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आधे अधूरे ज्ञान से प्रयोगात्मक परीक्षा में शामिल होंगे परीक्षार्थी
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कासगंज प्रयोगात्मक परीक्षा से संबंधित फोटो डा. सोमवती
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। कोरोना के कारण विद्यालय बंद रहने से बोर्ड परीक्षार्थियों को पांच माह तक एक भी प्रयोग करने का मौका नहीं मिला। इसके बाद स्कूल खुले भी तो आधे परीक्षार्थियों को बुलाने का प्रावधान होने से विद्यालयों ने प्रयोगशालाएं नहीं खोली। अब जब स्कूल पूरी तरह से खुले हैं तो इतना समय नहीं बचा कि मानक के अनुसार प्रयोग कराए जा सकते।
जिले में 262 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। कोरोना के कारण इस साल ये स्कूल निर्धारित समय पर नहीं खुल सके। शिक्षा सत्र 2020-21 में 1 अप्रैल से 18 अक्तूबर तक ये स्कूल पूरी तरह से बंद रहे। विद्यालयों ने इस बीच ऑनलाइन पढ़ाई तो शुरू करा दी, लेकिन जो परीक्षार्थी प्रयोगात्मक विषयों के हैं उनको प्रयोग करने का मौका इस अवधि में नहीं मिला। शासन से 19 अक्तूबर से विद्यालय तो खोल दिए लेकिन कोरोना संक्रमण का खतरा देखते हुए विद्यालयों में 50 प्रतिशत बच्चों को बुलाने का ही प्रावधान किया गया।
इस प्रावधान के कारण अधिकांश बच्चों ने विद्यालय जाकर शिक्षण कार्य करने में रुचि नहीं दिखाई। बच्चों की कम संख्या को देखते हुए विद्यालयों के संचालकों ने प्रयोगशालाओं को खोलना जरूरी नहीं समझा, इससे विद्यालयों में पहुंचने के बाद भी बच्चे प्रयोगशाला का मुंह तक नहीं देख सके। कोरोना का खतरा कम हुआ तो कुछ दिन पहले ही स्कूल एक शिफ्ट में खुलने शुरू हुए। अभी विद्यालयों को खुले अधिक समय नहीं हुआ है कि प्रयोगात्मक परीक्षा की तिथियां निर्धारित हो गईं। अब ऐसे में स्कूल प्रबंधन को बच्चों का प्रयोगात्मक कार्य कराने की सुध आई लेकिन उन्हें अब इतना समय नहीं मिला है कि वे मानक के अनुसार प्रयोगात्मक कार्य करा सकें।
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18 प्रयोगात्मक परीक्षा चलाने का है नियम
बोर्ड परीक्षाथियों के लिए प्रतिवर्ष कम से कम 18 प्रयोगात्मक कक्षाएं संचालित करने का नियम है। लेकिन इस साल सरकार ने 70 प्रतिशत कोर्स निर्धारित कर दिया। इस हिसाब से 16 प्रयोगात्मक कक्षाएं संचालित होनी चाहिए थी। लेकिन इतनी कक्षाएं विद्यालयों में संचालित नहीं हुई।
प्रयोगात्मक विषयों की छात्राओं को प्रयोग कराने पर पूरा ध्यान दिया गया। निर्धारित मानक के अनुसार प्रयोगशालाएं खोली गईं। प्रयोग के लिए समय निर्धारित कर छात्राओं की उपस्थिति सुनिश्चित कराई गई। -डॉ. सोमवती शर्मा, प्रधानाचार्य, द्रोपदी देवी जाजू बालिका इंटर कॉलेज।
विद्यालय में प्रयोगशाला खोलने पर पूरी प्राथमिकता दी गई। जो छात्राएं विद्यालयों में उपस्थित हुईं उनको प्रयोग कराए गए। लगभग 60 प्रतिशत छात्राओं ने सभी प्रयोगों में हिस्सा लिया, शेष छात्राएं कुछ प्रयोगों में शामिल हुई। - राजेश यादव, प्रधानाचार्य राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, कासगंज
रिपोर्ट मनोज माहेश्वरी
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जिले में 262 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। कोरोना के कारण इस साल ये स्कूल निर्धारित समय पर नहीं खुल सके। शिक्षा सत्र 2020-21 में 1 अप्रैल से 18 अक्तूबर तक ये स्कूल पूरी तरह से बंद रहे। विद्यालयों ने इस बीच ऑनलाइन पढ़ाई तो शुरू करा दी, लेकिन जो परीक्षार्थी प्रयोगात्मक विषयों के हैं उनको प्रयोग करने का मौका इस अवधि में नहीं मिला। शासन से 19 अक्तूबर से विद्यालय तो खोल दिए लेकिन कोरोना संक्रमण का खतरा देखते हुए विद्यालयों में 50 प्रतिशत बच्चों को बुलाने का ही प्रावधान किया गया।
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इस प्रावधान के कारण अधिकांश बच्चों ने विद्यालय जाकर शिक्षण कार्य करने में रुचि नहीं दिखाई। बच्चों की कम संख्या को देखते हुए विद्यालयों के संचालकों ने प्रयोगशालाओं को खोलना जरूरी नहीं समझा, इससे विद्यालयों में पहुंचने के बाद भी बच्चे प्रयोगशाला का मुंह तक नहीं देख सके। कोरोना का खतरा कम हुआ तो कुछ दिन पहले ही स्कूल एक शिफ्ट में खुलने शुरू हुए। अभी विद्यालयों को खुले अधिक समय नहीं हुआ है कि प्रयोगात्मक परीक्षा की तिथियां निर्धारित हो गईं। अब ऐसे में स्कूल प्रबंधन को बच्चों का प्रयोगात्मक कार्य कराने की सुध आई लेकिन उन्हें अब इतना समय नहीं मिला है कि वे मानक के अनुसार प्रयोगात्मक कार्य करा सकें।
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18 प्रयोगात्मक परीक्षा चलाने का है नियम
बोर्ड परीक्षाथियों के लिए प्रतिवर्ष कम से कम 18 प्रयोगात्मक कक्षाएं संचालित करने का नियम है। लेकिन इस साल सरकार ने 70 प्रतिशत कोर्स निर्धारित कर दिया। इस हिसाब से 16 प्रयोगात्मक कक्षाएं संचालित होनी चाहिए थी। लेकिन इतनी कक्षाएं विद्यालयों में संचालित नहीं हुई।
प्रयोगात्मक विषयों की छात्राओं को प्रयोग कराने पर पूरा ध्यान दिया गया। निर्धारित मानक के अनुसार प्रयोगशालाएं खोली गईं। प्रयोग के लिए समय निर्धारित कर छात्राओं की उपस्थिति सुनिश्चित कराई गई। -डॉ. सोमवती शर्मा, प्रधानाचार्य, द्रोपदी देवी जाजू बालिका इंटर कॉलेज।
विद्यालय में प्रयोगशाला खोलने पर पूरी प्राथमिकता दी गई। जो छात्राएं विद्यालयों में उपस्थित हुईं उनको प्रयोग कराए गए। लगभग 60 प्रतिशत छात्राओं ने सभी प्रयोगों में हिस्सा लिया, शेष छात्राएं कुछ प्रयोगों में शामिल हुई। - राजेश यादव, प्रधानाचार्य राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, कासगंज
रिपोर्ट मनोज माहेश्वरी

कासगंज प्रयोगात्मक परीक्षा से संबंधित फोटो राजेश यादव- फोटो : KASGANJ

कासगंज के द्रोपदी जाजू बालिका इंटर कॉलेज में प्रयोगशाला में प्रयोग करतीं छात्राएं- फोटो : KASGANJ