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एक के बाद एक रेल हादसों पर बोले रेलवे यूनियन के अध्यक्ष, बताई हादसों की बड़ी वजह
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 31 Aug 2017 08:31 AM IST
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पूर्वोत्तर रेलवे मजदूर यूनियन
- फोटो : अमर उजाला
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देश भर में लगातार हो रहे रेल हादसों की बड़ी वजह रेलवे के संरक्षा विभाग में कर्मचारियों का न होना है। यह बात रेलवे यूनियन के अध्यक्ष ने कही। उनका कहना है कि कर्मचारी ओवरटाइम कर रहे हैं। ऐसे में मानवीय भूल को कैसे रोका जा सकता है।
बुधवार को मथुरा में पूर्वोत्तर रेलवे मजदूर यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष बसंत चतुर्वेदी ने कहा कि बढ़ती रेल घटनाओं का एक बड़ा कारण रेलवे में संरक्षा के 2.87 लाख पदों का खाली होना है। कार्यरत रेल कर्मचारियों से आठ के बजाए 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है। इसी के चलते कर्मचारी मानवीय भूल कर रहे हैं।
यूनियन की बैठक में भाग लेने आए बसंत चतुर्वेदी ने कहा कि रेलवे में संरक्षा से जुड़े ड्राइवर, गार्ड, प्वाइंट्स मेन, केबिन मैन, ट्रेक मैन, शंटिंग मैन तथा स्टेशन मास्टरों के दो लाख 87 हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं। जो लोग इन पदों पर तैनात हैं वे ओवरलोड के चलते गलतियां कर रहे हैं। पद न भरने से लाइनों का मेंटीनेंस नहीं हो पा रहा। दुर्घटनाएं बढ़ने का यह एक प्रमुख कारण है।
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कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद रिक्त हो रहे संरक्षा के पदों पर भर्ती नहीं हो रही। केवल तकनीक के सहारे ट्रेनों को सुरक्षित नहीं चलाया जा सकता। तकनीकी उपकरणों को ऑपरेट करने के लिए भी कुशल व प्रशिक्षित रेलकर्मियों की जरूरत है, जो रेलवे नहीं कर रही। केंद्रीय अध्यक्ष ने कर्मचारियों की समस्याएं भी सुनीं।
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बुधवार को मथुरा में पूर्वोत्तर रेलवे मजदूर यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष बसंत चतुर्वेदी ने कहा कि बढ़ती रेल घटनाओं का एक बड़ा कारण रेलवे में संरक्षा के 2.87 लाख पदों का खाली होना है। कार्यरत रेल कर्मचारियों से आठ के बजाए 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है। इसी के चलते कर्मचारी मानवीय भूल कर रहे हैं।
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यूनियन की बैठक में भाग लेने आए बसंत चतुर्वेदी ने कहा कि रेलवे में संरक्षा से जुड़े ड्राइवर, गार्ड, प्वाइंट्स मेन, केबिन मैन, ट्रेक मैन, शंटिंग मैन तथा स्टेशन मास्टरों के दो लाख 87 हजार से अधिक पद खाली पड़े हैं। जो लोग इन पदों पर तैनात हैं वे ओवरलोड के चलते गलतियां कर रहे हैं। पद न भरने से लाइनों का मेंटीनेंस नहीं हो पा रहा। दुर्घटनाएं बढ़ने का यह एक प्रमुख कारण है।
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कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद रिक्त हो रहे संरक्षा के पदों पर भर्ती नहीं हो रही। केवल तकनीक के सहारे ट्रेनों को सुरक्षित नहीं चलाया जा सकता। तकनीकी उपकरणों को ऑपरेट करने के लिए भी कुशल व प्रशिक्षित रेलकर्मियों की जरूरत है, जो रेलवे नहीं कर रही। केंद्रीय अध्यक्ष ने कर्मचारियों की समस्याएं भी सुनीं।