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बीएड काउंसलिंग से बाहर हो सकते हैं 163 कॉलेज, मान्यता पर भी लटकी तलवार

Wed, 29 May 2019 10:17 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 29 May 2019 10:17 AM IST
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notice to 163 BEd colleges in uttar pradesh
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 163 बीएड कॉलेजों में सीट के मुताबिक शिक्षक नहीं हैं। इनको विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने नोटिस भेजे हैं। मानक पूरे नहीं होने पर इन कॉलेजों को काउंसलिंग से बाहर रखा जाएगा। मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
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विश्वविद्यालय के अतंर्गत बीएड के 443 कॉलेज हैं। विश्वविद्यालय के सर्वे में 163 कॉलेज मानक पूरे नहीं करते पाए गए। विश्वविद्यालय ने इनकी सूची एनसीटीई को भी भेजी है। उनकी रिपोर्ट में बीएड के 29 कॉलेजों ने शिक्षकों का अनुमोदन ही नहीं कराया था। 81 ऐसे कॉलेज रहे, जिनमें आंशिक रूप से मानक पूरे किए हैं। इसके अलावा 53 कॉलेजों में अधिकांश मानक का पालन नहीं किया जा रहा है। 
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इन सभी कॉलेजों को विश्वविद्यालय और एनसीटीई ने नोटिस भेजे हैं। इनको आवंटित सीटों के आधार पर शिक्षक नियुक्त करने समेत अन्य मानक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। ऐसा न करने पर इनको बीएड की आगामी काउंसलिंग में शामिल नहीं किया जाएगा। कॉलेजों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है। 
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विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ. जीएस शर्मा ने बताया कि एनसीटीई की धारा 17 के अंतर्गत 163 कॉलेजों को नोटिस भेजकर शिक्षक समेत अन्य मानक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। अधूरे मानक वाले कॉलेज काउंसलिंग से बाहर रहेंगे।

50 सीटों पर आठ शिक्षक अनिवार्य

बीएड की 50 सीटों के लिए कॉलेज में आठ शिक्षक होना अनिवार्य हैं। इसमें शारीरिक शिक्षा, ड्राइंग एंड पेंटिंग और संगीत का एक-एक शिक्षक होना चाहिए। इसके अलावा पांच शिक्षक एमएड/एमए के साथ नेट/पीएचडी होना जरूरी है। इसी तरह से अगर जिस कॉलेज के पास बीएड की 100 सीटें हैं, तो उसके लिए शिक्षकों की संख्या 16 हो जाएगी। 

अधिकांश कॉलेजों में पढ़ाई के नाम पर औपचारिकता

कई बीएड कॉलेजों में पढ़ाई के नाम पर औपचारिकता निभाई जाती हैं। काउंसलिंग के जरिये सीटों पर प्रवेश जरूर ले लेते, लेकिन यहां नियमित पढ़ाई नहीं की जाती। प्रयोगात्मक परीक्षा के दौरान ही चंद शिक्षक आते हैं। इसमें ऐसे छात्र भी रहते हैं, जो पूरे साल कॉलेज न आकर अन्य कहीं नौकरी करते हैं। यह भी प्रयोगात्मक परीक्षा और परीक्षा के दौरान ही कालेज पहुंचते हैं। 
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