कब होगा यमुना का उद्धार: 'हरियाणा के हथिनीकुंड पर कालिंदी को कैद कर लिया'
यमुना की सफाई के लिए 1983 से अब तक कई बार योजनाएं बनीं, लेकिन नदी में प्रदूषण कम होने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है।
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यमुना में बढ़ते प्रदूषण को लेकर बनाई गईं योजनाएं और उन पर खर्च हुए करोड़ों रुपयों का हिसाब अब यमुना भक्त मांग रहे हैं। साल दर साल यमुना मैली हो रही है और यमुना के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन यमुना दिनोंदिन मैली ही होती जा रही है। यमुनाजी को तो हथिनीकुंड पर ही कैद कर लिया गया। अगर बाढ़ न आए तो अब तक तो अस्तित्व ही संकट में पड़ जाता।
मथुरा में यमुना को शुद्धीकरण का अभियान चला रहे विजय चतुर्वेदी ने कहा कि यमुना नदी में प्रदूषण 1980 से आज तक बढ़ता ही गया। सर्वप्रथम 1983 में तत्कालीन जिलाधिकारी बृहस्पति शर्मा ने 26 लाख की परियोजना तैयार कर प्रदूषण की समस्या का समाधान करना चाहा, उसके बाद 1996 में राज्य सरकारों ने यमुना नदी के जल का बंटवारा किया।
बता दें कि यमुनाजी कई राज्यों से गुजरती हैं, जिसमें 67 प्रतिशत जल हरियाणा ले गया, 13 प्रतिशत जल उत्तराखंड, 13 प्रतिशत जल पूर्वी उत्तर प्रदेश और 3 प्रतिशत जल पश्चिमी उत्तर प्रदेश को दिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी मंत्री ने जल बंटवारे पर न तो ध्यान दिया और न ही विरोध किया। जिसकी वजह से यमुना जी को हरियाणा के हथिनीकुंड पर कैद कर लिया। दिल्ली के ओखला बांध, नजफगढ़ ड्रेन के गंदे नालों से यमुना नदी बहाई जा रही है।
अब तक 560 पत्र लिखे गए
विजय ने बताया कि सभी मंत्रालयों, मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को 560 पत्र लिखे। कई आंदोलन भी किए। सरकार ने 2011 में ब्रज मंडल के सभी संतों, चारों पीठ के शंकराचार्यजी और यमुना भक्तों की एक सभा गांधी पार्क में आयोजित की गई और 2011 में यमुना भक्त बसों से एवं अपने-अपने वाहनों से दिल्ली के जंतर-मंतर गए सरकार को कोसा गया।
हर समय यमुना भक्त छले गए
2013 में रमेश बाबा, विश्वधर्म रक्षक दल, भाकियू आदि दलों ने दिल्ली तक पैदल 13 दिन तक यात्रा निकाली। यात्रा जैसे ही बदरपुर बॉर्डर तक पहुंची सरकार ने आंदोलन को कुचल डाला और सभी यमुना भक्तों को बहलाकर मुस्लिम बस्ती अलीबाग में डेरा डलवाकर पीएसी तैनात कर डरा धमकाकर दिल्ली के जंतर मंतर तक नहीं जाने दिया। इसके बाद तत्कालीन जल संशाधन मंत्री हरीश रावत ने भक्तों को झूठा आश्वासन देकर विदा कर दिया।
विश्वधर्म रक्षकदल के अध्यक्ष विजय चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार दोहरी नीति अपना रही है। सरकार 5000 किमी की दूरी से पाइपलाइन के माध्यम से पेट्रोल-डीजल आदि तो लाती है लेकिन यमुनोत्री से इलाहाबाद तक 1365 किमी यमुना किनारे अंडरग्राउंड पाइपलाइन डलवाकर गंदे नालों के प्रदूषित जल को अन्यत्र नहीं ले जाती।