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यातायात नियमों के उल्लंघन का चालान जल्दी भर दें, देरी होने पर पड़ेगा बहुत महंगा
Fri, 06 Sep 2019 12:09 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 06 Sep 2019 12:09 AM IST
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यातायात नियम उल्लंघन में वाहन का चालान हो गया है और अभी तक आपने जुर्माना अदा नहीं किया है, तो जल्दी जमा कर दें। क्योंकि देरी होने पर यह जुर्माना और भी महंगा पड़ सकता है। फिर नई दरों से जुर्माना देना पड़ेगा।
संभागीय परिवहन विभाग में हर माह औसतन 3200 से 3500 तक वाहनों के चालान होते हैं, जिनमें से 30 फीसदी लंबित हैं। संभागीय परिवहन विभाग में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में होने वाला जुर्माना जमा करना होता है।
इसके साथ ही आरटीओ के प्रवर्तन दल भी वाहन चालकों पर हेलमेट, सीट बेल्ट, ओवरलोडिंग, प्रदूषण आदि के चालान करते हैं। अभी तक यातायात नियमों के उल्लंघन पर निर्धारित नए जुर्माने को लागू नहीं किया गया है।
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संभागीय परिवहन विभाग में हर माह औसतन 3200 से 3500 तक वाहनों के चालान होते हैं, जिनमें से 30 फीसदी लंबित हैं। संभागीय परिवहन विभाग में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन में होने वाला जुर्माना जमा करना होता है।
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इसके साथ ही आरटीओ के प्रवर्तन दल भी वाहन चालकों पर हेलमेट, सीट बेल्ट, ओवरलोडिंग, प्रदूषण आदि के चालान करते हैं। अभी तक यातायात नियमों के उल्लंघन पर निर्धारित नए जुर्माने को लागू नहीं किया गया है।
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जून में भी जुर्माना राशि बढ़ाई गई थी
प्रदेश के परिवहन मुख्यालय ने जून में भी जुर्माना राशि बढ़ाई थी। अभी जुर्माने की नई दरें लागू नहीं हुई हैं। इसके बाद भी आरटीओ में 4200 चालान लंबित हैं। इनमें कोर्ट भेजे जाने वाले वाहन चालान भी शामिल हैं।
आरटीओ (प्रवर्तन) अनिल कुमार ने बताया कि नया जुर्माना लागू होने पर सॉफ्टवेयर में भी बदलाव हो जाएगा। इस स्थिति में पुरानी तारीखों में यातायात उल्लंघन में काटे गए चालान की धनराशि भी नए नियमों के तहत ही वसूली जाएगी।
यही कारण है कि ज्यादातर लंबित चालानों का निपटारा किया जा रहा है। किसी भी चालान को छह माह के भीतर कोर्ट से निस्तारित कराना होता है।
आरटीओ (प्रवर्तन) अनिल कुमार ने बताया कि नया जुर्माना लागू होने पर सॉफ्टवेयर में भी बदलाव हो जाएगा। इस स्थिति में पुरानी तारीखों में यातायात उल्लंघन में काटे गए चालान की धनराशि भी नए नियमों के तहत ही वसूली जाएगी।
यही कारण है कि ज्यादातर लंबित चालानों का निपटारा किया जा रहा है। किसी भी चालान को छह माह के भीतर कोर्ट से निस्तारित कराना होता है।