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UP: भाई-भाभी और भतीजों की हत्या के इल्जाम में 12 साल की जेल, बाहर तो आया...पर गांव में दहशत; पुलिस सतर्क

Fri, 14 Feb 2025 09:01 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 14 Feb 2025 09:01 AM IST
सार

भाई-भाभी और चार मासूम भतीजों के कत्ल का इल्जाम में 12 साल जेल में रहने के बाद गंभीर सिंह बाहर आ गया, लेकिन वो गांव नहीं पहुंचा। वहीं गंभीर सिंह पर मुकदमा दर्ज कराने वाले महावीर का परिवार दहशत में हैं। 
 

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Murder Accused Of Bhai Bhabi And Four Innocent Nieces 12 Years Imprisonment Gambhir Panic in village
गंभीर सिंह - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा के अछनेरा थाना क्षेत्र के गांव तुरकिया में 12 साल पहले हुए सामूहिक हत्याकांड में गंभीर सिंह को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया था। बुधवार को केंद्रीय कारागार से रिहाई होने के बाद वह कहां गया, यह कोई नहीं जानता है। मुकदमा दर्ज कराने वाले महावीर का परिवार दहशत में हैं। पुलिस ने भी गांवों में गश्त लगाना शुरू कर दिया है।
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नौ मई 2012 को गांव तुरकिया निवासी सत्यभान, उनकी पत्नी पुष्पा सहित चार बच्चों की सामूहिक हत्या की गई थी। पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा किया। सत्यभान के भाई गंभीर सिंह सहित बहन गायत्री और दोस्त को जेल भेजा था। स्थानीय अदालत ने गंभीर सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा था। पुलिस की विवेचना में लापरवाही और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाने के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने दो सप्ताह पहले उसे बरी कर दिया था। गंभीर केंद्रीय कारागार में निरुद्ध था। सेंट्रल जेल के जेलर दीपांकर भारती ने बताया कि मंगलवार देर रात बंदी गंभीर की रिहाई का आदेश आया था। बुधवार सुबह 9 बजे उन्हें रिहा कर दिया गया।

 
 
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एक दिन पहले गांव से चला आया था
जेल से बाहर आते ही गंभीर सिंह ने एक ही बात कही कि उसे सामूहिक हत्याकांड में गलत फंसाया गया। वह जयपुर के पास निबाई में एक फैक्ट्री में मजदूरी करता था। भाई सत्यभान ने एक दिन काॅल करके कहा कि गांव में झगड़ा हो गया है। जल्दी गांव पहुंच जाओ। वह आ गया। भाई ने उसे गांव में बुलाया। हत्याकांड से एक दिन पहले भाई सत्यभान ने उसे एक हजार रुपये दिए। तब बहन गायत्री घर में रह रही थी। भाई उसको ससुराल छोड़कर आने की कहने लगा। इस पर वह बहन को लेकर गांव से चला गया। फिर क्या हुआ, वह नहीं जानता। मगर, ईदगाह स्टेशन पर खड़ा हुआ था, तब पुलिस आई। उसे पकड़ लिया। पता चला कि भाई और भाभी सहित बच्चों की हत्या कर दी गई है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

 
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वादी को है इस बात का डर
केंद्रीय कारागार से रिहा होने के बाद गंभीर गांव नहीं पहुंचा। जेल से बाहर आते ही एक प्रार्थनापत्र दिखाया था, जो जिलाधिकारी के नाम पर था। इसमें कई लोगों के नाम भी लिखे थे। इसके बाद गंभीर सिंह ने परिचित के पास जाने की बात कही थी। दूसरी तरफ वादी महावीर सिंह दहशत में है। कई दिन बाद नौकरी छूटने के डर से काम पर आ गए हैं। 
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