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आगराः मरीजों के लिए मुसीबत भरा रहा लॉकडाउन, 70 दिन में टले 90 हजार ऑपरेशन
Wed, 03 Jun 2020 04:34 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 03 Jun 2020 04:34 PM IST
सार
जिले में 2500 से अधिक प्राइवेट चिकित्सक हैं। 464 अस्पताल और 432 क्लीनिक हैं
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केस एक
यमुनाब्रिज के रहने वाले 48 साल के मोहम्मद दिलशाद को बवासीर की परेशानी थी। लॉकडाउन में परेशानी ज्यादा बढ़ने पर ऑपरेशन कराना चाहते थे, टेलीमेडिसिन पर परेशानी बताई। डॉक्टरों ने दवा लिख दी कहा कि लॉकडाउन के बाद ऑपरेशन करा लेना।
केस दो
बोदला निवासी दिनेश चंद्र को अपनी 68 साल की मां का अप्रैल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना था, लेकिन लॉकडाउन हो गया तो डॉक्टरों ने बाद में कराने की सलाह दी, लेकिन लॉकडाउन बढ़ता गया और ऑपरेशन नहीं हो पाया। डॉक्टरों ने दवा और ड्रॉप दे दी है।
लॉकडाउन मरीजों के लिए भी मुसीबत भरा बीता। कोरोना वायरस के चलते ओपीडी बंद रहीं तो गैर जरूरी ऑपरेशन भी टाल दिए गए थे। इस तरह से 70 दिन में सर्जरी, हड्डी, नेत्र, ईएनटी और दंत रोग के 95 हजार से अधिक ऑपरेशन लटक गए हैं। अब यह मरीज चिकित्सकों से ऑपरेशन कराने के लिए परामर्श लेने पहुंच रहे हैं।
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यमुनाब्रिज के रहने वाले 48 साल के मोहम्मद दिलशाद को बवासीर की परेशानी थी। लॉकडाउन में परेशानी ज्यादा बढ़ने पर ऑपरेशन कराना चाहते थे, टेलीमेडिसिन पर परेशानी बताई। डॉक्टरों ने दवा लिख दी कहा कि लॉकडाउन के बाद ऑपरेशन करा लेना।
केस दो
बोदला निवासी दिनेश चंद्र को अपनी 68 साल की मां का अप्रैल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना था, लेकिन लॉकडाउन हो गया तो डॉक्टरों ने बाद में कराने की सलाह दी, लेकिन लॉकडाउन बढ़ता गया और ऑपरेशन नहीं हो पाया। डॉक्टरों ने दवा और ड्रॉप दे दी है।
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लॉकडाउन मरीजों के लिए भी मुसीबत भरा बीता। कोरोना वायरस के चलते ओपीडी बंद रहीं तो गैर जरूरी ऑपरेशन भी टाल दिए गए थे। इस तरह से 70 दिन में सर्जरी, हड्डी, नेत्र, ईएनटी और दंत रोग के 95 हजार से अधिक ऑपरेशन लटक गए हैं। अब यह मरीज चिकित्सकों से ऑपरेशन कराने के लिए परामर्श लेने पहुंच रहे हैं।
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जिले में 2500 से अधिक प्राइवेट चिकित्सक हैं। 464 अस्पताल और 432 क्लीनिक हैं। सामान्य दिनों में औसतन एक दिन में 13 से 15 हजार ऑपरेशन होते थे। 22 मार्च से कोरोना वायरस के चलते में ओपीडी और जनरल सर्जरी बंद कर दी थी।
इससे मोतियाबिंद, काला पानी, भेंगापन, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, स्पोर्ट इंजरी, गठिया, आर्थोप्लास्टी, हाथ-पैर टेढ़ेमेढ़े, रूट कैनाल, बवासीर, भगंदर, फिशर, एपेंडिक्स, हॉर्निया, गॉल ब्लेडर, पित्त की थैली में पथरी समेत कई जनरल सर्जरी नहीं हो पाईं। 70 दिन में प्राइवेट अस्पताल और चिकित्सकों के यहां लगभग 87 हजार ऑपरेशन और एसएन मेडिकल कॉलेज-जिला अस्पताल में लगभग आठ हजार ऑपरेशन नहीं हो सके।
लॉकडाउन खुलने के बाद अब यह मरीज चिकित्सकों के पास ऑपरेशन कराने पहुंच रहे हैं। डॉक्टर इनको कोरोना वायरस की जांच कराने के बाद ऑपरेशन करने की बात कह रहे हैं। सीएमओ डॉ. आरसी पाडे ने बताया कि शासन के निर्देश पर जनरल सर्जरी बंद की थी, अब जो शासन का निर्देश होगा उसका पालन करेंगे।
इससे मोतियाबिंद, काला पानी, भेंगापन, ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, स्पोर्ट इंजरी, गठिया, आर्थोप्लास्टी, हाथ-पैर टेढ़ेमेढ़े, रूट कैनाल, बवासीर, भगंदर, फिशर, एपेंडिक्स, हॉर्निया, गॉल ब्लेडर, पित्त की थैली में पथरी समेत कई जनरल सर्जरी नहीं हो पाईं। 70 दिन में प्राइवेट अस्पताल और चिकित्सकों के यहां लगभग 87 हजार ऑपरेशन और एसएन मेडिकल कॉलेज-जिला अस्पताल में लगभग आठ हजार ऑपरेशन नहीं हो सके।
लॉकडाउन खुलने के बाद अब यह मरीज चिकित्सकों के पास ऑपरेशन कराने पहुंच रहे हैं। डॉक्टर इनको कोरोना वायरस की जांच कराने के बाद ऑपरेशन करने की बात कह रहे हैं। सीएमओ डॉ. आरसी पाडे ने बताया कि शासन के निर्देश पर जनरल सर्जरी बंद की थी, अब जो शासन का निर्देश होगा उसका पालन करेंगे।
गंभीर ऑपरेशन पहले होंगे
सामान्य दिनों में एक दिन में जनरल सर्जरी के 1500 से अधिक ऑपरेशन होते हैं। लॉकडाउन में यह ऑपरेशन नहीं हो पाने से 90-95 हजार ऑपरेशन टाले गए हैं। पेंडेंसी काफी बढ़ गई है, अब मरीज आने लगे हैं। ऐसे में अभी भी चिकित्सकों को गंभीर ऑपरेशन पहले करने को कहा गया है। - डॉ. आरएम पचौरी, अध्यक्ष आईएमए
कोरोना जांच के बाद ऑपरेशन
शहर में 200 से अधिक सर्जन हैं, इन्होंने सरकार के निर्देश पर कोरोना वायरस से बचाव के चलते जनरल सर्जरी बंद कर दी थी, इमरजेंसी ऑपरेशन ही किए गए थे। मरीजों को कोरोना वायरस की जांच कराने के बाद ऑपरेशन सेवा दी जा रही है। - डॉ. सुनील शर्मा, सचिव, सोसाइटी ऑफ एंडोस्कॉपिक एंड लेप्रोस्कॉपिक सर्जंस ऑफ आगरा
सिर्फ ट्रॉमा सर्जरी की गई
ऐसे कई बीमारियों के ऑपरेशन होते हैं, जिनको तीन से पांच महीने तक टाला जा सकता है। कोरोना वायरस जैसी बीमारी को देखते विभिन्न बीमारियों के जनरल सर्जरी बंद कर दी थी। शहर में हड्डी विशेषज्ञ 108 हैं, जिन्होंने ट्रामा सर्जरी की, बाकी को टाल दिया था। - डॉ. संजय चतुर्वेदी हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं आईएमए सचिव
सामान्य दिनों में एक दिन में जनरल सर्जरी के 1500 से अधिक ऑपरेशन होते हैं। लॉकडाउन में यह ऑपरेशन नहीं हो पाने से 90-95 हजार ऑपरेशन टाले गए हैं। पेंडेंसी काफी बढ़ गई है, अब मरीज आने लगे हैं। ऐसे में अभी भी चिकित्सकों को गंभीर ऑपरेशन पहले करने को कहा गया है। - डॉ. आरएम पचौरी, अध्यक्ष आईएमए
कोरोना जांच के बाद ऑपरेशन
शहर में 200 से अधिक सर्जन हैं, इन्होंने सरकार के निर्देश पर कोरोना वायरस से बचाव के चलते जनरल सर्जरी बंद कर दी थी, इमरजेंसी ऑपरेशन ही किए गए थे। मरीजों को कोरोना वायरस की जांच कराने के बाद ऑपरेशन सेवा दी जा रही है। - डॉ. सुनील शर्मा, सचिव, सोसाइटी ऑफ एंडोस्कॉपिक एंड लेप्रोस्कॉपिक सर्जंस ऑफ आगरा
सिर्फ ट्रॉमा सर्जरी की गई
ऐसे कई बीमारियों के ऑपरेशन होते हैं, जिनको तीन से पांच महीने तक टाला जा सकता है। कोरोना वायरस जैसी बीमारी को देखते विभिन्न बीमारियों के जनरल सर्जरी बंद कर दी थी। शहर में हड्डी विशेषज्ञ 108 हैं, जिन्होंने ट्रामा सर्जरी की, बाकी को टाल दिया था। - डॉ. संजय चतुर्वेदी हड्डी रोग विशेषज्ञ एवं आईएमए सचिव