ब्लैक फंगस: एक और मरीज में मिला संक्रमण, एसएन में कराया भर्ती, अस्पताल में नहीं हैं दवाइयां
मेडिकल कॉलेज के वाह्य रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि दूसरा मरीज भी बाहर से आया है। पहले उसका निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। स्थिति बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
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आगरा एसएन मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस की बीमारी का एक और मरीज (पुरुष) शुक्रवार को पहुंचा। उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। उसमें बीमारी अधिक फैल चुकी है। इससे पहले एक महिला मरीज में सीटी स्कैन की रिपोर्ट से इसकी पुष्टि हुई है।
मेडिकल कॉलेज के वाह्य रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष गौतम ने बताया कि दूसरा मरीज भी बाहर से आया है। पहले उसका निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। स्थिति बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इस मरीज का भी अलग रखकर इलाज किया जाएगा। जिससे अस्पताल में भर्ती दूसरे मरीजों पर असर न पड़े। वहीं, पहले से भर्ती महिला मरीज में भी शुक्रवार को ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। उसकी सीटी स्कैन की रिपोर्ट मिल गई। उसे दवा की पहली डोज दी जा चुकी है। महिला की कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट निगेटिव आई है।
डॉ. आशीष गौतम का कहना है कि अभी तक मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के दो मामले आए हैं, दोनों ही बाहर के हैं। महिला भी मुजफ्फरनगर से आई थी। एसएन में भर्ती किसी कोरोना संक्रमित मरीज में ब्लैक फंगस के लक्षण नहीं मिले हैं। यह अच्छी बात है।
ब्लैक फंगस के मरीज के मामले प्रदेशभर में बढ़ने के साथ जिले में भी सामने आ रहे हैं। एसएन में एक मरीज का इलाज चल रहा है। शुक्रवार को एक और मरीज ने भर्ती होने के लिए संपर्क किया। उसे एसजीपीजीआई, लखनऊ ले जाने की सलाह दी गई। एसएन मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के मरीजों के उचित उपचार के लिए दवाएं और इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि देहात क्षेत्र के ब्लैक फंगस के मरीज को भर्ती कराने के संबंध में परिजनों ने उसने संपर्क किया। दवाओं के उपलब्ध न होने से बेहतर इलाज के लिए एसजीपीआई (संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट) मरीज को ले जाने की सलाह दी।
दवाओं की मांग शासन से की गई है
ब्लैक फंगस बीमारी के इलाज में सर्वाधिक प्रभावी अम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन है। इस समय यह बाजार में भी उपलब्ध नहीं है। इसके बाद आईसोकोनाजोल टेबलेट असरदार है। ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए शासन स्तर से कम से कम 200-300 टेबलेट उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है। मरीज को कम से कम 14 दिन दवा देनी होती है। उन्होंने बताया कि पोसोकोनाजोल सिरप भी ब्लैक फंगस के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी भी उपलब्धता नहीं है। एसएन मेडिकल कॉलेज में अभी वोरिकोनाजोल टेबलेट की उपलब्धता है। प्राचार्य के मुताबिक यह 15 से 20 फीसदी ही प्रभावी है। शुरुआती दौर में यह दवा दी जाती है।
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के लक्षण वाली एक महिला मरीज का इलाज चल रहा है। प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए मेडिसिन विभाग में चार बेड अलग करा दिए गए हैं।
स्टेरॉइड का ज्यादा सेवन नुकसानदेह
आगरा। प्राचार्य ने डॉ. संजय काला ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण के लक्षण वाले मरीजों को जरूरत से अधिक स्टेरॉइड दिया जा रहा है। यह खतरनाक है। विशेषज्ञ शिक्षकों की सलाह पर ही स्टेरॉइड का सेवन किया जाना चाहिए।
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