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मथुरा: ज्वलनशील पदार्थ के कारण रोडवेज की बस में लगी थी आग, जिंदा जल गए थे एक कंपनी के जीएम

Wed, 16 Feb 2022 05:37 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 16 Feb 2022 05:37 PM IST
सार

मथुरा के पुराने बस अड्डे पर सोमवार शाम को रोडवेज की एक बस में अचानक आग लग गई थी, जिसमें एक यात्री की जलकर मौत हो गई। मंगलवार को मृतक की शिनाख्त तोशिबा कंपनी के जीएम के रूप में हुई। इस हादसे की जांच में सामने आया है कि ज्वलनशील पदार्थ के कारण आग लगी थी। 

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Roadways bus caught fire due to flammable material in mathura
रोडवेज बस में लगी आग (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा के पुराने बस अड्डे में सोमवार रात में बस में लगी भीषण आग का कारण ज्वलनशील पदार्थ सोल्यूशन बताया जा रहा है। परिवहन निगम के एआरएम नरेश चंद गुप्ता ने बताया कि जांच में यह तथ्य सामने आया है। बताया जा रहा है कि सोल्यूशन का उपयोग रबड़ की चीजों को चिपकाने में किया जाता है। जूते-चप्पल चिपकाने और पंक्चर जोड़ने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा बस में पेंट व थिनर भी रखा था। 

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प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक स्कूटी सवार युवक ने अलीगढ़ से आई इस बस में चालक और परिचालक की मदद से सोल्यूशन की केन को बस के बोनट पर रखवाया था। अलीगढ़ से उसी समय आई बस का बोनट गर्म होने के कारण उसमें से आवाज आने लगी। इस पर उसे नीचे धकेल दिया। इससे बोतल का ढक्कन खुल गया और सोल्यूशन बस में फैलने लगा। एआरएम ने बताया कि शॉर्ट सर्किट से निकली चिंगारी की जद में सोल्यूशन आने से आग ने विकराल रूप ले लिया। 
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आग के कारण बस में फंसे तोशिबा कंपनी के जीएम शैलेश उपाध्याय (52) निवासी भिलाई, छत्तीसगढ़ जिंदा जल गए थे। मंगलवार को उनकी शिनाख्त हुई। शैलेश अपने भांजे रुद्राक्ष के जनेऊ संस्कार में शामिल होने वृंदावन आए थे। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद वह अलीगढ़ जाने के लिए मथुरा के पुराने बस अड्डे पहुंचे। यहां बुद्ध विहार डिपो की अनुबंधित बस में सवार हो गए। बस में आग लगने पर वह निकल नहीं पाए, जिससे जलकर उनकी मौत हो गई। 

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चालक-परिचालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा 

बुद्ध विहार डिपो की अनुबंधित बस में लगी आग के मामले में स्टेशन प्रभारी प्रेम सिंह ने चालक तेजवीर सिंह और परिचालक सुरेश के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। आग लगने के बाद फरार हो चुके दोनों की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। 

शहर कोतवाल विजय कुमार सिंह ने बताया कि गैर इरादतन हत्या(आईपीसी की धारा 304) और ज्वलनशील पदार्थ(आईपीसी की धारा-285) में मुकदमा दर्ज हो गया है। जल्द ही चालक और परिचालक को गिरफ्तार किया जाएगा। फिलहाल दोनों की तलाश में अलीगढ़ में दबिश दी जा रही हैं।

बस में लगी आग से जिंदा जलकर मरने की खबर पर अलीगढ़ परिवहन निगम के अफसर मथुरा पहुंच गए। अलीगढ़ के आरएम परवेज, एसएम विनोद कुमार और बुद्ध विहार डिपो के एआरएम योगेंद्र पाल सिंह भी पुराने बस अड्डे पहुंचे। यहां पर मामले की पूरी जानकारी जुटाई। मामले की पूरी रिपोर्ट आगरा के आरएम मनोज पुंढीर को भी भेजी है।

15 बसों की हालत बदतर, फिर भी दौड़ रहीं

मथुरा डिपो की 84 बसें और 37 अनुबंधित बसें हैं। इनमें केवल छह बसें 10 साल से कम अवधि की है, जबकि 74 बसें 12 से 15 साल पुरानी हैं। इनमें 15 बसों की हालत तो बदतर हो रही है। फिर भी बसों को दौड़ाया जा रहा है। परिवहन निगम को सवारियों की जान की कतई चिंता नहीं है। यह बसें ऐसी हैं कि रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। ऐसा कई बार हो भी चुका है। 

उसके बाद इन कंडम बसों को मार्गों से हटाया तक नहीं गया है। एआरएम नरेश चंद गुप्ता ने बताया कि बसों की स्थिति खराब नहीं है। समय-समय पर इन बसों को वर्कशॉप में दुरुस्त करा लिया जाता है। अनुबंधित बसों का रख-रखाव उसके मालिक करते हैं। समय-समय पर इन बसों की हालत वह खुद भी चेक करते हैं।

बसों में नहीं है अग्निशमन यंत्र

परिवहन निगम की या अनुबंधित बसों में अग्निशमन यंत्र तक नहीं है। अगर हैं भी तो यह काम नहीं करते हैं। ऐसा ही कुछ पुराने बस अड्डे पर बस में लगी आग के बाद हुआ। बस में लगा अग्निशमन यंत्र ने काम नहीं किया। इसके अलावा फर्स्ट एड बॉक्स भी इन बसों में नहीं होता है, जबकि यह होना जरूरी है। परिवहन निगम  की बसों में यह कहीं भी नहीं मिलता है। 

फिटनेस प्रमाण पत्र से लेने से पहले इन बसों में यह सभी जरूरत की चीजें उपलब्ध रहती हैं। उसके बाद यह गायब हो जाती हैं। खासकर एआरटीओ कार्यालय से इन बसों को बिना देखे भी इन्हें फिटनेस प्रमाण पत्र भी दे दिया जाता है। इसमें एआरटीओ कार्यालय की लापरवाही भी साफ दिखती है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रमोद शर्मा ने बताया कि एआरटीओ को कई बार इन बसों को चेक करने के लिए वह पत्र लिख चुके हैं। अग्निशमन यंत्र आदि कमियां पूरी न होने पर इन्हें फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं दिया जाए। 

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