{"_id":"6673e68e4ecd2c5b9b06bf1b","slug":"panchayat-pressuring-victim-to-compromise-in-molestation-case-in-agra-and-also-pronounced-verdict-itself-2024-06-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP: कोर्ट नहीं... पंचायत ने सुना दिया फैसला, छेड़छाड़ पर 40 हजार का दंड; पीड़िता बोली- पैसा नहीं, न्याय चाहिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: कोर्ट नहीं... पंचायत ने सुना दिया फैसला, छेड़छाड़ पर 40 हजार का दंड; पीड़िता बोली- पैसा नहीं, न्याय चाहिए
Thu, 20 Jun 2024 02:04 PM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Thu, 20 Jun 2024 02:04 PM IST
सार
ताजनगरी में कोर्ट ने नहीं पंचायत ने ही फैसला सुना दिया। छेड़छाड़ करने पर आरोपी पर 40 हजार का दंड लगाकर मामला रफा दफा करने की कोशिश की। पीड़िता बोली- पैसा नहीं, न्याय चाहिए।
विज्ञापन
woman crime
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में शौच के लिए गई नाबालिग से गांव के ही एक युवक ने छेड़छाड़ की। केस दर्ज होने पर समझौते के लिए पीड़िता के पिता पर दबाव बनाया। पंचायत में आरोपी पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड रखा। पंचायत के बाद पीड़िता ने कोर्ट में बयान बदल दिए। लेकिन, 40 हजार रुपये नहीं मिले।
विज्ञापन
घटना खंदौली थाना क्षेत्र के एक गांव की है। यहां 9 मई को छेड़छाड़ की घटना हुई। पीड़िता के पिता ने केस दर्ज कराया था कि उसकी बेटी (17) शौच के लिए गई थी। खेत में पड़ोसी (35) ने उसे बुरी नीयत से दबोच लिया। नाबालिग बेटी से छेड़छाड़ की। पुलिस ने पॉक्सो के तहत केस दर्ज किया था।
विज्ञापन
आरोप है कि मुकदमा होने के बाद आरोपी युवक के परिजन पीड़िता के पिता पर समझौते के लिए दबाव बनाने लगे। आरोपी के कहने पर गांव के लोगों ने पंचायत कराई। जिसमें तय हुआ कि आरोपी 40 हजार रुपये पीड़िता को देगा। पंचायत ने अर्थदंड के 40 हजार रुपये प्रधान पर जमा कराए। पंचायत के बाद पीड़िता मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 के बयान से पलट गई।
विज्ञापन
आरोपी के पक्ष में बयान दिए। आरोप है कि अब आरोपी 40 हजार रुपये नहीं दे रहा। कह रहा है कि केस खत्म होने पर पैसा मिलेगा। पीड़िता का कहना है कि मुझे पैसा नहीं, न्याय चाहिए। पीड़िता के पिता का कहना है कि आरोपी जिस समाज से उनका गांव में बाहुल्य है।
पीड़िता जिस समाज से है, उसके गांव में सिर्फ दो परिवार हैं। इसके चलते ग्रामीण उस पर दबाव बना रहे हैं। प्रभारी निरीक्षक खंदौली का कहना है कि पीड़िता के पिता की तहरीर पर छेडछाड़ और पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया था। जांच मे पीड़िता नाबालिग नहीं निकली, इसलिए पॉक्सो एक्ट को हटा दिया गया।
जन्म के फर्जी प्रमाण पत्र का आरोप
पीड़िता के पिता का कहना है कि उसकी पुत्री पढ़ी लिखी नहीं है। उसकी उम्र 17 वर्ष है। आरोपी ने ही बेटी का फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र बनवा दिया। जिसमें उसे बालिग दर्शाया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास कोई शैक्षिक प्रमाण पत्र नहीं। पुलिस ने प्रमाण पत्र जांच में लापरवाही बरती है।