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मां-बेटी की मौत का मामला: सुपरफास्ट एक्सप्रेस में सुरक्षा को लेकर चौंकाने वाला खुलासा

Sun, 04 Aug 2019 01:47 PM IST
मुकेश कुमार पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 04 Aug 2019 01:47 PM IST
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railway negligence of security in Nizamuddin Trivandrum Central Superfast Express
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली से तिरुवनंतपुरम जा रही सुपरफास्ट एक्सप्रेस में लूटपाट के दौरान हुई मां-बेटी की मौत के बाद रेल सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। इस सुपरफास्ट एक्सप्रेस में सुरक्षा के नाम पर एक सिपाही तक नहीं था। खास बात यह कि टीसी भी नहीं दिखे। 

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24 कोच की इस एक्सप्रेस को बगैर किसी एस्कॉर्ट के निजामुद्दीन से दौड़ा दिया गया। इस ट्रेन में 1600 से ज्यादा पैसेंजर थे और करीब 600 लोग रिजर्वेशन के साथ सफर कर रहे थे। ट्रेन की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे की गई इस पर भी जांच शुरू हो गई है।
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निजामुद्दीन-त्रिवेंद्रम सेंट्रल सुपरफास्ट एक्सप्रेस हर शुक्रवार को निजामुद्दीन से तिरुवनंतपुरम जाती है। दिल्ली निजामुद्दीन से यह ट्रेन शुक्रवार को रात 11:40 से चली थी। चौबीस कोच की इस ट्रेन का निजामुद्दीन से चलकर पहला स्टॉप मथुरा जंक्शन पर है। 

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मथुरा जंक्शन पर करीब दो मिनट का ठहराव

मथुरा जंक्शन पर ट्रेन करीब दो मिनट के लिए ठहरती है। इसके बाद सीधा भरतपुर जाकर रुकती है। उसके बाद सवाई माधोपुर, कोटा, रतलाम, वड़ोदरा, सूरत, बसई रोड, तनवेल जंक्शन से होते हुए तिरुवनंतपुरम पहुंचती है। 2842 किलोमीटर का सफर यह ट्रेन करीब 31 घंटे में तय करती है। लेकिन इस ट्रेन में जीआरपी और आरपीएफ का एक सिपाही तक तैनात नहीं था। 

माना जा रहा है कि बदमाश ने इसी के चलते वारदात को आसानी से अंजाम भी दे दिया। एसपी जीआरपी जोगेंद्र ने बताया कि साप्ताहिक स्पेशल ट्रेनों में फोर्स की कमी के चलते जीआरपी और आरपीएफ के एस्कॉर्ट नहीं लग पाते हैं। यात्रियों ने बताया कि जब ट्रेन जंगल में धीमी हुई तो सभी घबरा गए थे। ट्रेन की रफ्तार धीमी होने पर ही बदमाश उतरकर भाग गया। 

मथुरा से गुजरने वाली 50 से ज्यादा ट्रेनों में नहीं है कोई सुरक्षा

कोटा और भोपाल रूट पर चलने वाली पचास से भी ज्यादा ट्रेनें ऐसी हैं, जिनमें कोई सुरक्षा नहीं रहती है। यह सभी ट्रेनें वह हैं जो सप्ताह में एक बार या दो बार जाती हैं। फोर्स की कमी के कारण रेलवे इनमें सुरक्षा मुहैया नहीं करा पा रहा है। 

स्थिति यह है कि रेलवे स्टेशनों पर भी ट्रेनों की उस तरह से चेकिंग नहीं हो पा रही है। नियम तो यह है कि हर प्लेटफार्म पर चेकिंग होनी चाहिए। जीआरपी और आरपीएफ के दस्ते पड़ताल करें लेकिन यह सब हो नहीं पा रहा है।

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