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नोटबंदी का एक महीना, मिलीं लाठियां, बहा पसीना

Fri, 09 Dec 2016 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/आगरा
अमर उजाला ब्यूरो/आगरा Updated Fri, 09 Dec 2016 12:41 AM IST
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Notbandi a month, were sticks, shedding sweat
rupees note
नोटबंदी के बाद से एक महीना कतार में लगकर बीता। अपनी मेहनत की जमा-पूंजी निकालने के लिए लाइन में लगे लोगों पर लाठियां बरसीं तो बैंक में घुसने के लिए पसीना बहाना पड़ा। जरूरत से काफी कम कैश मिलने के कारण जिले भर की बैंक शाखाओं में 80 फीसदी कैशलेस ही रहीं। यही नहीं, ऑल टाइम मनी देने वाले 686 से ज्यादा एटीएम में अधिकांश का शटर खुला ही नहीं। सहालग और रबी की बुवाई के कारण पूरे महीने शहर से लेकर देहात तक में लोग कैश के लिए परेशान रहे। सब्र का बांध टूटा तो जिले भर में कानून व्यवस्था का संकट खड़ा हो गया। बीते पखवाड़े में हंगामा, जाम, नारेबाजी, पथराव, मारपीट की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं।
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नौ नवंबर से पुराने नोट बंद होने के एक महीने में बैंकों में पुराने नोट जमा करने वालों की लंबी कतारें नजर आईं। एक महीने में आगरा में 22.5 लाख बैंक एकाउंट में 6190 करोड़ रुपये जमा किए गए, जबकि 1485 करोड़ रुपये निकाले गए। पुराने नोट बदलने की सुविधा का दुरुपयोग होने पर जब तक केंद्र सरकार ने रोक लगाई, तब तक आगरा में 380 करोड़ रुपये के 500/1000 रुपये के पुराने नोट नए नोटों से बदले जा चुके थे। हर दिन 130 करोड़ रुपये की कैश जरूरत वाले ताजनगरी में दो दिसंबर तक केवल आठ करोड़ रुपये प्रतिदिन ही मिले। बीते सप्ताह शुक्रवार को मिले कैश के बाद अब 25 करोड़ रुपये तक उपलब्ध हो पाए हैं लेकिन तनख्वाह निकालने वालों की भारी भीड़ के कारण यह रकम भी कम साबित हुई। शहर से लेकर देहात तक हर दिन प्रत्येक शाखा में 450 से ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं, जबकि कैश औसतन 40 लोगों को भी नहीं मिल पा रहा।
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‘कैश उपलब्धता कुछ बढ़ी है, लेकिन देहात में अभी यह कम है। बैंकों को ग्रामीण क्षेत्रों में कैश भेजने को कहा गया है। इस एक माह में कार्ड से भुगतान और प्वाइंट आफ सेल की मांग में अप्रत्याशित इजाफा हुआ है।’
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पंकज सक्सेना
लीड बैंक मैनेजर
 
सरकारी खजाने में कैश जमा करने में दिक्कतें
आगरा। आबकारी विभाग को दुकानों की नीलामी में कैश और एफडी जमा कराने में भी दिक्कतें आ रही हैं। डीएम गौरव दयाल ने स्टेट बैंक आफ इंडिया की छीपीटोला शाखा में आठ दिसंबर से ही अतिरिक्त काउंटर खोलने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने स्टेट बैंक प्रबंधन से कहा है कि एक महीने में नोटबंदी के दौरान टैक्स जमा करने में दिक्कतें आई हैं। बैंकों में भारी भीड़ और लंबी कतार के कारण कैश जमा नहीं हो पा रहा है। सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। ऐसे में एक अतिरिक्त काउंटर लगाया जाए।

6190 करोड़ रुपये हुए एक माह में जमा
1485 करोड़ रुपये की हुई निकासी
380 करोड़ रुपये के पुराने नोट एक्सचेंज
130 करोड़ रुपये कैश की हर दिन जरूरत
25 करोड़ रुपये प्रति दिन मिल रहा कैश
486 शाखाओं में से आधी ब्रांच कैशलेस
22 एटीएम ही कर रहे हर दिन काम
 
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