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World Sparrow Day: चंबल के आंगन में फुदक रहीं गौरैया, 7500 पहुंची संख्या; चहचहाहट से आबाद हो रहीं वादियां
Thu, 20 Mar 2025 10:13 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 20 Mar 2025 10:13 AM IST
सार
फुदकती गौरैया की चहचहाहट। अपने घरों में इसकी कमी महसूस करने वालों के लिए थोड़ी अच्छी खबर है। अपनी गौरैया चंबल में बढ़ रही है। सेंक्चुअरी में इनकी संख्या 7500 पहुंच गई है।
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गौरैया
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
दुनियाभर में गौरैया की घटती आबादी से पर्यावरण प्रेमी चिंतित हैं। वहीं, चंबल के आंगन में फुदकती गौरैया मन को सुकून देती है। चहचहाहट यहां आने वाले सैलानियों को रोमांचित कर दे रही है।
बाह रेंज में नौ साल पहले गौरैया की संख्या 1500 के करीब रह गई थी। लुप्त हो रही चिड़िया को बचाने के लिए वन विभाग ने रेंज में घोंसले लगाए। रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि विभाग चंबल के गांवों में घरौंदा देकर ग्रामीणों को गौरैया संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहा है।
इसके सुखद परिणाम सामने आए हैं। गौरैया की संख्या करीब 7500 हो गई है। प्रजनन सीजन (मार्च-जून) में पेड़ों की झाड़ियों में घोंसले बनाने के साथ ही वन विभाग निगरानी शुरू कर देता है। घोंसले में गौरैया 3 से 5 अंडे देती है। 15 दिनों में चूजे निकलते हैं। करीब इतना ही समय चूजों के उड़ान भरने में लगता है।
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बाह रेंज में नौ साल पहले गौरैया की संख्या 1500 के करीब रह गई थी। लुप्त हो रही चिड़िया को बचाने के लिए वन विभाग ने रेंज में घोंसले लगाए। रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि विभाग चंबल के गांवों में घरौंदा देकर ग्रामीणों को गौरैया संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहा है।
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इसके सुखद परिणाम सामने आए हैं। गौरैया की संख्या करीब 7500 हो गई है। प्रजनन सीजन (मार्च-जून) में पेड़ों की झाड़ियों में घोंसले बनाने के साथ ही वन विभाग निगरानी शुरू कर देता है। घोंसले में गौरैया 3 से 5 अंडे देती है। 15 दिनों में चूजे निकलते हैं। करीब इतना ही समय चूजों के उड़ान भरने में लगता है।
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पक्के घरों ने छीना आवास, कीटनाशक ने जिंदगी
दुनिया के 50 देशों में गौरैया के अस्तित्व पर संकट की कई वजह रहीं हैं। रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि कच्चे घरों पर पड़ने वाले छप्पर में गौरैया घोंसले बनाती थी। अब पक्के मकान बन गए, गौरैया के घोंसले छिन गए। फसलों में कीटनाशकों के अंधाधुंध छिड़काव, मोबाइल टावरों के रेडिएशन ने भी गौरैया के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला। अस्तित्व का संकट पैदा हो गया था।
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दुनिया के 50 देशों में गौरैया के अस्तित्व पर संकट की कई वजह रहीं हैं। रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि कच्चे घरों पर पड़ने वाले छप्पर में गौरैया घोंसले बनाती थी। अब पक्के मकान बन गए, गौरैया के घोंसले छिन गए। फसलों में कीटनाशकों के अंधाधुंध छिड़काव, मोबाइल टावरों के रेडिएशन ने भी गौरैया के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला। अस्तित्व का संकट पैदा हो गया था।
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आई लव स्पैरो... के बिना जीवन संगीत अधूरा
हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों को इस प्यारी चिड़िया की घटती संख्या के बारे में जागरूक किया जा सके। इसे बचाने के लिए प्रेरित किया जाए। इस साल की थीम 'आई लव स्पैरो' का जिक्र कर बाह के साहित्यकार डॉ. शिवशंकर कटारे ने बताया कि हमारे घर-आंगन में फुदकने वाली गौरैया के बिना हमारा जीवन संगीत अधूरा है। गौरैया के प्रति लगाव और संरक्षण को बढ़ावा मिलना चाहिए।
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हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों को इस प्यारी चिड़िया की घटती संख्या के बारे में जागरूक किया जा सके। इसे बचाने के लिए प्रेरित किया जाए। इस साल की थीम 'आई लव स्पैरो' का जिक्र कर बाह के साहित्यकार डॉ. शिवशंकर कटारे ने बताया कि हमारे घर-आंगन में फुदकने वाली गौरैया के बिना हमारा जीवन संगीत अधूरा है। गौरैया के प्रति लगाव और संरक्षण को बढ़ावा मिलना चाहिए।
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सामाजिक वानिकी रेंजों में भी प्रयास
गौरैया को बचाने के लिए बाह, पिनाहट, जैतपुर की सामाजिक वानिकी रेंज में भी जागरूकता के प्रयास रंग लाए। बीहड़ में पौधरोपण से भी गौरैया को घोंसले के लिए नए ठिकाने मिले। जैतपुर के रेंजर कोमल सिंह, बाह के रेंजर अमित कुमार ने बताया कि पौधे लगाने और घोंसले वितरित कर लोगों को जागरूक करने से बीहड़ से गांवों तक गौरैया दिखने लगी हैं।
गौरैया को बचाने के लिए बाह, पिनाहट, जैतपुर की सामाजिक वानिकी रेंज में भी जागरूकता के प्रयास रंग लाए। बीहड़ में पौधरोपण से भी गौरैया को घोंसले के लिए नए ठिकाने मिले। जैतपुर के रेंजर कोमल सिंह, बाह के रेंजर अमित कुमार ने बताया कि पौधे लगाने और घोंसले वितरित कर लोगों को जागरूक करने से बीहड़ से गांवों तक गौरैया दिखने लगी हैं।