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ताजमहल पर बंदरों का आतंक, नसबंदी योजना के बाद भी तेजी से बढ़ रही इनकी संख्या
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
Updated Tue, 28 Aug 2018 02:30 PM IST
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बच्चे पर हमलावर हुए बंदर
- फोटो : अमर उजाला
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ताजमहल और आगरा किला जैसे स्मारकों समेत पुराने शहर में बंदरों का आतंक है। दर्जनों विदेशी सैलानी इनका शिकार बन चुके हैं। बंदरों को पकड़ने और उनकी नसबंदी के लिए सरकारी विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, लेकिन इनकी देरी ने बंदरों की संख्या बढ़ाकर मुसीबत और बढ़ा दी है।
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वन्य जीव विशेषज्ञों के मुताबिक बेहद तेज प्रजननशीलता के कारण दस हजार बंदर 10 साल में तीन लाख हो जाएंगे। तब उन पर नियंत्रण कठिन होगा। सरकारी विभाग बंदरों को पकड़ने के मामले में एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालेंगे, वैसे ही बंदरों की संख्या और उनका आतंक बढ़ जाएगा।
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मादा बंदर हर साल दो बच्चों को जन्म देती है। नए बंदर खाने की तलाश में नए इलाकों की तलाश कर रहे हैं। तीन साल पहले तक ताजमहल पर बंदरों का ऐसा आतंक नहीं था, लेकिन अब खाने की तलाश में 250 से ज्यादा बंदरों का ग्रुप हर सुबह और शाम ताजमहल में दिखता है, जो सैलानियों को खौफ में रखे हुए है।
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दो साल पहले शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट
आगरा में बंदरों का आतंक बढ़ने पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बंदरों की नसबंदी और उन्हें पकड़ने के लिए निजी एनजीओ वाइल्ड लाइफ एसओएस को
1.8 करोड़ रुपये दिए गए थे। तब दावा किया था कि 500 बंदरों को मेडिकल कॉलेज में पिंजरा लगाकर पकड़ा गया और उनकी नसबंदी की गई।
एसओएस के संस्थापक सदस्य कार्तिक सत्य नारायण के मुताबिक चुरमुरा, मथुरा में विदेशी उपकरणों के साथ हॉस्पिटल बनाया गया है, जहां आगरा और मथुरा के बंदरों की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जा सकती है। इन दो सालों में बंदरों की संख्या आगरा में 50 हजार और बढ़ गई।
खाना न मिलने पर खूंखार हो रहे बंदर
वन्य जीव विशेषज्ञों के मुताबिक धार्मिक मान्यताओं के कारण बंदरों को हर मंगलवार, शनिवार को शहर के ही लोग खाने के लिए सामान देते हैं। आबादी में उन्हें आसानी से खाना मिल जाता है। ऐसे में ताजमहल के अंदर आकर जब वह शूकवर के डस्ट बिन और अन्य जगहों पर खाना तलाशते हैं और यह नहीं मिलता तो वह खूंखार हो जाते हैं। विदेशी पर्यटक अपने साथ पानी बोतल और अन्य खाना आदि रखते हैं, जिसे न देने पर काटने की घटनाएं बढ़ी हैं।
बच्चे पर हमलावर हुआ बंदर
ताजमहल के फोरकोर्ट में सोमवार शाम को आई महिला और उसका बेटा पेड़ के नीचे बैठे थे कि दो बंदर उन पर हमलावर हुए। महिला ने बच्चे को बंदर से बचाया। दशहरा घाट के मंदिर और आसपास खाने पीने की चीजें लोग डालते हैं, जहां से यह बंदर यमुना किनारा की दीवार पर चढ़कर ताज के अंदर आते हैं और पर्यटकों द्वारा छोड़े गए सामान में खाना तलाश करते हैं।
1.8 करोड़ रुपये दिए गए थे। तब दावा किया था कि 500 बंदरों को मेडिकल कॉलेज में पिंजरा लगाकर पकड़ा गया और उनकी नसबंदी की गई।
एसओएस के संस्थापक सदस्य कार्तिक सत्य नारायण के मुताबिक चुरमुरा, मथुरा में विदेशी उपकरणों के साथ हॉस्पिटल बनाया गया है, जहां आगरा और मथुरा के बंदरों की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जा सकती है। इन दो सालों में बंदरों की संख्या आगरा में 50 हजार और बढ़ गई।
खाना न मिलने पर खूंखार हो रहे बंदर
वन्य जीव विशेषज्ञों के मुताबिक धार्मिक मान्यताओं के कारण बंदरों को हर मंगलवार, शनिवार को शहर के ही लोग खाने के लिए सामान देते हैं। आबादी में उन्हें आसानी से खाना मिल जाता है। ऐसे में ताजमहल के अंदर आकर जब वह शूकवर के डस्ट बिन और अन्य जगहों पर खाना तलाशते हैं और यह नहीं मिलता तो वह खूंखार हो जाते हैं। विदेशी पर्यटक अपने साथ पानी बोतल और अन्य खाना आदि रखते हैं, जिसे न देने पर काटने की घटनाएं बढ़ी हैं।
बच्चे पर हमलावर हुआ बंदर
ताजमहल के फोरकोर्ट में सोमवार शाम को आई महिला और उसका बेटा पेड़ के नीचे बैठे थे कि दो बंदर उन पर हमलावर हुए। महिला ने बच्चे को बंदर से बचाया। दशहरा घाट के मंदिर और आसपास खाने पीने की चीजें लोग डालते हैं, जहां से यह बंदर यमुना किनारा की दीवार पर चढ़कर ताज के अंदर आते हैं और पर्यटकों द्वारा छोड़े गए सामान में खाना तलाश करते हैं।