पुष्य नक्षत्र में खरीदारी से आती है जीवन में खुशहाली, सात और आठ नवंबर को है यह शुभ संयोग
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सात और आठ नवंबर को ऐसा शुभ संयोग बना है, जिसमें खरीदारी से जीवन में खुशहाली आती है। दोनों दिन पुष्य योग है। इसमें सोने पे सुहागा यह है कि रविवार को रवि पुष्य योग है। ज्योतिषाचार्यो का कहना है कि दिवाली से पहले पुष्य नक्षत्र पड़ जाए तो काफी लाभकारी होता है। अगर रवि पुष्य संयोग हो जाए तो यह सभी शुभ तिथियों से ऊपर माना जाता है।
इन दोनों दिनों में खरीदारी कर लोग अन्य दिनों में पूजा-पाठ की तुलना में अधिक फल प्राप्त कर सकते हैं। सभी मुहूर्तों का राजा होने के कारण यह नक्षत्र समृद्धि देने वाला है। संपत्ति और आय में वृद्धि करेगा। वहीं यह शुभ मुहूर्त किसी भी शुभ कार्य के उपयुक्त है।
'खरीदारी का सर्वोत्तम मुहूर्त है'
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि कुल 27 नक्षत्र होते हैं। दिन, योग व करण के संयोग को लेकर नक्षत्र बनता है। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, गुरु पुष्य नक्षत्र के साथ-साथ रवि पुष्य नक्षत्र का महत्व शास्त्रों में दिया गया है। पुष्य नक्षत्र सभी नक्षत्रों का राजा है। रविवार सभी ग्रहों का राजा है।
ऐसे में दोनों का संयोग इस मुहूर्त को और भी खास बना रहा है। सोना, जमीन खरीदना, विद्या का शुभारंभ, व्यापार शुभारंभ, दान करना, खरीदारी करना अत्यंत लाभकारी होता है। लक्ष्मी से संबंधित सभी कार्य इस मुहूर्त में कर लें। अहोई अष्टमी के चलते यह संयोग कई मायने में शुभ फल देने वाला है।
'वाहन खरीदना शुभ रहेगा'
बल्केश्वर महादेव मंदिर के महंत कपिल नागर ने बताया कि पुष्य नक्षत्र का विशेष महत्व है। अगर यह रवि पुष्य संयोग हो तो महत्व और बढ़ जाता है। रविवार को यह संयोग रहेगा। अगर कोई कार्य नहीं बन रहा है तो उसे इस योग में प्रारंभ कर दें। इस योग में खरीदारी करना उत्तम रहता है।
सबसे खास बात यह है कि इस योग में शुभ कार्य के लिए किसी से मुहूर्त निकलवाने की जरूरत ही नहीं है। सोना-चांदी, आभूषण, वाहन, चल-अचल संपत्ति खरीदने के लिए इस साल का आखिरी सबसे उत्तम मुहूर्त है। वाहनों में सफेद वाहन खरीदना अति उत्तम रहेगा। वहीं यह नक्षत्र धनु, मकर और कन्या राशि के लिए लाभकारी है।
'जो भी खरीदेंगे, अक्षय रहेगा'
ज्योतिषाचार्य अरविंद ने बताया कि पुष्य और रवि पुष्य योग में की गई खरीदारी अक्षय मानी जाती है जिसका कभी क्षय नहीं होता है। मोती, शंख या श्रीयंत्र को प्रतिष्ठान में स्थापित करने से व्यापार में उन्नति और लाभ मिलता है। इस दिन बर्तन, वस्त्र, साज सज्जा का समान खरीदने से जीवन में ऐश्वर्य और प्रगति का अनूठा संबंध चिरकाल तक विद्यमान रहता है। रवि पुष्य योग में अहोई अष्टमी अष्टमी होने के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है।
'शुभ योग में खरीदारी से होती है धन की वृद्धि'
रविवार को रवि पुष्य नक्षत्र रहेगा। ऐसे में सूर्य भगवान की पूजा से उनकी कृपा मिलती है। अगर कोई आर्थिक तंगी से गुजर रहा है तो पुष्य नक्षत्र में विशेष पूजा से तंगी दूर होती है।