है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को हिंदी से भले ही लगाव न हो, पर बाजार की शक्ति के माध्यम से तमाम कंपनियों का भविष्य हिंदी पर टिका है। वैश्विक दृष्टिकोण से हिंदी का भविष्य स्वर्णित दिख रहा है। आने वाले समय में यह विश्व समुदाय को अपनी महक से सुशोभित करेगी।