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राम की बरात में झूमकर नाचे हनुमान
राम की बरात में झूमकर नाचे हनुमान
Updated Tue, 27 Sep 2016 12:39 AM IST
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राम की बरात में झूमकर नाचे हनुमान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भगवान श्रीराम की बरात में इस बार रोड शो की धूम रही। एक साथ कई मंडलियों ने रोड शो किया। जैसे ही इन कलाकारों का जत्था आता, हर कोई इन्हें देखने रुक जाता। राम की बरात में झूमकर नाचते हनुमान सभी के आकर्षण का केंद्र रहे तो शिव के गणों ने भी लोगों को खूब लुभाया।
राम बरात में इस बार हनुमान की मंडली का भी रोड शो हुआ। बाल हनुमान, किशोर हनुमान, युवा हनुमान और वृद्ध हनुमान गदा लिए नाचते हुए चल रहे थे। हनुमान के स्वरूपों के बड़े जत्थे को देखकर हर कोई आनंदित था। इसके साथ ही शिव-पार्वती की झांकी थी, जहां एक वाहन पर शिव और पार्वती नृत्य करते हुए चल रहे थे तो नीचे शिव के गण, भूत, पलीत भंग के नशे में मदमस्त नाच रहे थे। बृज की लीलाओं का प्रदर्शन भी बरात में हुआ। इसमें कलाकार बरसाने की होली, मयूर नृत्य करते चल रहे थे। होली खेलन आयो श्याम... बरसाने में आए जइयो बुलाई गई राधा प्यारी... आदि गीतों पर नृत्य कर रहे थे। हमेशा की तरह ढोल की थाप पर तलवारबाजी करते हुए अखाड़े भी चल रहे थेे। इसके अलावा यमुना बचाओ, बेटी बचाओ का संदेश देते हुई भी कई झांकियां शामिल थीं।
दूर दराज से आए प्रभु राम की बरात देखने
आगरा। टीवी, कंप्यूटर के युग में भी भगवान राम की बरात का आकर्षण कम नहीं हुआ है। बरात में बच्चे, युवक और वृद्ध सभी का जोश देखने लायक था। शहर से ही नहीं ग्रामीण अंचल से भी लोगों का जमावड़ा था। हजारों की संख्या में लोग दिन में ही पहुंच गए थे। लोगों ने बाजारों में खरीददारी की और रात को भगवान राम की बरात में शामिल हुए। यहीं नहीं आगरा से बाहर से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कानपुर निवासी राजेंद्र बंसल ने बताया कि आगरा में उनके रिश्तेदार हैं। पिछले करीब 12 वर्ष से हर वर्ष राम बरात देखने आ रहे हैं। भरतपुर निवासी राम किशन ने बताया कि कई वर्षों से आ रहे हैं। इस वर्ष अपने बच्चों को भी लाए हैं। यह अद्भुत कार्यक्रम है।
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सोमवार को भी खुले बाजार
आगरा। साप्ताहिक बंदी के बावजूद राम बरात मार्ग के बाजार खुले और जबरदस्त रौकन थी। श्रीराम लीला कमेटी ने व्यापारियों से अपील की थी, सोमवार को बाजार बंद न रखें। बाजार बंद रहे तो राम बरात का आकर्षण तो कम होगा ही दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी होगी। प्रशासन ने भी कमेटी की मांग का समर्थन करते हुए बाजार बंदी से राहत दी थी। इसका असर यह हुआ कि पूरा बाजार खुला था। सुभाष बाजार, जौहरी बाजार, किनारी बाजार, रावत पाड़ा, दरेसी सहित आसपास के बाजारों में दिन भर रौनक रही।
छतों से बरस रहे थे पुष्प
आगरा। प्रभु राम की बरात को देखने के लिए शोभायात्रा में पैर रखने तक को जगह नहीं थी। दुकानों के आगे लोग बैठे थे, सड़कों के किनारे खड़े थे। छतों पर लोगों का हुजूम था। लोगों के दूर दराज से उनके मेहमान भी राम बरात देखने के लिए आए हुए थे। जैसे ही सवारी उनके घर, प्रतिष्ठान के पास आती है महिलाएं पुष्प वर्षा करतीं।
बग्घी पर सवार थे राजा दशरथ
आगारा। मुख्य आकर्षण रजत रथ था। इस पर मां लक्ष्मीजी भगवान विष्णु के साथ विराजमान थीं। बिहारीजी की झांकी के बाद महाराजा राजा दशरथ (सुनील अग्रवाल परिवार सहित) सवार थे। उनके पीछे मंत्री सुमंत की बग्गी थी। मुनि विश्वामित्र व वशिष्ठ की संयुक्त सवार बग्गी पर झांकी थीं।
हर सवारी के आगे बैंड
आगरा। सूर्यवंशी राजकुमार शत्रुघ्न के आगे सुधीर बैंड, राजकुमार भरत के आगे प्रह्लाद बैंड, लक्ष्मण के आगे मिलन बैंड, प्रभु श्रीराम के आगे जगदीश बैंड के कलाकार मधुर ध्वनि बिखरते हुए चल रहे थे। अन्य बैंडों में कुमार, चावला, श्रीजी, मोहन, शिवम, फौलाद एवं आनंदा बैंड सहित आदि झांकियों के आगे चल रहे थे।
जिधर देखो उधर झांकियां
आगरा। प्रभु श्रीराम की बरात में भव्य एवं मनमोहक झांकियों का लंबा सिलसिला था। मुख्य झांकियों में सीता हरण, गो-हत्या, शबरी बेर खिलाते हुए, शिवलिंग लेकर उड़ता रावण, गोवर्धन की परिक्रम, देवी जी के नौ रूप, पर्यावरण एवं जल पर, शिव सेना की झांकी, नंदोत्सव, राधा-कृष्ण पानी के फव्वारे पर नृत्य करते हुए, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, नदी अस्तित्व बचाओ, यमुना शुद्धिकरण, पशु हत्या, शराब न पीने की झांकी, गंगा अवतरण, नौका विहार, सुदामा चरित्र, समुद्र मंथन, काली माता का नृत्य, घटोतकच्छ का कर्ण के साथ युद्ध, भंगड़ा, गणेश जी डांडिया खेलते हुए। कृष्ण-अर्जुन रथ, घोड़ा बैंड, कदम के पेड़ के नीचे कृष्ण भगवान, महारास, फूलों की बांके बिहारी की झांकी सहित लगभग 120 झांकियां थीं।
पहली बार शामिल हुई झूलेलाल की झांकी
सिंधु सेना की ओर से पहली बार रामबरात में झूलेलाल की झांकी शामिल की है। यह झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही। रावतपाड़ा तिराहे पर आरती के बाद झांकी को शामिल किया। सिंधु सेना के अध्यक्ष जयप्रकाश धर्माणी, जितेंद्र त्रिलोकानी, देवानंद फेरवानी, संजय हिंगरानी, हेमंत भोजवानी, अशोक पारवानी श्याम भोजवानी, सुनील कर्मचंदानी आदि शामिल।
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राम बरात में इस बार हनुमान की मंडली का भी रोड शो हुआ। बाल हनुमान, किशोर हनुमान, युवा हनुमान और वृद्ध हनुमान गदा लिए नाचते हुए चल रहे थे। हनुमान के स्वरूपों के बड़े जत्थे को देखकर हर कोई आनंदित था। इसके साथ ही शिव-पार्वती की झांकी थी, जहां एक वाहन पर शिव और पार्वती नृत्य करते हुए चल रहे थे तो नीचे शिव के गण, भूत, पलीत भंग के नशे में मदमस्त नाच रहे थे। बृज की लीलाओं का प्रदर्शन भी बरात में हुआ। इसमें कलाकार बरसाने की होली, मयूर नृत्य करते चल रहे थे। होली खेलन आयो श्याम... बरसाने में आए जइयो बुलाई गई राधा प्यारी... आदि गीतों पर नृत्य कर रहे थे। हमेशा की तरह ढोल की थाप पर तलवारबाजी करते हुए अखाड़े भी चल रहे थेे। इसके अलावा यमुना बचाओ, बेटी बचाओ का संदेश देते हुई भी कई झांकियां शामिल थीं।
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दूर दराज से आए प्रभु राम की बरात देखने
आगरा। टीवी, कंप्यूटर के युग में भी भगवान राम की बरात का आकर्षण कम नहीं हुआ है। बरात में बच्चे, युवक और वृद्ध सभी का जोश देखने लायक था। शहर से ही नहीं ग्रामीण अंचल से भी लोगों का जमावड़ा था। हजारों की संख्या में लोग दिन में ही पहुंच गए थे। लोगों ने बाजारों में खरीददारी की और रात को भगवान राम की बरात में शामिल हुए। यहीं नहीं आगरा से बाहर से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कानपुर निवासी राजेंद्र बंसल ने बताया कि आगरा में उनके रिश्तेदार हैं। पिछले करीब 12 वर्ष से हर वर्ष राम बरात देखने आ रहे हैं। भरतपुर निवासी राम किशन ने बताया कि कई वर्षों से आ रहे हैं। इस वर्ष अपने बच्चों को भी लाए हैं। यह अद्भुत कार्यक्रम है।
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सोमवार को भी खुले बाजार
आगरा। साप्ताहिक बंदी के बावजूद राम बरात मार्ग के बाजार खुले और जबरदस्त रौकन थी। श्रीराम लीला कमेटी ने व्यापारियों से अपील की थी, सोमवार को बाजार बंद न रखें। बाजार बंद रहे तो राम बरात का आकर्षण तो कम होगा ही दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी होगी। प्रशासन ने भी कमेटी की मांग का समर्थन करते हुए बाजार बंदी से राहत दी थी। इसका असर यह हुआ कि पूरा बाजार खुला था। सुभाष बाजार, जौहरी बाजार, किनारी बाजार, रावत पाड़ा, दरेसी सहित आसपास के बाजारों में दिन भर रौनक रही।
छतों से बरस रहे थे पुष्प
आगरा। प्रभु राम की बरात को देखने के लिए शोभायात्रा में पैर रखने तक को जगह नहीं थी। दुकानों के आगे लोग बैठे थे, सड़कों के किनारे खड़े थे। छतों पर लोगों का हुजूम था। लोगों के दूर दराज से उनके मेहमान भी राम बरात देखने के लिए आए हुए थे। जैसे ही सवारी उनके घर, प्रतिष्ठान के पास आती है महिलाएं पुष्प वर्षा करतीं।
बग्घी पर सवार थे राजा दशरथ
आगारा। मुख्य आकर्षण रजत रथ था। इस पर मां लक्ष्मीजी भगवान विष्णु के साथ विराजमान थीं। बिहारीजी की झांकी के बाद महाराजा राजा दशरथ (सुनील अग्रवाल परिवार सहित) सवार थे। उनके पीछे मंत्री सुमंत की बग्गी थी। मुनि विश्वामित्र व वशिष्ठ की संयुक्त सवार बग्गी पर झांकी थीं।
हर सवारी के आगे बैंड
आगरा। सूर्यवंशी राजकुमार शत्रुघ्न के आगे सुधीर बैंड, राजकुमार भरत के आगे प्रह्लाद बैंड, लक्ष्मण के आगे मिलन बैंड, प्रभु श्रीराम के आगे जगदीश बैंड के कलाकार मधुर ध्वनि बिखरते हुए चल रहे थे। अन्य बैंडों में कुमार, चावला, श्रीजी, मोहन, शिवम, फौलाद एवं आनंदा बैंड सहित आदि झांकियों के आगे चल रहे थे।
जिधर देखो उधर झांकियां
आगरा। प्रभु श्रीराम की बरात में भव्य एवं मनमोहक झांकियों का लंबा सिलसिला था। मुख्य झांकियों में सीता हरण, गो-हत्या, शबरी बेर खिलाते हुए, शिवलिंग लेकर उड़ता रावण, गोवर्धन की परिक्रम, देवी जी के नौ रूप, पर्यावरण एवं जल पर, शिव सेना की झांकी, नंदोत्सव, राधा-कृष्ण पानी के फव्वारे पर नृत्य करते हुए, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, नदी अस्तित्व बचाओ, यमुना शुद्धिकरण, पशु हत्या, शराब न पीने की झांकी, गंगा अवतरण, नौका विहार, सुदामा चरित्र, समुद्र मंथन, काली माता का नृत्य, घटोतकच्छ का कर्ण के साथ युद्ध, भंगड़ा, गणेश जी डांडिया खेलते हुए। कृष्ण-अर्जुन रथ, घोड़ा बैंड, कदम के पेड़ के नीचे कृष्ण भगवान, महारास, फूलों की बांके बिहारी की झांकी सहित लगभग 120 झांकियां थीं।
पहली बार शामिल हुई झूलेलाल की झांकी
सिंधु सेना की ओर से पहली बार रामबरात में झूलेलाल की झांकी शामिल की है। यह झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही। रावतपाड़ा तिराहे पर आरती के बाद झांकी को शामिल किया। सिंधु सेना के अध्यक्ष जयप्रकाश धर्माणी, जितेंद्र त्रिलोकानी, देवानंद फेरवानी, संजय हिंगरानी, हेमंत भोजवानी, अशोक पारवानी श्याम भोजवानी, सुनील कर्मचंदानी आदि शामिल।