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आगरा: जिंदगी की भागदौड़ में 'गुम' हुए सावन के गीत-मल्हार, नहीं दिखते हवा से बातें करतीं झूलें की उड़ानें

Wed, 28 Jul 2021 11:46 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 28 Jul 2021 11:46 AM IST
सार

किसी घर में झूले की रस्सी तैयार की जाती थी, तो कॉलोनी के लोग जिस पेड़ पर झूला बंधते थे, उस पेड़ की मजबूती की परीक्षा लेते थे। सविता कहती हैं कि सावन आते ही झूलों पर झूलने की यादें हर साल बीते कल में ले जाती हैं। 

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Sawan ke Jhule Aur Geat Malhar
झूला झूलती युवती का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

विस्तार

जिंदगी की भागदौड़ और व्यस्तताओं के बीच सावन की मस्ती कहीं गुम हो गई है। शहर तो दूर अब गांवों में भी मल्हार सुनाई नहीं देते। पेड़ों पर पड़े झूले और उन पर पींग बढ़ाती युवतियों-महिलाओं वाले दृश्य अब विरासत बनते जा रहे हैं। 

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ईदगाह कॉलोनी, मोहनपुरा की रहने वाली सविता चतुर्वेदी का कहना है कि सावन आने से पहले घरों और कॉलोनियों का माहौल बदलना शुरू हो जाता था। किसी घर में झूले की रस्सी तैयार की जाती थी, तो कॉलोनी के लोग जिस पेड़ पर झूला बंधते थे, उस पेड़ की मजबूती की परीक्षा लेते थे। सविता कहती हैं कि सावन आते ही झूलों पर झूलने की यादें हर साल बीते कल में ले जाती हैं। 
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इन बातों का रखें ध्यान 
सावन के महीने में लगने वाले झूले भले ही कम हो गए हों, पर श्रावण के महीने में चली आ रही दूसरी परंपराओं को कई परिवार आज भी निभा रहे हैं। भागवताचार्य सुभाष चंद्र शास्त्री बताते बताते हैं कि सावन में कौन-कौन से चीजें घर लाना शुभ रहता है। 
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.  त्रिशूल लाना चाहिए जो बुरी बलाओं से बचाने का काम करता है। 
. रुद्राक्ष घर में लाने से सुख और शांति का प्रवेश होता है। 
. डमरू की ध्वनी से नकारात्मक शक्तियों का विनाश होता है।  
. भगवान शिव के साथ नंदी का पूजन करने से आर्थिक संकट समाप्त होता है। 
. भगवान शिव को जल बहुत प्रिय है। इसीलिए चांदी, तांबा या पीतल का पात्र लाकर जल अर्पित करना चाहिए। 

- इस तरह का भोजन करें: 
. हल्का और शीघ्र पचने वाला भोजन करें। 
. श्रावण मास में दूध वर्जित बताया गया है। 
. प्रतिदिन छिलके वाली मूंग की दाल का सेवन करें।
मन सावन हो उठता है
सावन आते ही झूले की याद आते ही मन सावन हो उठता है। पिछले कई वर्षों में जीवन की व्यवस्तता के चलते अब झूले दिखाई नहीं देते हैं। लोगों के पास समय नहीं बचा है। - अनीता धवन, मोती कटरा 
नहीं सुनाई देते मल्हार
मल्हार अब सुनाई नहीं देते। सावन आते ही कॉलोनी की महिलाएं किसी एक घर में एकत्रित होकर सावन की गीत गाती थीं। सावन पर काव्य की बहने वाली रसधार भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है।  - लवनील नागिया, फतेहाबाद मार्ग
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