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गलत तरीके से संचालित हो रहे वित्तविहीन विद्यालय
अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 03 Jun 2016 01:58 AM IST
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Operating incorrectly Non added School
- फोटो : Logo
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मान्यता मिलने के बाद से प्रबंध समिति के चुनाव नहीं हुए
जिले के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों का संचालन गलत तरीके से हो रहा है। किसी भी विद्यालय में प्रबंध समिति का चुनाव नहीं कराया जा रहा है। नियमानुसार अधिकतर विद्यालयों की प्रबंध समिति की समय सीमा पूरी हो चुकी है। उसके पास अब कोई अधिकार नहीं है। वह स्कूलों में शिक्षक तक की नियुक्ति नहीं कर सकते हैं।
जिले में वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 700 से ज्यादा है। वर्षों से एक भी विद्यालय विभाग को प्रबंध समिति के चुनाव की जानकारी नहीं दे रहे हैं। विभाग का मानना है कि चुनाव कराए ही नहीं जा रहे हैं। विद्यालय में कई काम बिना प्रबंध समिति के सहमति के नहीं हो सकते हैं। इसमें फीस निर्धारण आदि चीजें शामिल हैं। नियमानुसार यदि पांच वर्ष में प्रबंध समिति का चुनाव नहीं होता तो उसे कालातीत मानते हुए विभाग कंट्रोलर नियुक्त करेगा। प्रबंधक के पास इस अवधि के बाद चुनाव कराने के भी अधिकार नहीं होंगे।
चुनाव ही नहीं, वित्तविहीन विद्यालय विभाग की कई सूचनाएं भी समय पर नहीं देते। शिक्षकों के मानदेय के संबंध में अधिकतर विद्यालय ब्योरा नहीं दे रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक दिनेश कुमार यादव ने बताया कि प्रबंध समिति का चुनाव न कराने वाले विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। सभी विद्यालयों से चुनाव के संबंध में जानकारी मांगी जा रही है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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जिले के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों का संचालन गलत तरीके से हो रहा है। किसी भी विद्यालय में प्रबंध समिति का चुनाव नहीं कराया जा रहा है। नियमानुसार अधिकतर विद्यालयों की प्रबंध समिति की समय सीमा पूरी हो चुकी है। उसके पास अब कोई अधिकार नहीं है। वह स्कूलों में शिक्षक तक की नियुक्ति नहीं कर सकते हैं।
जिले में वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 700 से ज्यादा है। वर्षों से एक भी विद्यालय विभाग को प्रबंध समिति के चुनाव की जानकारी नहीं दे रहे हैं। विभाग का मानना है कि चुनाव कराए ही नहीं जा रहे हैं। विद्यालय में कई काम बिना प्रबंध समिति के सहमति के नहीं हो सकते हैं। इसमें फीस निर्धारण आदि चीजें शामिल हैं। नियमानुसार यदि पांच वर्ष में प्रबंध समिति का चुनाव नहीं होता तो उसे कालातीत मानते हुए विभाग कंट्रोलर नियुक्त करेगा। प्रबंधक के पास इस अवधि के बाद चुनाव कराने के भी अधिकार नहीं होंगे।
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चुनाव ही नहीं, वित्तविहीन विद्यालय विभाग की कई सूचनाएं भी समय पर नहीं देते। शिक्षकों के मानदेय के संबंध में अधिकतर विद्यालय ब्योरा नहीं दे रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक दिनेश कुमार यादव ने बताया कि प्रबंध समिति का चुनाव न कराने वाले विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। सभी विद्यालयों से चुनाव के संबंध में जानकारी मांगी जा रही है। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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