पितृ पक्ष 2021: इस वर्ष 16 नहीं 17 दिनों तक होगा श्राद्ध कर्म, जानें तर्पण के लिए खास तिथियां
सोमवार से पितृ पूर्णिमा से श्राद्ध पक्ष शुरू हो गए, जो 6 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या तक रहेंगे। ये सोलह दिन पितरों के ऋण चुकाने के दिन हैं। पितृ पक्ष में परिजनों की मृत्यु तिथि पर श्राद्ध व तर्पण करने से उनकी तृप्ति होती है।
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श्राद्ध पक्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक 16 दिनों तक चलता है। हालंकि इस वर्ष 16 श्राद्ध 17 दिनों के हैं। सोमवार से पितृ पूर्णिमा से श्राद्ध पक्ष शुरू हो गए, जो 6 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या तक रहेंगे। ये सोलह दिन पितरों के ऋण चुकाने के दिन हैं। पितृ पक्ष में परिजनों की मृत्यु तिथि पर श्राद्ध व तर्पण करने से उनकी तृप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य रामचंद्र शर्मा ने बताया कि इस वर्ष 26 सितंबर को कोई श्राद्ध कर्म नहीं होगा।
धर्मशास्त्रीय मतानुसार श्राद्ध का समय अपरान्ह काल है। इस समय पितृ द्वार पर आते हैं। वायु पूराण के अनुसार इन सोलह दिनों में जो खाद्य पदार्थ आदि दिया जाता है वह अमृत रूप होकर पितरों को प्राप्त होता है। श्राद्ध में श्रद्धा, शुद्धता व पवित्रता जरूरी है।
पितरों का आलय है पितृ पक्ष
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पितृ पक्ष में पितर पितृलोक से मनुष्य लोक में आशा लेकर आते हैं। यह देखते हैं कि उनके परिजन उनकी तिथि पर श्राद्ध कर्म करते हैं या नहीं। ऐसा वे अमावस्या तक देखते हैं। जो पितरों की तिथि अथवा अमावस्या पर श्राद्ध कर्म करते है वे उन्हें आशीर्वाद प्रदान कर चले जाते है। यह पक्ष पितरों का आलय कहलाता है। यह समय उनका सामूहिक पर्व भी माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 20 सितंबर को पूर्णिमा अपरान्ह व्यापिनी है, इसलिए सोमवार से पार्वण, महालय, प्रोष्ठ पदी पूर्णिमा श्राद्ध शुरू होंगे। भाद्र पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण पक्ष के सभी श्राद्ध पार्वण श्राद्ध कहलाते हैं। दोपहर को व्यापिनी तिथि ही श्राद्ध कर्म का सही समय है, जो निरंतर सोलह दिनों तक चलेंगे।
श्राद्ध पक्ष की तिथियां
20 सितंबर को प्रतिपदा
21 सितंबर को द्वितीया
22 सितंबर को तृतीया
23 सितंबर को चतुर्थी
25 सितंबर को पंचम (कुंवारा पंचमी,भरणी श्राद्ध )
27 सितंबर को षष्ठी
28 सितंबर को सप्तमी
29 सितंबर को अष्टमी
30 सितंबर को नवमी (अविधवा नवमी)
1 अक्टूबर को दशमी
2 अक्तूबर को एकादशी
3 अक्तूबर द्वादशी (सन्यासियों का श्राद्ध)
4 अक्तूबर को त्रयोदशी
5 अक्तूबर को चतुर्दशी (शस्त्रादिहत श्राद्ध)
6 अक्तूबर बुधवार को सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध
जिन्हें अपने परिजनों की मृत्यु तिथि नहीं पता है, उनके निमित्त अथवा ज्ञात अज्ञात पितरों के निमित्त अमावस्या को श्राद्ध व तर्पण कर सकते हैं। पितृ पक्ष पितरों के लिए पर्व का समय है। इसलिए इस पक्ष में श्राद्ध किया जाना चाहिए। इनकी कृपा से ही सुख, समृद्धि बनी रहती है।
श्राद्ध में ये तीन अत्यंत पवित्र माने जाते हैं
पुत्री का पुत्र अर्थात दौहित्र, कुतप समय अर्थात दोपहर का समय व तिल। श्राद्ध कर्म में ये तीन पवित्र माने गए हैं। सामान्यतः श्राद्ध कर्म में कभी क्रोध व जल्दबाजी नही करना चाहिए। शांति, प्रसन्नता व श्रद्धा पूर्वक किया कर्म ही पितरों को प्राप्त होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म हमारे वेद शास्त्रों द्वारा अनुमोदित व विज्ञान सम्मत भी है।
आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि कन्यागत सूर्य में जो भोज्य सामग्री पितरों को दी जाती है वे समस्त स्वर्ग प्रदान करने वाली कही गई है। पितृ पक्ष के ये सोलह दिन यज्ञों के समान है। इस काल में अपने पितरों की मृत्यु तिथि पर दिया गया। भोजनादि पदार्थ अक्षय होता है। इसलिए इस काल में श्राद्ध, तर्पण, दान, पुण्य आदि अवश्य करना चाहिए। इससे आयु, पुत्र, यश, कीर्ती, समृद्धि, बल, सुख, धन, धान्य की प्राप्ति होती है।