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सावन माह की शिवरात्रि आजः इस तरह करें भगवान शिव की आराधना, दूर होंगे सारे कष्ट
Tue, 30 Jul 2019 09:24 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 30 Jul 2019 09:24 AM IST
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भगवान शिव
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सावन माह की आज शिवरात्रि है। शिवरात्रि पर विधिविधान से की गई पूजा अर्चना से भगवान शिव प्रसन्न होकर शीघ्र ही मनोकामना पूर्ण कर देते हैं।
विजय नगर निवासी ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के अनुसार मंगलवार को सावन माह की शिवरात्रि है।
महाशिवपुराण में शिवरात्रि का विशेष महत्व बताया है, जिसमें कहा गया है कि सावन माह की शिवरात्रि को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय एवं नंदी के साथ पृथ्वी पर विराजमान होते हैं। इस दिन जो भक्त विधिवत साधना करते हैं तो उनके सभी कष्ट दूर होने के साथ साथ मनोकामना भी पूर्ण होती है।
महामृत्युजय मंत्र का करें जाम
शिवरात्रि के दिन शिवभक्तों को महामृत्युंजय मंत्र का जाम करें। इससे भोलेनाथ भक्तों की रक्षा करते हैं। भोले नाथ पालन पोषण भी करते हैं। इतना ही नहीं वह सूक्ष्म तत्व के रूप में योगियों और साधकों एवं जीवात्माओं में विराजमान भी होते हैं।
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विजय नगर निवासी ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के अनुसार मंगलवार को सावन माह की शिवरात्रि है।
महाशिवपुराण में शिवरात्रि का विशेष महत्व बताया है, जिसमें कहा गया है कि सावन माह की शिवरात्रि को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय एवं नंदी के साथ पृथ्वी पर विराजमान होते हैं। इस दिन जो भक्त विधिवत साधना करते हैं तो उनके सभी कष्ट दूर होने के साथ साथ मनोकामना भी पूर्ण होती है।
महामृत्युजय मंत्र का करें जाम
शिवरात्रि के दिन शिवभक्तों को महामृत्युंजय मंत्र का जाम करें। इससे भोलेनाथ भक्तों की रक्षा करते हैं। भोले नाथ पालन पोषण भी करते हैं। इतना ही नहीं वह सूक्ष्म तत्व के रूप में योगियों और साधकों एवं जीवात्माओं में विराजमान भी होते हैं।
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इस तरह करें पूजा
सांसारिक कष्टों से दूर होने के लिए भगवान शिव को गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। बेलपत्र, चंदन, पुष्प माला, धूप दीप, नैवेध से पूजन करें। ऊं नम: शिवाय, ऊं नमों भगवते रूद्राय मंत्र का जाप करें।
सांसारिक कष्टों से दूर होने के लिए भगवान शिव को गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। बेलपत्र, चंदन, पुष्प माला, धूप दीप, नैवेध से पूजन करें। ऊं नम: शिवाय, ऊं नमों भगवते रूद्राय मंत्र का जाप करें।