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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालयः कुलपति के निर्देश पर विभागों में पहुंची टीम, डिग्री आवेदनों की हकीकत आई सामने
Mon, 07 Sep 2020 12:10 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 07 Sep 2020 12:10 AM IST
सार
- बिना बार कोड वाले 55 हजार डिग्री के आवेदन डंप
- इनका निस्तारण नहीं किया जा रहा है
- छात्रों के विश्वविद्यालय पहुंचने पर आवेदन में बार कोड लगाकर दोबारा प्रक्रिया में लाया जा रहा है
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में करीब 55 हजार डिग्री ऐसे आवेदन डंप पड़े हुए हैं, जिन पर बार कोड नहीं लगा है। ढाई-तीन वर्ष से छात्र-छात्राओं को डिग्री मिलने का इंतजार है। जो विश्वविद्यालय में डिग्री लेने के लिए पहुंच रहा है, उसके आवेदनों को बार कोड लगवाकर दोबारा प्रक्रिया में लाया जा रहा है।
कुलपति के निर्देश चार सदस्यीय टीम डिग्री के लंबित आवेदनों की जांच के लिए शनिवार को विभिन्न विभागों में पहुंची तो हकीकत सामने आई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने डिग्री के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया अप्रैल 2017 में शुरू की थी।
12 जून 2018 तक करीब 55 हजार आवेदन स्वीकार किए गए। इन आवेदनों पर बार कोड नहीं लगा था। इससे आवेदन के ट्रैकिंग की व्यवस्था नहीं थी। 12 जून 2018 के बाद से डिग्री के आवेदनों पर बार कोड लगाया जाना लगेगा। इससे पता चलता था कि आवेदन किस विभाग में है। कितने दिन किस जगह पर रुकी हुई है।
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कुलपति के निर्देश चार सदस्यीय टीम डिग्री के लंबित आवेदनों की जांच के लिए शनिवार को विभिन्न विभागों में पहुंची तो हकीकत सामने आई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने डिग्री के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया अप्रैल 2017 में शुरू की थी।
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12 जून 2018 तक करीब 55 हजार आवेदन स्वीकार किए गए। इन आवेदनों पर बार कोड नहीं लगा था। इससे आवेदन के ट्रैकिंग की व्यवस्था नहीं थी। 12 जून 2018 के बाद से डिग्री के आवेदनों पर बार कोड लगाया जाना लगेगा। इससे पता चलता था कि आवेदन किस विभाग में है। कितने दिन किस जगह पर रुकी हुई है।
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बार कोड लगे आवेदनों का निस्तारण शुरू कर दिया गया, पूर्व में प्राप्त बिना बार कोड वाले आवेदनों का निस्तारण नहीं किया गया। स्थिति यह है कि उस अवधि आवेदन लंबित हैं। इनको न तो प्रक्रिया में लाया गया और न ही रिकार्ड मेंटेन किया गया। विद्यार्थी के विश्वविद्यालय की दौड़ लगाने के बाद डिग्री मिल पा रही है।
स्थितियों को ठीक करने के लिए उठाए जा रहे कदम
डिग्री व अन्य विभागों की जांच कराने के पीछे मकसद ही यही है कि पता किया जा सके किन वजहों से आवेदन लंबित हो रहे हैं। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट दी है।
संबंधित कर्मियों से प्रकरण लंबित होने का कारण पूछा जाएगा, जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई भी ठीक की जाएगी। कोई फाइल मांगने परभ जल्द मिलती नहीं, सारी चीजों को ठीक किया जाएगा। - प्रो. अशोक मित्तल, कुलपति, विश्वविद्यालय
स्थितियों को ठीक करने के लिए उठाए जा रहे कदम
डिग्री व अन्य विभागों की जांच कराने के पीछे मकसद ही यही है कि पता किया जा सके किन वजहों से आवेदन लंबित हो रहे हैं। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट दी है।
संबंधित कर्मियों से प्रकरण लंबित होने का कारण पूछा जाएगा, जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई भी ठीक की जाएगी। कोई फाइल मांगने परभ जल्द मिलती नहीं, सारी चीजों को ठीक किया जाएगा। - प्रो. अशोक मित्तल, कुलपति, विश्वविद्यालय