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हे राम! जयंती पर भी बापू की ये निशानी देखने नहीं आया कोई

Tue, 03 Oct 2017 08:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा Updated Tue, 03 Oct 2017 08:19 AM IST
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no visitor in mathura museum on second of october
गांधी जी - फोटो : अमर उजाला
महात्मा गांधी के विचारों की विरासत के लिए पूरे देश में होड़ मची है। उनकी जयंती पर पदयात्रा निकली जा रही, गांधीजी के नाम पर स्वच्छता की बड़ी मुहिम छेड़ी जा रही है। सत्ताधारी दल भी बड़ी-बड़ी दलीलें दे रहे हैं लेकिन गांधी के इस देश में उनकी जयंती पर बापू की नि‌शानियों का किसी को ख्याल नहीं है। 
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दो अक्टूबर को मथुरा में गांधी जयंती के जोरदार आयोजन होते रहे लेकिन राजकीय संग्रहालय में रखे महात्मा गांधी के अस्थि कलश पर दो फूल चढ़ाने कोई नहीं आया। जबकि इसके लिए विशेष तौर पर छुट्टी वाले दिन संग्रहालय खोला गया था। 
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राजकीय संग्रहालय मथुरा के उपनिदेशक डा. एसपी सिंह ने बताया कि गांधी जयंती पर हमने उनके अस्थि कलश को प्रदर्शन के लिए बाहर निकलवाया था। छुट्टी के दिन पूरे स्टाफ को बुलवाया। उपस्थिति रजिस्टर में सोमवार को आने वाले विजिटरों की संख्या शून्य रही।
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नियमित संग्रहालय आने वाले साहित्यकार डा. अशोक बंसल ने कहा जिस गांधी दर्शन से देश को आजादी मिली। उन्हीं के अस्थि कलश के प्रति गांधीवादियों और नई पीढ़ी की बेरुखी चिंता की बात है।

ऐसे मथुरा आया बापू का अस्थि कलश

बता दें कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की मृत्यु हुई। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप उनकी अस्थियों को यमुना में प्रवाहित करने के लिए 12 फरवरी 1948 को अस्थि कलश मथुरा में लाया गया था। अस्थियां प्रवाहित कर दी गई और इस कलश को डीएम कार्यालय में रखवा दिया गया।

साल 1970 में बापू के इस अस्थि कलश को संग्रहालय में लाने के लिए प्रयास हुए और तत्कालीन निदेशक आरपी शर्मा के प्रयासों से कलश संग्रहालय में रख दिया गया। सोमवार को गांधी जयंती पर इस कलश को संग्रहालय प्रशासन ने प्रदर्शन के लिए मुख्य द्वार पर रखवाया था। 

सरकारी छुट्टी के दिन गांधीवादियों की भावनाओं को देखते हुए ये निर्णय लिया गया, लेकिन विडंबना देखिए कि ये कलश मुख्य द्वार पर तीन घंटे रखा रहा लेकिन एक भी आदमी इस कलश को देखने नहीं पहुंचा।
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