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हड़ताल से टीकाकरण में कासगंज की रैंक गिरी
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कासगंज। एनएचएम संविदा कर्मियों की हड़ताल का जिला में कोरोना टीकाकरण पर व्यापक असर पड़ा है। प्रदेश में जनपद की रैंक लगातार गिरती जा रही है। यह छह दिन में जिला आठ पायदान नीचे आ गई है। ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे के बीच कोविड टीकाकरण पर पड़ रहे असर ने स्वास्थ्य विभाग को चिंता में डाल दिया है। अधिकारी हड़ताल समाप्त करने के प्रयासों में जुटे हैं।
जिला में कोरोना टीकाकरण ने दीपावली के त्योहार समाप्त होते ही रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया था। एक दिन में 12 से 14 हजार तक टीके जिला में लगने लगे थे। रविवार तक जिला की रैंक 58 नंबर पर चल रही थी, लेकिन सोमवार से एनएचएम कर्मियों ने अपनी हड़ताल शुरू कर दी। इसी के साथ ही टीकाकरण की रैंक में गिरावट आना शुरू हो गई। इस दिन जिला की रेंक 57 दर्ज की गई। छह दिन में पूरे जिले में मात्र 20740 टीके ही लग सके हैं। शनिवार को जिला की रैंक 51 दर्ज की गई। बताया जाता है कि जनपद में नियमित कर्मियों की काफी कमी है। संविदा कर्मियों के सहारे ही स्वास्थ्य सेवाएं चल रही है। टीकाकरण में जो कर्मी लगाए गए हैं उनमें से अधिकतर संविदा कर्मी ही है। यदि हड़ताल शीघ्र समाप्त नहीं होती है तो टीकाकरण अभियान और भी पिछड़ा सकता है।
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जिला में कोरोना टीकाकरण ने दीपावली के त्योहार समाप्त होते ही रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया था। एक दिन में 12 से 14 हजार तक टीके जिला में लगने लगे थे। रविवार तक जिला की रैंक 58 नंबर पर चल रही थी, लेकिन सोमवार से एनएचएम कर्मियों ने अपनी हड़ताल शुरू कर दी। इसी के साथ ही टीकाकरण की रैंक में गिरावट आना शुरू हो गई। इस दिन जिला की रेंक 57 दर्ज की गई। छह दिन में पूरे जिले में मात्र 20740 टीके ही लग सके हैं। शनिवार को जिला की रैंक 51 दर्ज की गई। बताया जाता है कि जनपद में नियमित कर्मियों की काफी कमी है। संविदा कर्मियों के सहारे ही स्वास्थ्य सेवाएं चल रही है। टीकाकरण में जो कर्मी लगाए गए हैं उनमें से अधिकतर संविदा कर्मी ही है। यदि हड़ताल शीघ्र समाप्त नहीं होती है तो टीकाकरण अभियान और भी पिछड़ा सकता है।
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