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लॉकडाउन में रमजानः रुहानी ताकत देते हैं रोजे, कड़े इम्तिहान में बढ़ेगा रोजेदारों का आत्मविश्वास
Sun, 19 Apr 2020 02:24 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 19 Apr 2020 02:24 PM IST
सार
इस बार लॉकडाउन में रखे जाएंगे आठ या नौ रोजे
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुकद्दस रमजान की शुरुआत इस बार लॉकडाउन में होगी। पहले आठ या नौ रोजे तो लॉकडाउन में ही रखे जाएंगे। ऐसे में रोजेदारों का इम्तिहान और कड़ा होगा। मुकद्दस रमजान का महीना चांद दिखने पर 24 या 25 अप्रैल से शुरू होगा।
रमजान शुरू होने पर रोजेदारों का उत्साह कई गुना बढ़ जाता है। तीन मई तक दूसरा लॉकडाउन चलेगा। इन दिनों खानपान की चीजें आसानी से मुहैया नहीं हो पा रहीं हैं। ऐसे में सेवईं, टोस्ट, बिस्कुट, दूध-फैनी वगैरह सहरी में ली जाती हैं। रोजा खुलने पर विभिन्न तरह के लजीज पकवान बनाए जाते हैं।
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रमजान शुरू होने पर रोजेदारों का उत्साह कई गुना बढ़ जाता है। तीन मई तक दूसरा लॉकडाउन चलेगा। इन दिनों खानपान की चीजें आसानी से मुहैया नहीं हो पा रहीं हैं। ऐसे में सेवईं, टोस्ट, बिस्कुट, दूध-फैनी वगैरह सहरी में ली जाती हैं। रोजा खुलने पर विभिन्न तरह के लजीज पकवान बनाए जाते हैं।
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रुहानी ताकत देते हैं रोजे
रोजेदार को सबसे पहले रोजे की नीयत बांधनी होती है। रोजा रखने का मकसद पूरे माह अपनी इंद्रियों को वश में रखना है। किसी भी तरह की बुराई से दूर रहना है। लॉकडाउन में रोजेदार को पूरे समय घर पर रहकर इबादत करने का मौका मिलेगा। दिक्कतों से आत्मविश्वास बढ़ेगा। -समी आगाई, अध्यक्ष, भारतीय मुस्लिम विकास परिषद
पौष्टिक भोजन के कारण रोजेदारों की इम्युनिटी कम नहीं होती
रमजान में रोजेदार में खुद ब खुद ही ताकत आ जाती है। उन्हें किसी तरह की बंदिशों से कोई सरोकार नहीं होता है। ऐसे में रोजा लंबा हो या छोटा। गर्मी हो या बरसात। यह सब सहने की ताकत परवरदिगार देता है। -सैयद इरफान सलीम, अध्यक्ष, सर्वदलीय मुस्लिम एक्शन कमेटी
रोजेदार को सबसे पहले रोजे की नीयत बांधनी होती है। रोजा रखने का मकसद पूरे माह अपनी इंद्रियों को वश में रखना है। किसी भी तरह की बुराई से दूर रहना है। लॉकडाउन में रोजेदार को पूरे समय घर पर रहकर इबादत करने का मौका मिलेगा। दिक्कतों से आत्मविश्वास बढ़ेगा। -समी आगाई, अध्यक्ष, भारतीय मुस्लिम विकास परिषद
पौष्टिक भोजन के कारण रोजेदारों की इम्युनिटी कम नहीं होती
रमजान में रोजेदार में खुद ब खुद ही ताकत आ जाती है। उन्हें किसी तरह की बंदिशों से कोई सरोकार नहीं होता है। ऐसे में रोजा लंबा हो या छोटा। गर्मी हो या बरसात। यह सब सहने की ताकत परवरदिगार देता है। -सैयद इरफान सलीम, अध्यक्ष, सर्वदलीय मुस्लिम एक्शन कमेटी