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Mathura: राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को लेकर क्या है भाजपा का संदेश? जानें क्या बोले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

Tue, 28 Jun 2022 12:11 AM IST
धीरेन्द्र सिंह एसएस अवस्थी, मथुरा
एसएस अवस्थी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 28 Jun 2022 12:11 AM IST
सार

वृंदावन आए राष्ट्रपति ने बेसहारा महिलाओं के दर्द पर मरहम लगाने का काम किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि द्रौपदी मुर्मू  को अगले राष्ट्रपति के लिए आगे लाकर भाजपा बड़ा संदेश दे चुकी है।

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वृंदावन आए राष्ट्रपति ने विधवा व बेसहारा महिलाओं से मुलाकात कर उनका दर्द समझा और कहा देश में विधवाओं को एक अभिशाप की तरह देखा जाता है। यह बर्दाश्त के काबिल नहीं है। विधवाओं को पूरा सम्मान मिलना चाहिए। इस संदेश को तो भाजपा ने पहले ही पूरा कर दिया। अगले राष्ट्रपति के लिए आदिवासी विधवा द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बनाकर समाज में संदेश दिया है कि दबी कुचली महिलाओं को भाजपा ही मरहम लगा सकती है।

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दरअसल, भाजपा की जो भी रणनीति है, वह आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर ही बन रही है। राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में द्रौपदी मुर्मू को आगे लाकर एक तीर से कई निशाने किए हैं। विपक्षियों को बोलने का मौका भी नहीं दिया और कई दल समर्थन कर रहे हैं। विरोध करने वाला कोई सामने नहीं आया। सोमवार को जब राष्ट्रपति वृंदावन पहुंचे तो उन्होंने ठाकुरजी के दर्शन के साथ ही कृष्णा कुटीर आश्रय स्थल जाना उचित समझा, जहां पर विधवा व बेसहारा महिलाओं को सहारा मिला हुआ है। निर्धारित समय से अधिक वहां रुककर उनका दुखदर्द सुना और समाज में व्याप्त बुराइयों पर सीधा हमला भी बोला। इसे बदलने के लिए उन्होंने लोगों से आह्वान भी किया। उन्होंने एक तरह से भाजपा के संदेश को आगे बढ़ाने का काम किया है।

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भाजपा के लिए मुर्मू जैसी महिलाएं ही रॉल मॉडल हैं

वर्ष 1997 से उड़ीसा की राजनीति में उतरीं मुर्मू ने भाजपा ज्वाइन की। पहले वह नगर पंचायत की काउंसिलर चुनीं गईं। इसके बाद दो बार विधायक बनीं। वर्ष 2000 से वर्ष 2009 तक विधायक रहीं। इस दौरान उन्होंने फाइनेंस मिनिस्टर का पद भी संभाला लेकिन वर्ष 2009 से 2015 तक का समय उनका बहुत कठिन गुजरा। इस बीच उनके पति व बच्चों की मौत हो गई। हालांकि इसके बाद ही उन्हें झारखंड का राज्यपाल बनाया गया। महिलाओं को सम्मान और समाज में बदलाव का संदेश देने के लिए ही भाजपा ने उन्हें राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया है। राष्ट्रपति चाहते तो वृंदावन के संत महंतों से भी मिल सकते थे लेकिन उन्होंने महिलाओं का दर्द सुनना ही उचित समझा। 

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